February 29, 2020

अब मार्च में नहीं होगी बैंक हड़ताल

अब मार्च में नहीं होगी बैंक हड़ताल

March Bank Strike Differed


मार्च में होने वाली बैंक हड़ताल टली


बैंक यूनियनों ने आईबीए द्वारा अपनी मांगें न माने जाने को लेकर बुलाई हड़ताल आज रद्द कर दी है ।

11 मार्च 12 मार्च और 13 मार्च को प्रस्तावित थी मार्च में तीन दिनी हड़ताल ।

3days strike on March 11 12 and 13d iffered.

आज दिनांक 29 फरबरी 2020 को एक बार फिर से आईबीए और यूनियनों के बीच समझौता वार्ता का अगला दौर चला ।

एक बैंक यूनियन नेता से प्राप्त खबर के अनुसार वार्ता में आईबीए का नर्म रुख देखते हुए मार्च में होने वाले प्रदर्शन और हड़ताल को फिलहाल टाल दिया गया है ।

खबर के अनुसार आईबीए का ऑफर ज्यों का त्यों 15 प्रतिशत ही रहा और 5 दिन की छुट्टी नकदीकरण भी मान्य रहा है ।

5 दिन बैंकिग को लेकर भी आईबीए का रुख नरम रहा और इस माँग को सरकार के पाले में डाल दिया गया है । माना जा रहा है कि आर बी आई व अन्य कई विभाग व शेयर बाजार भी 5 दिन वर्किंग करता है तो यह माँग मानी जा सकती है ।

फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने भी राज्य कर्मियों के 5 दिवसीय कार्य को हरी झंडी दिखा दी है ।

अन्य कई मामलों में बातचीत के बाद फिलहाल आमजन के लिए खुशी की खबर ये है कि अब मार्च में बैंक हड़ताल नहीं होने जा रही है ।

अब मार्च में नहीं होगी बैंक हड़ताल । Bank strike deffered

Important Days and Dates in the Month of March

Important Days and Dates in the Month of March

Important Days and Dates in the Month of March 


Second Wednesday of March: No Smoking Day


Second Thursday of March: World Kidney Day



March 1: Zero Discrimination Day; World Civil Defence Day


March 3: World Wildlife Day, World Hearing Day


March 4: National Security Day


March 8: International Women’s Day


March 12: World Kidney Day


March 14: International Day of Action for Rivers, Pi Day


March 15: World Consumer Rights Day


March 18: Ordnance Factories Day (India)


March 20: International Day of Happiness; World Sparrow day


March 21: World Forestry Day; World Down Syndrome Day; World Poetry Day


March 22: World Day for Water, Bihar Day


March 23: World Meteorological Day


March 24: World TB Day


March 27: World Theatre Day


February 23, 2020

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस Central excise day


केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस (Central excise day ) पूरे भारत में प्रति वर्ष 24 फरवरी को मनाया जाता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस उद्देश्य


केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर है जिसकी जानकारी आम जन को कम ही होती है । पदार्थों के निर्माण  पर उत्पादन शुल्क लगता है जिसकी शुरुवात 24 फ़रवरी 1944 से हुई थी। अत: 24 फ़रवरी को केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस के रूप में मनाया जाता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस मनाने का लक्ष्य आम लोगों में उत्पाद शुल्क और सेवा शुल्क की अहमियत बताना है इस दिन को मनाए जाने का लक्ष्य सभी लोगों में उत्पाद शुल्क के प्रति जागरूकता फैलाना है। कोई भी राष्ट्र बिना किसी मजबूत अर्थव्यवस्था के प्रगति नहीं कर सकता।

इस दिन सन 1944 में उत्पाद शुल्क एवं नमक कानून लागू किया गया था।  तभी से ही इस दिवस को भारत में केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस के नाम से मनाया जाता है। देश का औद्योगिक विकास तभी संभव है जब देशवासी उत्पाद शुल्क भरते हैं, इसके प्रति लोगों को जागरूक करने की जरुरत को समझते हुए ये दिन मनाया जाता है।

देश की अर्थव्यवस्था मजबूत तभी हो सकती है जब सभी देशवासी अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए पूरी निष्ठा के साथ अपने उत्पाद शुल्क का भुगतान करें ।

देश के औद्योगिक विकास में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। हमारे देश का वित्तीय प्रबंध पूर्ण रूपेण जनता से वसूले जाने वाले विभिन्न करों पर निर्भर है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग


यह विभाग केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन ही कार्य करता है। देश की आमदनी का एक तिहाई हिस्सा उत्पादन शुल्क से प्राप्त होता है। कर संग्रहण का दायित्व केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के पास ही है। केन्द्रीय उत्पाद शुल्क 1855 में अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित भारत के सबसे पुराने विभाग में से एक है।

केंन्द्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 वर्ष 1996 से पहले केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 के रूप में जाना जाता था। वर्तमान में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के 23 जोन, 100 आयुक्तालय, 460 प्रभाग टैक्स संग्रह और भारत भर में क़ानून प्रवर्तन गतिविधियों के लिए 2614 रेंज है।

शून्य भेदभाव दिवस

शून्य भेदभाव दिवस

शून्य भेदभाव दिवस


Zero Discrimination Day


शून्य भेदभाव दिवस Zero Discrimination Day जीरो डिस्क्रिमिनेशन डे, 1 मार्च को रोज़मर्रा की स्थितियों में भेदभाव पहचाननें व भेदभाव कहाँ होता है और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाना चाहिए इसके लिए एक कदम है। भेदभाव अक्सर गलत सूचना व रिवाजों पर आधारित होता है।

शून्य भेदभाव दिवस संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा मनाया जाने वाला दिन है। यह समानता और भेदभाव रहित वातावरण बनाने के लिए मनाया जाता है ।

संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार 1 मार्च 2014 को शून्य भेदभाव दिवस मनाया। यह दिसंबर 2013 में विश्व एड्स दिवस पर UNAIDS  द्वारा अपने शून्य भेदभाव अभियान शुरू करने के बाद देखा गया था। यह एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम (एड्स) पर संयुक्त राष्ट्र का एक कार्यक्रम है।

इसे 2014 में  27 फरवरी को UNAIDS के कार्यकारी निदेशक मिशेल सिदीबे द्वारा बीजिंग में लॉन्च किया गया था। और यह दिन पहली बार 1 मार्च 2014 को मनाया गया था।

एचआईवी को रोकने और इलाज के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आवश्यक है। और फिर भी एचआईवी के साथ रहने वाले पांच लोगों में से लगभग एक ने स्थानीय क्लिनिक या अस्पताल जाने से बचने की सूचना दी क्योंकि उन्हें अपने एचआईवी स्थिति से संबंधित कलंक या भेदभाव की आशंका थी।

संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन उम्र, लिंग, जातीयता, त्वचा का रंग, पेशा, विकलांगता,  की परवाह किए बिना सभी को समान रूप से जीने के अधिकार को मनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों के साथ इस दिन को बढ़ावा देते हैं।

क्या होगा यदि आपको पता चले जिस व्यक्ति से आप खाने का सामान खरीद रहे हैं वह एचआईवी से ग्रसित था? क्या आप उससे सामान खरीदेंगे? क्या आप दोस्त को बीमारी के चलते उससे बातचीत करना बंद कर देंगे?

भेदभाव गलत है,  यह सभी के लिए बुरा है, देश के भविष्य के लिए बुरा है। महिलाओं के खिलाफ भेदभाव भारत में उच्च स्तर पर है ।

किसी भी कारण से किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। भेदभाव रहित और समानता की दुनिया को प्राप्त करने के प्रयास जारी है। लोग हर दिन भेदभाव का सामना करते हैं कि वे कौन हैं या वे क्या करते हैं।

भेदभाव खत्म करने के लिए कानून और कार्रवाई की आवश्यकता है। शून्य भेदभाव दिवस Zero Discrimination Day निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाज की ओर देश को आगे बढ़ा सकता है ।

ये दिन विशेष रूप से यूएनएड्स जैसे संगठनों द्वारा ध्यान दिया जाता है जो एचआईवी / एड्स के साथ रहने वाले लोगों के साथ भेदभाव का मुकाबला करते हैं। एचआईवी / एड्स वाले लोग भेदभाव का सामना करते हैं।

यह दिवस बड़े पैमाने पर समाज की भूमिका को उजागर करता है जिस तरह से लोगों को देखा जाता है। यह अधिक निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाज का आह्वान करता है।

February 22, 2020

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day


 

Rashtriya Vigyan Divas


यह दिवस रमन प्रभाव की खोज के कारण मनाया जाता है इस खोज की घोषणा भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (सर सी वी रमन) ने 28 फ़रवरी सन् 1928 को की थी। इसी खोज के लिये उन्हे 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था। यह किसी भी भारतीय व एशियन व्यक्ति द्वारा जीता गया पहला नोबल पुरस्कार था।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन महान भारतीय वैज्ञानिक सर सी.वी. रामन द्वारा अपनी खोज को सार्वजनिक किए जाने की स्मृति में किया जाता है। विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले रामन पहले एशियाई थे। उनका आविष्कार उनके ही नाम पर ‘रामन प्रभाव’ के नाम से जाना जाता है।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्य़ोगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) ने वर्ष 1986में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के तौर पर मनाने के लिए केंद्र सरकार को अनुमोदन किया था। केंद्र सरकार ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया और वर्ष 1986  में  28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के तौर पर घोषित किया गया। पहला राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी1987 को मनाया गया था।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उद्देश्य :


विज्ञान के द्वारा ही हम समाज के लोगों का जीवन स्तर अधिक से अधिक खुशहाल बना सकते हैं। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस विज्ञान से होने वाले लाभों के प्रति समाज में जागरूकता लाने और वैज्ञानिक सोच पैदा करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित व प्रेरित करना तथा जनसाधारण को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है।

विज्ञान के बिना विकास की राह में तीव्रता से आगे नहीं बढ़ा जा सकता है। विज्ञान से गलत धारणा और अंधविश्वासों का विनाश होता है। विज्ञान और तकनीक को प्रसिद्ध करने के साथ ही देश के नागरिकों को इस क्षेत्र मौका देकर नई उंचाइयों को हासिल करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।

देश के विकास के लिए वैज्ञानिक सोच का प्रसार आवश्यक है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस जैसे आयोजन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार में निश्चित रूप से सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

कैसे मनाया जाता है :


इस दिन सभी विज्ञान संस्थानों, विज्ञान प्रयोगशालाएं, विज्ञान स्कूल और कॉलेज में विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों से संबंधित प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।

आयोजनों में वैज्ञानिकों के भाषण, निबंध, लेखन, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, विज्ञान प्रदर्शनी, इत्यादि कार्यक्रम रहते हैं। विज्ञान के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए राष्ट्रीय एवं दूसरे पुरस्कारों की घोषणा भी की जाती है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर हर वर्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आज भारत विश्व के चुनिंदा देशों में शामिल है जिसने चंद्रयान और मंगलयान की सफलता हासिल की है ।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित अनेक सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाएं विज्ञान दिवस पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं।

विज्ञान से होने वाले लाभों के प्रति समाज में जागरूकता लाने और वैज्ञानिक सोच पैदा करने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद की पहल पर हर साल विज्ञान दिवस के दिन पूरे देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 क्या है रामन प्रभाव


1920 के दशक में एक बार जब सर सी बी रमन स्वदेश लौट रहे थे तो उन्होंने भूमध्य सागर के जल में उसका अनोखा नीला व दूधियापन देखा।

कलकत्ता विश्वविद्यालय पहुंचकर रामन ने पार्थिव वस्तुओं में प्रकाश के बिखरने का नियमित अध्ययन शुरू किया। लगभग सात वर्ष बाद रामन अपनी उस खोज पर पहुंचे, जो 'रामन प्रभाव' के नाम से विख्यात हुई।

इस तरह रामन प्रभाव का उद्घाटन हो गया। रामन ने  28 फरवरी 1928 को इस खोज की घोषणा की थी।

रमन प्रभाव एक ऐसी घटना है जिसमें प्रकाश की किरण को अणुओं द्वारा हटाए जाने पर वह प्रकाश अपने तरंगदैर्ध्य में परिवर्तित हो जाता है ।

प्रकाश की किरण जब साफ पारदर्शी रसायनिक मिश्रण से गुजरती है तो बीम की दूसरी दिशा में प्रकाश का छोटा सा अंश उभरता है।

इस बिखरे हुए प्रकाश का ज्यादातर हिस्से का तरंगदैर्ध्य अपरिवर्तित रहता है हालांकि छोटा सा अंश मूल प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में अलग तरंगदैर्ध्य वाला होता है और उसकी उपस्थिति रमण प्रभाव का परिणाम है।

प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 1930 में उन्हें भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया।

उनके इस योगदान की स्मृति में वर्ष1987 से प्रत्येक साल 28 फरवरी को भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

बुलाती है मगर जाने का नहीं

बुलाती है मगर जाने का नहीं

what is Bulati hai magar jane ka nai


 

क्या है बुलाती है मगर जाने का नहीं


 

इन दिनों यह टिकटॉक, ट्विटर सहित सभी सोशल मीडिया में वायरल बना हुआ है। लोग इस पर मजेदार ट्वीट्स, मीम्स, जोक्स बना रहे हैं। यूट्यूब पर वीडियोज की भरमार है।

दरअसल यह राहत इन्दौरी जी का एक शेर है जो कई तरह से वायरल हो रहा है जो इस प्रकार है

Bulati Hai Magar Jaane Ka Nai is a Ghazal Poetry of Rahat Indori .which is given below.

 

बुलाती है मगर जाने का नईं

बुलाती है मगर जाने का नईं

ये दुनिया है इधर जाने का नईं

 

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर

मगर हद से गुजर जाने का नईं

 

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो

चले हो तो ठहर जाने का नईं

 

सितारे नोच कर ले जाऊंगा

मैं खाली हाथ घर जाने का नईं

 

वबा फैली हुई है हर तरफ

अभी माहौल मर जाने का नईं

 

वो गर्दन नापता है नाप ले

मगर जालिम से डर जाने का नईं

राहत इन्दौरी

 

यस बैंक से निकाल सकेंगे मात्र 50 हजार Click Here


Bulati hai magar jaane ka nai


Ye duniya hai idhar jaane ka nai



Mere bete kisi se ishq kar


Magar had se gujar jaane ka nai



Sitare noch kar le jaaunga


Mein khali haath ghar jaane waala nai



Waba feli hui hai har taraf


Abhi maahol mar jaane ka nai




Zamin bhi sir par rakhni ho to rakho


Chaale ho to thahar jaane ka nai



Wo gardan naapta hai, naap le


Magar jaalim se dar jaane ka nai



--Rahat Indori





February 17, 2020

NPR starting on 1st April , What is NPR ?

NPR starting on 1st April , What is NPR ?

National Population Register (NPR)


The National Population Register (NPR) is a database of the identities of all Indian residents.


The National Population Register (NPR) is a Register of usual residents of the country. It is being prepared at the local Village, Town, sub-District, District, State and National level under provisions of the Citizenship Act .


It is mandatory for every usual resident of India to register in the NPR. A usual resident is defined for the purposes of NPR as a person who has resided in a local area for the past 6 months or more or a person who intends to reside in that area for the next 6 months or more.




It is to improve implementation of the economic policies of the government and its various programs, in so far as they affect different segments of the population. NPR and UIDAI work closely together to create a database of Indian residents.





The objective of the NPR is to create a comprehensive identity database of every usual resident in the country. The database would contain demographic as well as biometric particulars.




What is in NPR


The following demographic details of every individual are required for every usual resident:


Name of person


Relationship to head of household


Father’s name


Mother’s name


Spouse’s name (if married)


Sex


Date of Birth


Marital status


Place of birth


Nationality (as declared)


Present address of usual residence


Duration of stay at present address


Permanent residential address


Occupation/Activity


Educational qualification



Starting of NPR


The data for National Population Register was collected in 2010 alongwith the houselisting phase of Census of India 2011.


The updation of this data was done during 2015 by conducting door to door survey. The digitisation of the updated information has been completed.


Now it has been decided to update the National Population Register along with the Houselisting phase of Census 2021 during April to September 2020 in all the States/UTs except Assam.


A Gazette notification to this effect has already been published by the Central Government.




The exercise to update the National Population Register (NPR) will kick off on April 1 2020 in the  NDMC area in new delhi with President Ram Nath kovind to be the first resident to be enrolled.




February 10, 2020

महर्षि दयानंद सरस्वती

महर्षि दयानंद सरस्वती

महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती 2020 में कब है?


(Maharishi Dayanand Saraswati jayanti 2020)


महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती इस साल 18 फरवरी 2020, को मनाई जाएगी ।

महर्षि दयानंद सरस्वती Maharishi Dayanand Saraswati


महर्षि दयानंद सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati) आर्य समाज के संस्थापक,  महान चिंतक, महान समाज सुधारक, राष्ट्र-निर्माता,  प्रकाण्ड विद्वान और देशभक्त थे।

स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म  12 फरवरी 1824 को गुजरात के राजकोट जिले के काठियावाड़ क्षेत्र भूतपूर्व मोरवी राज्य के टंकारा में ब्राह्मण परिवार में हुआ था।  हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर  दयानन्द सरस्वती की जयंती मनाई जाती है।

बताया जाता है मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण उनका नाम मूलशंकर रखा गया। उनके पिता का नाम अम्बाशंकर था और माता का नाम यशोदा बाई था। चौदह वर्ष की आयु तक मूलशंकर ने सम्पूर्ण संस्कृत व्याकरण, `सामवेद' और 'यजुर्वेद' का अध्ययन कर लिया था ।

स्वामी दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों को दूर करने में अपना खास योगदान दिया है। उन्होंने वेदों को सर्वोच्च माना और वेदों का प्रमाण देते हुए समाज में फैली कुरीतियों का विरोध किया।

अपने 59 वर्ष के जीवन में महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने राष्ट्र में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ लोगो को जगाया और अपने ज्ञान प्रकाश को देश में फैलाया । उन्होंने अपने कार्यो से समाज को नयी दिशा एवं उर्जा दी। महात्मा गाँधी जैसे कई महापुरुष स्वामी दयानन्द सरस्वती के विचारों से प्रभावित थे ।

बाल्यवस्था के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं घटीं, जिन्होंने उन्हें सच्चे भगवान,  मौत और मोक्ष का रहस्य जानने के लिए संन्यासी जीवन जीने को विवश कर दिया। उन्होंने इन रहस्यों को जानने के लिए पूरा जीवन लगा दिया और फिर जो ज्ञान हासिल हुआ, उसे पूरे विश्व को अनेक सूत्रों के रूप में बताया।

मथुरा के स्वामी विरजानंद इनके गुरू थे। इक्कीस वर्ष की आयु में घर से निकल पड़े। घर त्यागने के पश्चात 18 वर्ष तक इन्होंने सन्यासी का जीवन बिताया। इन्होंने बहुत से स्थानों में भ्रमण करते हुए कतिपय आचार्यों से शिक्षा प्राप्त की।

धर्म सुधार हेतु अग्रणी रहे दयानंद सरस्वती ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी। वेदों का प्रचार करने के लिए उन्होंने पूरे देश का दौरा करके पंडित और विद्वानों को वेदों की महत्ता के बारे में समझाया।

स्वामी जी ने धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को पुन: हिंदू बनने की प्रेरणा देकर शुद्धि आंदोलन चलाया। 1886 में लाहौर में स्वामी दयानंद के अनुयायी लाला हंसराज ने दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज की स्थापना की थी।

हिन्दू समाज को इससे नई चेतना मिली और अनेक संस्कारगत कुरीतियों से छुटकारा मिला।उनका मानना था कि किसी भी अहिन्दू को हिन्दू धर्म में लिया जा सकता है।

समाज सुधारक होने के साथ ही दयानंद सरस्वती जी ने अंग्रेजों के खिलाफ भी कई अभियान चलाए। जिससे अँग्रेजी सरकार स्वामी दयानंद से बुरी तरह तिलमिला गयी और स्वामीजी से छुटकारा पाने के लिए, उन्हें समाप्त करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रचे ।

स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने विचारों के प्रचार के लिए हिन्दी भाषा को अपनाया। उनकी सभी रचनाएं और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश' मूल रूप में हिन्दी भाषा में लिखा गया।

कुछ घटनाओं के बाद से उनके जीवन पर गहरा आसार हुआ वे आज भी प्रासंगिक हैं जैसे :

मूल शंकर के पिता शिव के परम भक्त थे। पिता के कहने पर बालक मूलशंकर ने 14 वर्ष की उम्र में भगवान शिव का व्रत रखा। मन्दिर में स्थित शिवलिंग पर चूहे उछल कूद मचा रहे थे। जिससे बालक मूलशंकर के मन में विचार आया कि भगवान इन चूहों को भगाने की शक्ति भी नहीं रखता तो वह कैसा भगवान ?

उनकीं चौदह वर्षीय छोटी बहन की मौत हो गई। पूरा परिवार व सगे-संबंधी विलाप कर रहे थे और मूलशंकर भी गहरे सदमे व शोक में भाव-विहल थे। तभी उनके मस्तिष्क में विचार पैदा हुए कि इस संसार में जो भी आया है उसे एक न एक दिन जाना ही पड़ेगा अर्थात् सबकी मृत्यु होनी निश्चित है । अगर ऐसा है तो फिर शोक किस बात का?

क्या मृत्यु पर विजय नहीं पाई जा सकती? यदि हाँ तो कैसे? इस सवाल का जवाब पाने के लिए युवा मूलशंकर खोजबीन में लग गया।

एक आचार्य ने सुझाया कि मृत्यु पर विजय ‘योग’ से पाई जा सकती है और ‘योगाभ्यास’ के जरिए ही अमरता को हासिल किया जा सकता है। आचार्य के इस जवाब ने युवा मूलशंकर को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने ‘योगाभ्यास’ के लिए घर छोड़ने का फैसला कर लिया।

जब पिता को उनकी इस मंशा का पता चला तो उन्होंने मूलशंकर को काम में लगा दिया और उनके विवाह का फैसला लिया । लेकिन मूलशंकर ने घर को त्यागकर सच्चे भगवान, मौत और मोक्ष का रहस्य जानने का दृढ़संकल्प ले लिया।

मूलशंकर ने संन्यासी बनने की राह पकड़ ली और अपना नाम बदलकर ‘शुद्ध चौतन्य ब्रह्माचारी’ रख लिया। वे सन् 1847 में घूमते-घूमते नर्मदा तट पर स्थित स्वामी पूर्णानंद सरस्वती के आश्रम में जा पहुंचे और उनसे दीक्षा ली। गुरु से उन्हें एक नया नाम मिला ‘दयानंद सरस्वती’।

एक दिन जब वे मथुरा पहुंचे तो उन्हें स्वामी विरजानंद के दर्शन हुए। पूर्ण ज्ञान प्राप्ति करने के लिए उन्होंने स्वामी जी को अपना गुरू बना लिया।

स्वामी विरजानंद ने दयानंद सरस्वती से बतौर गुरु-दक्षिणा वचन मांगते हुए कहा कि देश का उपकार करों, सत्य शास्त्रों का उद्धार करो,  वैदिक धर्म का प्रचार करो। तब स्वामी दयानंद गुरु के वचनों का पालन करने आश्रम से निकल पड़े। उन्होंने देशभर का भ्रमण कर वेदों के ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया।

ज्ञान की चाह में ये स्वामि विरजानंद जी से मिले और उन्हें अपना गुरु बनाया। विरजानंद ने ही इन्हें वैदिक शास्त्रों का अध्ययन करवाया। विरजानंद जी ने इन्हें समाज सुधार, समाज में व्याप्त कुरूतियों के खिलाफ कार्य करने, अंधविश्वास को मिटाने,  वैदिक शास्त्र का महत्व लोगो तक पहुँचाने जैसे कठिन संकल्पों में बाँधा और इसी संकल्प को अपनी गुरु दक्षिणा कहा ।

गुरु से मार्गदर्शन मिलने के बाद स्वामी दयानंद सरस्वती ने समूचे राष्ट्र का भ्रमण प्रारम्भ किया और वैदिक शास्त्रों के ज्ञान का प्रचार प्रसार किया। उन्हें कई विपत्तियों का सामना करना पड़ा, अपमानित होना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपना मार्ग नहीं बदला।

उन्होंने अलौकिक ज्ञान और मोक्ष का अचूक मंत्र दिया, ‘वेदों की ओर लौटो’। उन्होंने बताया कि ईश्वर सर्वत्र विद्यमान है।

स्वामी दयानंद ने एक नए स्वर्णिम समाज की स्थापना के उद्देश्य से 10 अप्रेल 1875 को गिरगांव मुम्बई व पूना में ‘आर्य समाज’ नामक सुधार आन्दोलन की स्थापना की। आर्य समाज के दस प्रमुख सिद्धान्तों को सूत्रबद्ध किया गया। ये सिद्धांत आर्य समाज की शिक्षाओं का मूल निष्कर्ष हैं।

उन्होंने सन् 1874 में अपने कालजयी ग्रन्थ ‘सत्यार्थ-प्रकाश’ की रचना की। वर्ष 1908 में इस ग्रन्थ का अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित किया गया।

इसके अलावा उन्होंने कुल मिलाकर उन्होंने 60 पुस्तकें, 14 संग्रह, 6 वेदांग, अष्टाध्यायी टीका, अनके लेख लिखे जिनमें ‘ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका’, ‘संस्कार-विधि’, ‘आर्याभिविनय’ आदि अनेक विशिष्ट ग्रन्थों की रचना की।

स्वामी दयानंद सरस्वती के तप, योग, साधना, वैदिक प्रचार, समाजोद्धार और ज्ञान का लोहा बड़े-बड़े विद्वानों और समाजसेवियों ने माना।

स्वामी जी ने जीवन भर वेदों और उपनिषदों का पाठ किया और संसार के लोगो को उस ज्ञान से लाभान्वित किया, उन्होने वैदिक धर्म को सर्वश्रेष्ठ बताया ।

1857 की क्रांति में भी स्वामी जी ने अपना अमूल्य योगदान दिया अंग्रेजी हुकूमत से जमकर लोहा लिया, स्वामी दयानंद सरस्वती वैदिक धर्म में विश्वास रखते थे उन्होंने राष्ट्र में व्याप्त कुरीतियों एवम अन्धविश्वासो का सदैव विरोध किया ।

उन्होंने देश भ्रमण के दौरान उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ बोलना प्रारम्भ किया, लोगो में भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आक्रोश था इसलिए उन्होंने लोगो को एकत्र करने का कार्य किया।

लोगो को जागरूक कर सभी को सन्देश वाहक बनाया गया, जिससे आपसी रिश्ते बने और एकजुटता आये। इन्होने सबसे पहले साधू संतो को जोड़ा, जिससे उनके माध्यम से जन साधारण को आजादी के लिए प्रेरित किया जा सके।

बाल विवाह की प्रथा के विरुद्ध उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रों में उल्लेखित हैं, मनुष्य जीवन में 25 वर्ष ब्रम्हचर्य के है उसके अनुसार बाल विवाह एक कुप्रथा हैं ।

दयानन्द सरस्वती जी ने विधवा नारियों के पुनर्विवाह के लिये अपना मत दिया और लोगो को इस ओर जागरूक किया। स्वामी जी ने सदैव नारी शक्ति का समर्थन किया उनका मानना था कि नारी शिक्षा ही समाज का विकास हैं। पति के साथ पत्नी को भी उसकी मृत्यु शैया पर अग्नि को समर्पित कर सती करने की अमानवीय सतीप्रथा का भी उन्होने विरोध किया। उन्होंने नारी को समाज का आधार कहा और कहा उनका शिक्षित होना जरुरी हैं।

उन्होंने सदैव कहा शास्त्रों में वर्ण भेद शब्द नहीं, बल्कि वर्ण व्यवस्था शब्द हैं । जिसके अनुसार चारों वर्ण केवल समाज को सुचारू बनाने के अभिन्न अंग हैं, जिसमे कोई छोटा बड़ा नहीं अपितु सभी अमूल्य हैं। उन्होंने सभी वर्गों को समान अधिकार देने की बात रखी और वर्ण भेद का विरोध किया ।

एक बार स्वामी दयानन्द सरस्वती जोधपुर के महाराज राजा यशवंत सिंह के यहाँ गए । राजा ने उनका बहुत आदर सत्कार किया उनके कई व्यख्यान सुने। एक दिन जब राजा यशवंत एक नर्तकी नन्ही जान के साथ भोग विलास लिप्त थे, तब स्वामी जी ने यह सब देखा और इसका विरोध किया ।

स्वामी जी की बात मान यशवंत सिंह ने नन्ही जान से अपने रिश्ते खत्म कर दिए। इस कारण नन्ही जान स्वामी जी से नाराज हो गई और उसने रसोईया के साथ मिलकर स्वामी जी के भोजन में जहर मिला दिया, जिससे स्वामी जी का स्वास्थ बहुत ख़राब हो गया।

रसोईया ने अपनी गलती स्वीकार कर माफ़ी मांगी स्वामी जी ने उसे माफ़ कर दिया।

काफी इलाज के बाद भी हालत में सुधार नहीं आया और उन्होंने 30 अक्टूबर 1883 में उनकी म्रत्यु हो गई।

 

 

February 08, 2020

फलों के नाम Falon Ke Name हिन्दी और अंग्रेजी में

फलों के नाम Falon Ke Name हिन्दी और अंग्रेजी में

फलों के नाम ( Falon Ke Naam) हिन्‍दी और अंग्रेजी में  Name of Fruits in Hindi and English


अक्सर बच्चे अंग्रेजी में कहे गए फलो का हिन्दी नाम पूछते हैं कि उन्हें हिन्दी में क्या कहा जाता हैं या फिर हिंदी से अंग्रेजी में क्या कहते हैं, छोटे बच्चो को उनकी जनरल नॉलेज के लिए इन सारे फलो के नाम हिन्दी व अंग्रेजी में याद करवा सकते है

हिन्‍दी और अंग्रेजी में फलों के नाम Fruits Name In Hindi and english और उनके बारे में जानकारी –

क्र.सं.   अंग्रेजी नाम   उच्चारण     हिन्‍दी में नाम

  1. Apple             एप्पल              सेब


 

  1. Banana        बनाना             केला


 

  1.  Orange       ओरेंज            नारंगी, संतरा


 

  1.  Guava        ग्वावा             अमरूद्


 

  1. Mango        मेंगो               आम


 

  1. Papaya       पपाया             पपीता


 

  1. Peach         पीच                आडू


 

  1. Pear           पियर              नाशपाती


 

  1. Fig             फिग               अंजीर


 

  1.  Grapes    ग्रेप्स              अंगूर्


 

  1. Date        डेट                  खजूर

  2.  Pineapple पाइनएप्पल  अनन्नास


 

  1.  Plum       प्लम         आलूभुखारा


 

  1.  Pomegranate    पोमेग्रेनेट      अनार्


 

  1. Apricot        एप्रिकोट      खूबानी


 

  1.  Black Currant     ब्लेक करंट      फालसेब


 

  1.  Blackberry     ब्लेक बेरी             जामुन


 

  1.  Coconut        कोकोनट         नारियल


 

  1. Musk-melon      मस्कमेलन         खरबुजा


 

  1.  Water-melon    वाटरमेलन      तरबुजा


 

  1.  Gooseberry      गूज बेरी        करोंदा


 

  1.  Jack-fruit       जेक फ्रूट          कटहल


 

  1.  Lemon, Lime    लेमन,लाइम     नींबू


 

  1.  Litchi                 लीची                   लीची


 

  1.  Mulberry        मेल्बेरी            शहतूत


 

  1. Raisins          रेजिन्स              किसमिस


 

  1. Sapota, Naseberry   सपोटा, नेसबेरी         चीकू


 

  1. 2 Custard Apple   कस्टर्ड एप्पल           शरीफा, सीताफल


 

  1. Sweet lime             स्वीट लाइम             मौसमी


 

  1. Tamarind                    टेमरिंड                   इमली


 

  1. Water chestnut            वाटर चेस्टनट         सिंघाड़ा


 

  1. Myrobalan               मायरोबलन              आंवला


 

  1. Blueberry             ब्लू बेरी                   नीलबदरी


 

ग्रहों के नाम GRAHO KE NAME हिन्‍दी और अंग्रेजी में

ग्रहों के नाम GRAHO KE NAME हिन्‍दी और अंग्रेजी में

ग्रहों के नाम GRAHO KE NAME हिन्‍दी और अंग्रेजी में

ग्रहों के नाम (Graho Ke Naam) हिन्‍दी और अंग्रेजी में  Name of planets in Hindi and English


अक्सर प्रतियोगी परीक्षा में ग्रहों के नाम पूछे जाते है तो आइये जानते है हिन्‍दी और अंग्रेजी में ग्रहों के नाम Planets Name In Hindi and english और उनके बारे में जानकारी –

क्र.सं.  अंग्रेजी नाम   उच्चारण     हिन्‍दी में नाम

  1.  Mars           मार्स          मंगल

  2.  Mercury    मर्करी        बुध

  3.  Neptune    नेप्‍च्‍यून     वरूण

  4.  Saturn       सैटर्न         शनि

  5.  Earth        अर्थ           पृथ्‍वी

  6.  Jupiter     जुपीटर       बृहस्‍पति

  7.  Uranus     युरेनस       अरूण

  8.  Venus       वीनस        शुक्र


___________________________________________________

ये भी देखें.  रंगों के नाम Name of Colors in hindi and english

फलों के नाम Falon Ke Name हिन्दी और अंग्रेजी में

___________________________________________________

सौरमंडल के ग्रहों के नाम Planets Name In Hindi


सूर्य या किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोल पिण्डों को ग्रह कहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के अनुसार हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं -बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेप्चून। इनके अतिरिक्त तीन बौने ग्रह और हैं - सीरीस, प्लूटो और एरीस।

ब्रह्मांड में असंख्य ग्रह है और हमारी आकाशगंगा में ही करोड़ो ग्रह है। हमारे सौरमंडल का तारा सूर्य है। यहां पर हमारे सौरमंडल के ग्रहों के नाम पर चर्चा करेंगे।

इन ग्रहों के बारे में जानकारी इस प्रकार है –

1. बुध ग्रह [मर्करी प्लानेट] Mercury Planet:


बुध ग्रह  सौरमंडल  के आठ ग्रहों में सबसे छोटा और सूर्य के सबसे नजदीक का ग्रह है। यह एक ठोस ग्रह है। बुध की धरती क्रेटरों से अटी पडी है तथा बिलकुल हमारे चन्द्रमा जैसी नजर आती है । यह सूर्य की एक परिक्रमा करने में 88 दिन लगाता है। बुध का कोई उपग्रह नहीं है। यह अपने परिक्रमा पथ पर 29 मील प्रति क्षण की गति से चक्कर लगाता है। बुध को सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से ठीक पहले नग्न आंखो से देखा जा सकता है। सूर्य के बेहद निकट होने के कारण इसे सीधे देखना मुश्किल होता है।

2. शुक्र ग्रह [वीनस प्लानेट] venus Planet:


यह सूर्य से दूसरे नंबर का है। शुक्र सौरमण्डल का सबसे चमकीला ग्रह है।  इस ग्रह पर जहरीली गैस का वायुमंडल है जिसमें घने बादल है। शुक्र का कोई भी उपग्रह नही है। शुक्र सूर्य से दूसरा ग्रह है और छठवां सबसे बड़ा ग्रह है। शुक्र पर कोई भी चुंबकीय क्षेत्र नहीं है और इसका कोई उपग्रह नहीं है। शुक्र ग्रह को आँखों से देखा जा सकता है। शुक्र सौर मंडल का सबसे गरम ग्रह है। पृथ्वी के समान आकार, गुरुत्वाकर्षण और संरचना के कारण उसे पृथ्वी का "बहन ग्रह" कहा जाता है। शुक्र की अधिकतर सतह ज्वालामुखी गतिविधि द्वारा निर्मित नजर आती है। शुक्र पर पृथ्वी की तरह अनेकानेक ज्वालामुखी है ।

 

3. पृथ्वी ग्रह [अर्थ प्लानेट] Earth Planet :


पृथ्वी सौलर सिस्टम का एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन है। पृथ्वीको नीला ग्रह भी कहते है। पृथ्वी की आकृति अंडाकार है।  पृथ्वी बुध और शुक्र के बाद सूर्य से तीसरा ग्रह है। आंतरिक ग्रहों में से सबसे बड़ा ग्रह है। सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी को खगोलीय इकाई कहते हैं। ये लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। ये दूरी वासयोग्य क्षेत्र में है। किसी भी सितारे के गिर्द यह एक खास जोन होता है जिसमें जमीन की सतह के ऊपर का पानी तरल अवस्था में रहता है। सूर्य के चारों ओर परिक्रमा के दौरान पृथ्वी अपनी कक्षा में 365 बार घूमती है; इस प्रकार, पृथ्वी का एक वर्ष लगभग 365 दिन लंबा होता है। पृथ्वी का अपना चुंबकिय क्षेत्र है जिसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं।

 

4. मंगल ग्रह [मार्स प्लानेट] Mars Planet:


मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। प्रथ्वी से देखने पर इसकी आभा रिक्तिम दिखती है जिस कारण मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहते है। मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना तलाशी जा रही है। ऐसा माना जाता है कि मंगल पर करोड़ो सालो पहले तक जीवन था । मंगल ग्रह का यह लाल रंग आयरन आक्साइड की अधिकता की वजह से है। मंगल, पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है। यह पृथ्वी से कम घना है । पृथ्वी की तरह मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला गृह है। निम्न वायुमंडलीय दाब के कारण मंगल की सतह पर तरल जल मौजूद नहीं है मगर बर्फीली चोटियां मोटे तौर पर जल से बनी हुई नजर आती हैं। मंगल पर पहुँचने के साथ अन्य खोजों के लिए विभिन्न देशों के प्रयास जारी हैं।

 

5. बृहस्पति ग्रह [ज्यूपिटर प्लानेट] Jupiter Planet: 


बृहस्पति सूर्य से पांचवां और सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। बृहस्पति एक गैसीय ग्रह है। बृहस्पति एक गैस दानव है जिसका द्रव्यमान सूर्य के हजारवें भाग के बराबर तथा सौरमंडल में मौजूद अन्य सात ग्रहों के कुल द्रव्यमान का ढाई गुना है। बृहस्पति को शनि, युरेनस और नेप्चून के साथ एक गैसीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

इन चारों ग्रहों को बाहरी ग्रहों के रूप में जाना जाता है और इसका रंग पिला है। रोमन सभ्यता ने अपने देवता जुपिटर के नाम पर इसका नाम रखा था। बृहस्पति सदा अमोनिया क्रिस्टल और संभवतः अमोनियम हाइड्रोसल्फाइड के बादलों से ढंका रहता है। बृहस्पति पर आकृतियों की पारस्परिक क्रिया तूफान और अस्तव्यस्तता का कारण होती है। बृहस्पति पर सबसे जानी पहचानी आकृति विशाल लाल धब्बा या ग्रेट रेड स्पोट है। यह पृथ्वी से भी बड़ा एक प्रति चक्रवाती तूफ़ान है ।

6. शनि ग्रह [सैटर्न प्लानेट] Saturn Planet:


शनि सौरमण्डल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। यह सूर्य से छठां ग्रह है। यह ग्रह भी गैसीय है। यह आकाश में हल्के पीले तारे के समान दिखाई देता है। सौरमंडल में बृहस्पति के बाद सबसे बड़ा ग्रह है। शनि का बाह्य भाग मुख्य रूप से गैस का बना है । शनि ग्रह का गुरुत्व पानी से भी कम है और इसके लगभग 62 उपग्रह हैं। शनि एक गैस दानव घोषित हुआ है पर यह पूरी तरह से गैसीय नहीं है। ग्रह मुख्य रूप से हाइड्रोजन का बना हैं ।शनि ग्रहीय छल्लों की प्रणाली के लिए बेहतर जाना जाता है जो उसे दृष्टिगत रूप से अनूठा बनाता है। यह छल्ले शनि की भूमध्य रेखा के ऊपर 6,630 किमी से लेकर 1,20,700 किमी तक विस्तारित है जो अंश मात्रा की थोलीन अशुद्धियों एवं अनाकार कार्बन के साथ जल बर्फ से बने हुए हैं।

इसके 62 उपग्रह में टाइटन सबसे बड़ा उपग्रह है। टाइटन बृहस्पति के उपग्रह गिनिमेड के बाद दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है।

7. अरुण ग्रह [यूरेनस प्लानेट] Uranus Planet:


अरुण ग्रह हमारे सौर मंडल में सूर्य से सातवाँ ग्रह है यह भी एक गैसीय ग्रह है। यह सौरमण्डल के बाहरी ग्रहों में से एक है। अरुण या युरेनस व्यास के आधार पर यह सौर मंडल का तीसरा बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर चौथा बड़ा ग्रह है। यूरेनस ग्रह पर भी वलय है लेकिन बहुत पतले होने के कारण दिखाई नही देते है। द्रव्यमान में यह पृथ्वी से 14.5 गुना अधिक भारी और आकार में पृथ्वी से 63 गुना अधिक बड़ा है। अरुण को बिना दूरबीन के आँखों से भी देखा जा सकता है।

8. वरुण ग्रह [नेपच्युन प्लानेट] Neptune Planet:


यह सौरमंडल का अंतिम ग्रह माना जाता है और हमारे सौर मंडल में सूर्य से आठवां ग्रह है । वरुण ग्रह भी गैसीय है। वरुण सूर्य से बहुत दूर स्थित ग्रह है। व्यास के आधार पर यह सौर मंडल का चौथा बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर तीसरा बड़ा ग्रह है। वरुण का द्रव्यमान पृथ्वी से 17 गुना ज्यादा है और अपने पड़ोसी ग्रह अरुण से थोडा ज्यादा है। वरुण पर बादल, तूफ़ान और मौसम का बदलाव साफ़ नज़र आता है। वरुण को नीला दैत्य भी कहा जाता है।

___________________________________________________

ये भी देखें.  रंगों के नाम Name of Colors in hindi and english

फलों के नाम Falon Ke Name हिन्दी और अंग्रेजी में

__________________________________________


ये भी पढ़ें:

Complete Hindi Vyakaran व्याकरण :

Bhasha भाषा,    Varn वर्ण and Varnmala वर्णमाला,   Shabd शब्द,   Vakya वाक्य ,   Sangya संज्ञा

Sarvnam सर्वनाम,   Ling लिंग,   Vachan वचन ,   alankar अलंकार,   visheshan विशेषण ,

pratyay प्रत्यय ,  Kriya क्रिया ,    Sandhi संधि,  karak कारक,    kal काल kaal

__________________________________________

February 01, 2020

महाशिवरात्रि महादेव का महापर्व

महाशिवरात्रि महादेव का महापर्व

कब है महा शिवरात्रि ?


महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को होता है और इस वर्ष महाशिवरात्रि का महा पर्व 21 फरबरी 2020 को पड़ रहा है । इसी दिन प्रभु शिव के भक्त व्रत रखेंगे ।

महादेव का महापर्व महाशिवरात्रि ( Mahashivratri )


महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव के पूजन का सबसे बड़ा पर्व भी है। महाशिवरात्रि पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, शिव को महादेव इसलिए कहा गया है कि वे देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग, किन्नर, गंधर्व पशु-पक्षी व समस्त वनस्पति सभी के देव हैं ।

shivratri


हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि कहते है यानि कि हर महीने का चौदहवाँ दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है जो फरवरी-मार्च माह में फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आती है।

यह शिवरात्रि सबसे बड़ी शिवरात्रि होती है। इसी वजह से इसे महाशिवरात्रि कहा गया है यह साल की आने वाली 12 शिवरात्रियों में से सबसे खास होती है। इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार व्यवस्थित होता है कि मनुष्य भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से संचार होता है।  इस दिन भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है |

महाशिवरात्रि के दिन शिवभक्त बड़े धूमधाम से शिव की पूजा करते हैं । भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर जल,फल, बेल-पत्र आदि चढ़ाकर पूजन करते हैं। साथ ही लोग उपवास करते हैं।

शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास तथा रात्रि जागरण करना बहुत ही शुभ फल दायक माना जाता है ।

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?


हिंदू पुराणों में इस महाशिवरात्रि से जुड़ी एक नहीं बल्कि कई वजहें बताई गई हैं:

शिव को आदि गुरु माना जाता है, पहले गुरु जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वही दिन महाशिवरात्रि का था।

भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार महा शिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि में भगवान शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। पहली बार शिव लिंग की पूजा भगवान विष्णु और ब्रह्माजी द्वारा की गयी थी। इसीलिए महा शिवरात्रि को भगवान शिव के जन्मदिन के रूप में जाना जाता है । इस घटना के चलते महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की विशेष पूजा की जाती है। शिवरात्रि व्रत प्राचीन काल से प्रचलित है। हिन्दु पुराणों में हमें शिवरात्रि व्रत का उल्लेख मिलता हैं।

दूसरी प्रचलित कथा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसी कथा के चलते माना जाता है कि कुवांरी कन्याओं द्वारा महाशिवरात्रि का व्रत रखने से शादी का संयोग जल्दी बनता है।

तीसरी प्रचलित कथा के मुताबिक इसी दिन समुद्र मंथन के बाद सागर से कालकूट नाम का विष निकला भगवान शिव द्वारा विष पीकर पूरे संसार को इससे बचाया इस घटना के उपलक्ष में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस विष को सिर्फ भगवान शिव ही नष्ट कर सकते थे। भगवान शिव ने विष को अपने कंठ में रख लिया जिससे उनका गला नीला हो गया और भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ा।

चौथी कथा के अनुसार प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव ने  तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर दिया इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया।

कैसे करें महाशिवरात्रि में पूजा:


शिवजी की आरती


महाशिवरात्रि के दिन मंदिरों में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है व्रत रखते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं और भगवान शिव की विधिवत पूजा करते हैं।

शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने व पूजन-आरती से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है, इस दिन व्रत रखकर बेलपत्र से शिव की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए ।

शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर मंत्र का जाप करते है । शिवलिंग पर धतूरा और बिल्व पत्र के साथ ही शमी के पत्ते भी चढ़ाना चाहिए ।

बर्तन में पानी भरकर ऊपर से बेलपत्र धतूरे के पुष्प आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें जाते हैं। कई जगह इस दिन शिवपुराण का पाठ किया जाता है ।

शिवरात्रि पर तांबे के लोटे में गंगाजल भरें, उसमें चावल, सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर ऊँ नम: शिवाय बोलते हुए अर्पित करें ।

माना जाता है कि यह दिन भगवान शंकर का सबसे पवित्र दिन है, इस व्रत को करने से सब पापों का नाश हो जाता है

 

महाशिवरात्रि व्रत में क्या करें भोजन?


इस व्रत में आप फल, आलू, सिंघाड़ा, दही आदि खा सकते हैं इस दिन साबूदाना भी खाया जाता है व्रत के व्यंजनों में सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं और लाल मिर्च की जगह काली मिर्च का प्रयोग करते हैं, सिंघाड़े या कुट्टू के आटे के पकौड़े बना सकते हैं ।

 

हिन्दू धर्मशास्त्रों में शिवरात्रि को सबसे अच्छा व्रत माना जाता है इसी दिन शिव का शक्ति से मिलन हुआ था। और ब्रहमाण्ड की उत्पत्ति का श्रीगणेश हुआ था ।

 

शिवजी की आरती

Important Days in the Month of February

Important Days in the Month of February

Important Dates and Days in the Month of February


February 2: World Wetlands Day


February 4: World Cancer Day


February 6: International Day of Zero Tolerance to Female Genital Mutilation


February 5: Safer Internet Day (second day of the second week of February)


February 10: National De-worming Day


February 11: International Day of Women and Girls in Science


February 12: National Productivity Day


February 13: World Radio Day, National Women's Day (Birth Date of Sarojini Naidu)


February 14: Valentine Day


February 20: World Day of Social Justice


February 21: International Mother Language Day


February 24: Central Excise Day


February 27: World NGO Day


February 28: National Science Day


February 28/29: Rare Disease Day


बजट में नए टैक्स स्लैब की घोषणा

बजट में नए टैक्स स्लैब की घोषणा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में नौकरी पेशा लोगों को टैक्स में काफी राहत दी है।

पहले की 2.5 लाख की सीमा को अब 5 लाखकर दिया है ।

5 लाख तक की सलाना आय वालों को किसी तरह का टैक्स नहीं देना होगा।



नए टैक्स स्लैब


5 लाख से 7.56 लाख की आय वालों को 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा।

7.5 लाख से 10 लाख तक की आय पर 15 प्रतिशत

10 लाख से 12.5 लाख की आय के लिए 25 प्रतिशत

और 15 लाख से ज्यादा आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा।

New Income Tax Slabs


New income tax slab for FY 2020-21:

5-7.5 lakh: 10%,

7.5 lakh to 10 lakh: 15%,

10 lakh-12.5 lakh: 20%,

12.5 lakh-15 lakh: 25%.

For those earning above 15 lakh, 30%.