March 30, 2020

कोरोना को लेकर मनोचिकित्सकों की सलाह

कोरोना को लेकर मनोचिकित्सकों की सलाह

कोरोना को लेकर मनोचिकित्सकों की सलाह


Recommedations from Psychologists about corona


 

कोरोना वायरस (covid-19) से संबंधित खबरों और विभिन्न बचाव सलाह और सुझाव आए दिन शोशल मीडिया पर आ रहे हैं लेकिन कुछ व्यक्ति इसको  लेकर डिप्रेशन अर्थात अवसाद का शिकार हो सकते हैं

ऐसे में मनोचिकित्सकों की सलाह है कि वे खुद को कोरोना की खबरों से दूर रखें  आपकी नकारात्मक सोच  डिप्रेशन को बढ़ाएगी और वायरस से लड़ने की क्षमता कम करेगी दूसरी ओर सकारात्मक सोच आपको शरीर और मानसिक रूप से मजबूत बनाकर किसी भी स्थिती या बीमारी से लड़ने में सक्षम बनाएगी ।

अवसाद ग्रस्त लोगों के लिए हाल ही में मनोचिकित्सकों ने कुछ सलाह दी हैं जो निम्न लिखित हैं

मनोचिकित्सकों की सलाह:



  1. कोरोना वायरस के बारे में या कोरोना से जुड़ी ज्यादा खबरें ना देखे और ना सुने , खबरों से खुद को अलग करें। आपको जितनी जानकारी की आवश्यकता थी वो आप अबतक जान चुके हैं सिर्फ उसी का ध्यान रखें।

  2. इन्टरनेट, शोशल मीडिया या समाचार कहीं से भी अधिक जानकारी एकत्र करने का प्रयास न करें क्योंकि ये आपकी मानसिक स्तिथि को और ज्यादा कमजोर करेगा

  3. आपका सकारात्मक मूड आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बचाने में मदद करता है जबकि नकारात्मक विचारों से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है।

  4. जितना संभव हो संगीत, भजन आदि में ध्यान लगाएं , घर में बच्चों के साथ गेम खेलें । बच्चों से कहानियां कविताएँ आदि सुन सकते हैं उनके विडियो बनाएं मजे करें । बच्चों को आप भी कहानियाँ सुना सकते हैं ।


टेंशन के बजाय हंसी ख़ुशी में दिन बिताएं और रात को नींद अवश्य पूरी करें ।

कोरोना से लड़ाई के लिए आपको सिर्फ अपने हाथों को नियमित अंतराल पर अच्छे से धोना है और साफ़ सफाई रखनी है । बाहरी लोगों से जितना हो सके दूरी बनानी है और घर में परिवार के साथ मजे करने हैं ।

कोरोना वायरस कोविड 19 (COVID-19) क्या है

कोरोना वायरस – लक्षण और बचाव के उपाय

March 29, 2020

बढ़ाना पड़ेगा कोरोना लॉक डाउन

बढ़ाना पड़ेगा कोरोना लॉक डाउन
भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते कदम को रोकने के लिए देश ने कई बडे कदम उठाए

जनता कर्फ्यू :


कोरोना के एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलने के और इसके किसी भी प्रकार के इलाज या दवा न होने के कारण प्रधानमंत्री जी के द्वारा 22 मार्च को राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू का एलान किया गया । जिसे जनता कर्फ्यू का नाम दिया गया ।

कोरोना वायरस लक्षण और बचाव के उपाय

21 दिन लॉक डाउन :


22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद भारत के विभिन्न राज्यों द्वारा लॉक डाउन की घोषणा अलग अलग समय के लिए की गई ।

एक बार फिर से प्रधानमंत्री द्वारा सम्पूर्ण देश मे 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा की गई ।

कोरोना वायरस कोविड 19 (COVID-19) क्या है

क्या लॉक डाउन बढ़ेगा


अभी लॉक डाउन को 5 दिन ही हुए कि विभिन्न जगहों से इसके और बढ़ने की खबरें हैं । जी न्यूज पर प्रसारित एक खबर में दिखाई खबर के अनुसार 21 दिन के लॉक डाउन के बाद कोरोना एक बार फिर से रफ्तार पकड़ लेगा ।

रिपोर्ट में वताया गया है कि कम से कम 49 दिन का एक साथ लॉक डाउन ही कारगर साबित होगा

हालाँकि साथ ही साथ बार बार कई चैनलों पर  ये भी बताया जा रहा है कि भारत की जलवायु गर्म होने के कारण और अप्रैल में 15 अप्रैल के बाद तापमान लगभग 40 डिग्री तक जाएगा तो कोरोना खत्म होने के आसार हैं।

कोरोना वायरस पर पूरी जानकारी अपडेट

आज दिनांक 29 मार्च 2020 तक भारत मे कोरोना से मौत का आँकड़ा अब 25 पर पहुंच गया है ।और प्रभावित लोगों की संख्या भी लगभग 1 हजार हो रही है । बढ़ रही मौत देखते हुए कड़े फैसले लेने का वक्त ऐसे में लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है ।

प्रदेशों से बढ़ते पलायन रोड़ पर निकलते लोगों की वजह से जानकारों का मानना है कि लॉक डाउन इन 5 दिनों में पूर्ण सफल नहीं रह सका है अतः आगे इसको और बढ़ाए जाने की आशंका है ।

भारत के सभी नागरिकों से अपेक्षा है कि वे लॉक डाउन का पालन करें । लक्ष्मण रेखा का पालन आपको और आपके परिवार के साथ देश को भी बचाएगा। आपके सहयोग से लॉक डाउन को भी बढ़ाना नहीं पड़ेगा ।

अतः सभी से अपेक्षा है घर पर ही रहें । #StayHome

 

March 26, 2020

Important Days and Dates in the Month of April

Important Days and Dates in the Month of April

Important Days and Dates in the Month of April


April 1: Utkal Diwas

April 2: World Autism Awareness Day

April 4: International Day for Mine Awareness

April 5: National Maritime Day


April 7: World Health Day


April 10: World Homeopathy Day


April 11: National Safe Motherhood Day; National Pet Day


April 13: Jallianwala Bagh Massacre


April 17: World Haemophilia Day


April 18: World Heritage Day


April 19: World Liver Day


April 21: Secretaries’ Day; Civil Services Day


April 22: Earth Day


April 23: World Book and Copyright Day


April 24: National Panchayati Day


April 25: World Malaria Day


April 26: World Intellectual Property Day


April 27:World Veterinary Day


April 28: World Day for Safety and Health at Work;


April 29: International Dance Day


April 30: Ayushman Bharat Diwas


March 22, 2020

लॉक डाउन में 2 बजे तक खुलेंगे बैंक

लॉक डाउन में 2 बजे तक खुलेंगे बैंक

लॉक डाउन में खुलेंगे बैंक


Banks are open in lock down with limited services.


कोरोना से बैंक काम प्रभावित


कोरोना वायरस की वजह से पूरा देश लॉक डाउन की स्थिति में है ऐसे में बैंकिंग भी एक जरुरी सेवा है क्योंकि  हर व्यक्ति को पैसे की जरूरत होती ही है ।

23 मार्च से सिर्फ जरूरी बैंक सेवा


ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्टाफ को कम करते हुए 23 मार्च से बैंक सिर्फ कैश जमा और निकासी , चेक क्लीयरिंग और नेफ्ट NEFT आरटीजीएस RTGS व सरकारी लेनदेन की सेवाएँ ही प्रदान करेंगे । यह सेवाएं 10 से 2 बजे तक ही रहेंगीं ।

कोरोना वायरस लक्षण और बचाव के उपाय

The Indian Banks’ Association (IBA) on Sunday said bank branches will provide only essential services such as cash deposits and withdrawals, clearing of cheques, remittances and government transactions from March 23, 2020 onwards.

जरूरी हो तो ही जाएँ बैंक नहीं होंगे सभी काम


पासबुक प्रिंटिंग, नया खाता व अन्य गैर जरूरी कार्य स्थिति सुधार के बाद ही संभव होंगें। जरूरी हो तो ही बैंक का रुख करें । जिनका काम हो वे अकेले ही जाएँ साथियों को साथ लेकर न घूमें ।

कोरोना वायरस पर पूरी जानकारी अपडेट

March 16, 2020

The Constitution of India

The Constitution of India

THE CONSTITUTION OF INDIA


RULE AND LAW: THE CONSTITUTION


Rules and Laws are important for functioning of a country. These rules and laws make life easier and functioning of democracy effective and smooth.

                We should follow these rules for our safety and security.  The set of rules and regulations which helps in the smooth functioning of the state is termed as Constitution.

ROLE OF THE CONSTITUTION


A Constitution is a set of rules and laws according to which a state is governed. The Constitution lays down guidelines and principles on the basis of the governance of that country is conducted with a view to maintain law and order.

TYPES OF CONSTITUTION


The Constitution is of two types –



  • Written Constitution

  • Unwritten Constitution


Our country has a written Constitution which came into force on 26th January, 1950.

    The Constitution is very important or a state due to the following reasons:

  • Constitution helps us to understand the political system of a country.

  • It delimits the scope and activities of various organs of the government.

  • The Constitution ensures that the citizens of a country enjoy their Fundamental Rights


WHAT ARE LAWS? WHY DO WE NEED LAWS?


The word ‘Law’ is derived from the Teutonic word Lag, which stands for ‘Something fixed’. We can define the Laws as a set of rules and regulations according to which a country is governed and are widely recognized by society.

Laws have their own importance in the society. We need laws-

  • As they regulate the civic life of the society.

  • Or good governance.

  • To maintain law and order.

  • To curb the social evils prevailing in the society.


Several laws have been passed and implemented to safeguard the people. Example:-

  • Dowry Prohibition Act of 1961

  • Sati Prevention Act of 1987


CONSTITUENT ASSEMBLY


The Constituent Assembly was given the momentous task o framing the Constitution of India. It had its first sitting on 9th December 1946. During the first sitting of Constituent Assembly, Pt. Jawaharlal Nehru moved the historic objective resolution which started, “The Constituent Assembly declares its firm and solemn resolve to proclaim India as an Independent, Sovereign Republic and to draw up as a Constitution for her future governance.” Dr. Rajendra Prasad, who later became the First President of India, was also the President of the Constituent Assembly.

THE PREAMBLE


A preamble is not a part of Constitution, but it is the foundation on which a Constitution stands. The preamble is a guideline of the Indian Constitution. It declares India to be a Sovereign, Secular and Democratic Republic and sets out the basic ideals of the Indian Republic. Our Constitutional experts took inspiration from the American Constitution for the framing of the preamble.

KEY FEATURE OF INDIAN CONSTITUTION


Listed below are some of the key features of the Indian Constitution-

  • Written Constitution

  • Rigid as well as Flexible

  • Federalism

  • Parliamentary Form of Government

  • Division of Power

  • Fundamental rights

  • Secularism


 FUNDAMENTAL RIGHTS: SOUL OF THE CONSTITUTION


Rights are those favorable conditions of life which are recognized by the society and are implemented by the state.

Those rights which are considered essential for all round development and well being of a citizen of a country are termed as Fundamental Rights. The Fundamental Rights are included in Part III of the Constitution. No organ of the Government and an authority can violate our Fundamental Rights. Judiciary has the supreme power to protect our Fundamental Rights. If someone feels that any of his rights is violated, he/she can approach the court to get it implemented.

        Following are the fundamental rights enjoyed under the Indian Constitution:-


They have right to:-



  •  Equality

  •  Freedom

  •  Freedom of Religion

  • Cultural and Educational Rights


FUNDAMENTAL DUTIES


Rights and Duties are Reciprocal. Every right carries a duty with it. In return for Fundamental Rights, the society expects the citizens to perform certain obligation, which are collectively known as duties.

        Some important fundamental duties assigned to the citizens are:-



  1.  Respect the National Flag and the National Anthem.

  2.  Preserve the rich cultural heritage of the country.

  3.  Abide by the Constitution and respect its ideals and institutions.

  4.  Defend the country and promote the spirit of brotherhood.

  5.  Maintain and preserve public property.

  6.  Develop scientific temper.

  7.  Protect and conserve our natural environment.


UPLIFTING THE MARGINALIZED COMMUNITIES RELEASE THEIR RIGHTS


Marginalized communities mainly consist of the economically weaker and socially backward section of the society . However, after independence the Indian government adopted the goal of social justice and took strong measures to improve their condition.

 

March 15, 2020

भारत मे कोरोना वायरस

भारत मे कोरोना वायरस

भारत मे कोरोना वायरस


भारत में अब तक कोरोना वायरस के लगभग 93 मामलों में पुष्टि हुई है जिनमें से 10 के ठीक होने और 2 की मौत की खबर है कोरोना वायरस से पीड़ित 10 लोग पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और उन्हें छुट्टी दे दी गई है।

भारत में यह संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है। सभी सरकारी एजेंसिया सतर्क हैं ईरान और इटली में फंसे हुए भारतीयों को सरकार द्वारा रेस्क्यू कर 14 दिन के लिए स्पेशल स्वास्थ्य केम्प में चेकिंग के लिए रखा गया है।

अधिसूचित आपदा


गृह मंत्रालय ने जानकारी दी है कि सरकार ने कोरोना वायरस को आपदा बताया है। सरकार ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से कोरोना वायरस को एक अधिसूचित आपदा के रूप में माना है।

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को एक अहम बैठक में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 15 अप्रैल तक सभी वीज़ा पर पाबंदी लगानने का फ़ैसला किया है।

कोरोना के अन्य मामलो में ट्रेस हुए लोगों के संपर्कों में आए व्यक्तियों की पहचान की जा रही  है और उन्हें भी निगरानी में रखा जा रहा है।

भारत में कोरोना की स्थिति


भारत में भी कोरोना से संक्रमण के 93 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। कोरोना ने अब तक 12 राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है। सबसे ज्यादा कोरोना वायरस के मामले केरल में आए हैं। इसके बाद में महाराष्ट्र में कोरोना की पुष्टि हुई है।

यूपी में भी 10 कोरोना के मामले आए हैं। दिल्ली में 6 लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण मिले हैं। आगरा में इटली से लौटे जूता कारोबारी सहित 6 में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई।

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स्कूल कॉलेज मॉल बंद


कोरोना वायरस की के डर की वजह से महाराष्ट्र में 31 मार्च तक सभी स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान 31 मार्च तक बंद किए गए। आईआईईटी बॉम्बे ने सभी कक्षाएं और लैब से जुड़ी गतिविधियां 29 मार्च तक बंद कर दी हैं।

उत्तर प्रदेश में 22 मार्च तक सभी स्कूल कोलेजो को बंद किया गया है जिन संस्थानों में परिक्षाए चल रही हैं वे चलती रहेंगी, गोवा राज्य में भी 31 मार्च तक सभी स्कूल, कॉलेज, केसिनो, बोट क्रूज़ और डिस्को क्लब बंद हो गए मगर परीक्षाएं शेड्यूल के अनुसार आयोजित की जाएंगी।


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कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रेटर नोएडा जिले के सभी स्विमिंग पूल को 15 अप्रैल तक बंद करने का निर्देश है। हिमाचल प्रदेश राज्य के सभी सरकारी निजी कॉलेज और स्कूल 31 मार्च तक बंद रहेंगे। कर्नाटक के बेंगलुरू में सभी मॉल बंद कर दिए गए हैं। राज्य में अगले सप्ताह तक सभी मॉल, थिएटर, नाइट क्लब, पब और स्विमिंग पूल बंद रहेंगे।

इंफोसिस ने एहतियात के तौर पर बेंगलुरु में अपनी एक सैटेलाइट बिल्डिंग खाली करने का फैसला लिया है ।

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कोरोना वायरस - लक्षण और बचाव के उपाय

कोरोना वायरस - लक्षण और बचाव के उपाय
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में कोरोना वायरस (Corona virus disease - COVID-19) के संक्रमण के लगभग 140,000 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस (Corona virus disease - COVID-19) कई देशों में पहुंच चुका है। इसके संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या 6000 को पार कर गई है। डब्लूएचओ (WHO) ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। दुनिया भर की सरकारें कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक करने पर ध्यान दे रही हैं। जानकारों का कहना है इसके संक्रमण को फैलने से रोककर ही इसे काबू में किया जा सकता है। इसके लिए इसके लक्षण और रोकथाम के बारे में जानना जरुरी है।

भारत में भी कोरोना के केस सामने आए

कोरोना वायरस के लक्षण


कोरोना वायरस के संक्रमण से बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इसके लक्षण एकदम फ्लू से मिलते-जुलते हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। अधिक उम्र के लोग जिन्हें पहले से डायबिटीज़, हार्ट या अन्य गंभीर बीमारी है वे तुरंत इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।

संक्रमण के फलस्वरूप सबसे पहले जुकाम फिर बुखार और सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होने लगती हैं यह न्यूमोनिया का कारण भी बन सकता है। इन्सान के अंदर की इम्युनिटी पावर जितनी अधिक होगी वो इससे उतना ही सुरक्षित रहेगा।

नया चीनी कोरोना वायरस, सार्स वायरस की तरह है। इसके लक्षणों को पहचानकर ही कोरोना वायरस की बेहतर तरीके से रोकथाम की जा सकती है।

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कैसे फैलता है कोरोना वायरस ?


चीन के बुहान से कोरोना वायरस जानवरों से मनुष्यों तक पहुंच चुका है और अब मनुष्यों से मनुष्यों के बीच सफर कर रहा है। कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से अन्य लोग भी संक्रमित हो रहे हैं क्योंकि यह रोग किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।

संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर उसके मुंह और नाक से निकले कण द्वारा यह रोग दूसरों में फैलता है कोरोना वायरस के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं। इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं।

संक्रमित व्यक्ति के पास मौजूद लोग जब इन विषाणुयुक्त कण के संपर्क में आते हैं तो यह कण उनके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं क्योंकि अगर आप किसी भी ऐसी वस्तु को छूते हैं जहां ये कण गिरे हैं और उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंच जाते हैं।

इसी तरह एक संक्रमित व्यक्ति यह वायरस सभी संपर्क में आए लोगों तक पहुंचा सकता है अतः संक्रमित व्यक्ति व उसके आसपास सभी को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ से बचाव के उपाय


कोरोना वायरस से बचाव का फिलहाल कोई टीका या दवा तैयार नहीं है। इसलिए इससे बचाव के लिए स्वयं ही कोशिश करनी होगी। इसलिए खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करें, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छुएँ और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें ।

सर्वप्रथम आवश्यक न हो तो जब तक खतरा कम नहीं हो जाता घर से कम निकलें।

कोई व्यक्ति खांस या छींक रहा हो तो उससे कम से कम एक मीटर की दूरी बनाए रखें ।

बाहर जाने या काम पर अपनी आंख, नाक और मुंह को हाथ लगाने से बचें ।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फेस मास्क कोरोना वायरस से प्रभावी सुरक्षा प्रदान नहीं करते और सामान्य क़िस्म का मास्क लगाने से वायरस जैसे अतिसूक्ष्म कणों से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता। लेकिन फिर भी इनका इस्तेमाल करें क्योंकि कणों के सीधे अन्दर जाने की आशंका थोड़ी कम हो जाती है।

ट्रेन, बस, ट्राम या टैक्सी से यात्रा के बाद घर पहुंचते ही सबसे पहले दोनों हाथ अच्छी तरह धोयें।

काम पर और सफ़र में भी हाथों को मौका मिलते ही अल्कोहल आधारित सेनेटाइजर से मलें या साबुन लगाकर अच्छी तरह से धोयें।

स्वयं खांसते या छींकते वक्त भी मुंह को टिश्यू पेपर से ढंक दें और इस्तेमाल किये टिश्यू पेपर को कचरे के डिब्बे में ही डालें।

भारत में कोरोना 


खांसी, बुखार या तबीयत ख़राब होने पर घर पर ही रहें और डॉक्टर या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र को फ़ोन करें घर पर भी इससे बचने के लिए आप नियमित रूप से और अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से समय समय पर धोते रहें ।

कोरोना वायरस पर पूरी जानकारी Click Here


कोरोना वायरस कोविड 19 (COVID-19) क्या है

कोरोना वायरस कोविड 19 (COVID-19) क्या है

कोरोना वायरस कोविड 19 (COVID-19)  क्या है


कोरोना वायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है। यह एक नावेल कोरोनावायरस है। चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस (Corona virus disease - COVID-19) 122 देशों में पहुंच गया है। यह एक नए तरह के वायरस की वजह से होता है जिसे पहले कभी इंसानों में नहीं देखा गया। इससे पहले इस वायरस फैमिली के सदस्य से सामना नहीं हुआ था। दूसरे वायरस की तरह यह वायरस भी जानवरों से आया है। चीन से फैले कोरोना वायरस ने भारत समेत दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा दिया है।

चीन में कोरोना वायरस ने कई लोगों की जान ले ली है। हजारों लोग इसकी चपेट में हैं। कोरोना वायरस की भयावहता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चीन में इमरजेंसी की घोषणा कर दी है।

चीन में जो लोग जानवरों को खाने के लिए इस्तेमाल करते थे वे सर्वप्रथम इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। यह नावेल कोरोनावायरस आमतौर से जानवरों से ही उत्पन्न हुआ है। जानकारों का कहना है इसके संक्रमण को फैलने से रोककर ही इसे काबू में किया जा सकता है ।

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कोविड 19 (COVID-19) - कोरोना वायरस का नाम


नया वायरस ‘कोरोना’ पुराने वायरस परिवार का एक नया सदस्य है। इस नये प्राणघाती वायरस को नया नाम सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) दिया गया है। ‘सार्स’ की फुल फॉर्म सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रम है।

इस वायरस के कारण सांस लेने में भारी कठिनाई और फेफड़ों में सूजन की जो प्राणघातक बीमारी फैल रही है । यह वायरस पहली बार दिसंबर 2019 में देखने में आया है इसलिए इससे होने वाली बीमारी का वैज्ञानिक नाम कोविड-19 (Covid-19/ को=कोरोना, वी=वायरस, डी=डिसीज 19=2019) (Corona virus disease - COVID-19) रखा गया है।

 

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सावधानी ही सुरक्षा लक्षण और उपाय का सावधानी से इस्तेमाल आपके साथ आपके प्रियजनों को भी बचा सकता है

March 13, 2020

वर्ल्ड स्लीप डे World Sleep Day विश्व नींद दिवस

वर्ल्ड स्लीप डे World Sleep Day विश्व नींद दिवस

वर्ल्ड स्लीप डे World Sleep Day विश्व नींद दिवस


यदि आप देर रात तक जागते हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए है पूरा अवश्य पढ़ें

पहली बार सुनने पर बड़ा ही अजीब सा लगता है मगर ये सच है कि दुनियाभर में हर साल  मार्च में मार्च विषुव से पहले वाले शुक्रवार को वर्ल्ड स्लीप डे World Sleep Day यानि कि विश्व नींद दिवस मनाया जाता है ।

चिकित्सकों का मानना है, कि प्रतिदिन 6 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। लेकिन तकनीकी युग में मोबाइल और कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल लोगों के जीवन पर दुष्प्रभाव डाल रहा है।

आजकल युवाओं में शोशल मीडिया की वजह से मोबाइल इस्तेमाल का समय बढ़ा है कई खबरों पर तनाव लेने की वजह से उनमे नींद की समस्या हो रही है। देर रात तक चैटिंग की गलत आदत पड़ चुकी है।

नींद न आना एक समस्या है । अगर आपको अच्छे से नींद नहीं आती। लेटने के काफी देर बार नींद आती है। रात को बार-बार आंख खुलती है, नींद पूरी नहीं होती तो जान लें कि अधूरी नींद कई बीमारियों की जन्म दे सकती है।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में आसानी से नींद नहीं आती  जिसका सीधा असर इंसान की सेहत पर पड़ रहा है। नींद की कमी के कारण लोगों को दिल की बीमारी, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज , वजन बढ़ने, याददाश्त कमजोर होना, सर दर्द जैसी कई समस्या हो सकती है ।

बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच नींद की कमी लोगों को रोगी बना रही है। पर्याप्त नींद की कमी से युवा तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि स्वस्थ जीवन बिताना है तो प्रतिदिन 8 घंटे की नींद जरूरी है। दुनियाभर में कई करोड़ लोग स्लीप एप्निया यानी अच्छी नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं।

वर्ल्ड स्लीप डे मनाने का उद्देश्य


विश्व नींद दिवस हर साल  मार्च में मनाया जाता है। इस दिन को इसलिए मनाते है ताकि लोगों को नींद की महत्ता के बारे में पता चल सके। वर्ल्ड स्लीप डे मनाने का उद्देश्य लोगों को 7-8 घंटे सोने से सेहत को होने वाले फायदों के बारे में जागरूक करना है।

नींद जीवन मे उतनी ही ज़रूरी है जितना कि खाना , नींद की ज़रूरत और इसके महत्व के बारे में जानकारी होना अति आवश्यक है । नींद के प्रति लोगों को जागरूक करने को ही हर साल  मार्च में मार्च विषुव से पहले शुक्रवार को वर्ल्ड स्लीप डे World Sleep Day यानि कि विश्व नींद दिवस मनाया जाता है ।

लोगों के लिए जरूरी है कि वे नींद के महत्व को समझें और नींद से संबंधित दिक्कतों को लेकर जागरूक रहें। नींद की कमी के कारण वजन बढ़ने के साथ, दिमाग और सेहत पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है ।

एक दिन में कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद ज़रूर लें। नींद पूरी ना होने पर इसका सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है।

नींद पूरी न हो पाने का नुकसान


अगर आप नींद न आने से परेशान हैं तो सावधान हो जाएँ क्योंकि अधूरी नींद आपके सेहत पर बुरा असर डालती है, आप कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।

अधूरी नींद लेने वालों को बदन दर्द, सिरदर्द, थकान आदि की समस्या होने लगती है। अच्छी नींद न आने की वजह से थकान और चिड़चिड़ा पन बढ़ता है  ।

नींद का पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। नींद पूरी न होने के कारण पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा कम हो जाती है।

रात में अच्छी नींद ना आने के कारण लोग सुबह उठने के बाद ताजगी महसूस नहीं कर पाते है और नींद पूरी न होने के कारण दिनभर आलस बना रहता है।

पर्याप्त नींद न लेने की वजह से हृदय संबंधित बीमारियाँ होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। स्ट्रोक आने का खतरा अधिक होता है। सुगर(मधुमेह) जैसे रोग भी पनपने लगते हैं।

अच्छी नींद न लेने की वजह से चिड़चिड़पन आता है। जिन लोगो में नींद की समस्या होती है उनको जल्दी गुस्सा आता है । इससे ब्लड प्रेशर की समस्या बन जाती है। मोटापे की समस्या का मुख्य कारण भी सही से नहीं सो पाना होता है ।

अच्छी नींद के लिए आजमाएँ:


रोज रात को सोने से पहले गर्मियों में नहाने से अच्छी नींद आती है। सर्दियों में अच्छे से हाथ पैर मुहँ धोकर सोना अच्छी नींद दिलाता है।

यदि नींद न आ रही हो तो सोने के समय स्लो म्यूजिक का सहारा ले सकते हैं या फिर सटीक इलाज किताब पढ़े जिससे थोड़ी ही देर में अच्छी नींद आ जाती है।

कई लोगों को मालिश से अच्छी नींद आती है।

अच्छी नींद मतलब बेहतर स्वास्थ्य... लिहाज़ा मन भर के सोएं और स्वस्थ रहें।

March 08, 2020

होली HOLI - होलिका दहन से रंगों का त्यौहार तक

होली HOLI - होलिका दहन से रंगों का त्यौहार तक

होली - रंगों का त्यौहार


होली (Holi) भारत का बहुत ही लोकप्रिय त्यौहार है , होली (Holi) रंगों का त्योहार है, हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होली दहन या होली पूजा और दूसरे दिन रंग खेलना या धुलेंदी के नाम से जाना जाता है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। प्रत्येक वर्ष मार्च माह में यह त्यौहार आता है।

होली (Holi) कब मनाई जाती है


होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्यौहार भारत सहित कई अन्य देशों में भी हिन्दू लोग धूम-धाम से मनाते है। पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिन धुलेंडी या धूलिवंदन  के नाम से जाना जाता है। लोगों का विश्वास है कि होली (Holi) के चटक रंग ऊर्जा, जीवंतता और आनंद के सूचक हैं।

होलिका दहन की कहानी  Holika Dahan Ki Kahani


भक्त प्रह्लाद से जुड़ी एक कहानी के अनुसार तभी से होली (Holi) का त्यौहार आरम्भ हुआ था। बालक प्रह्लाद ईश्वर का परम भक्त था । भक्त प्रह्लाद के पिता राजा हिरण्यकश्यप ईश्वर को नहीं मानते थे। राजा हिरण्यकश्यप चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें । वह बहुत घमंडी और क्रूर राजा थे।

भक्त प्रह्लाद हर समय ईश्वर का नाम जपता रहता था। राजा हिरण्यकश्यप को यह बात कतई पसंद न थी उसने अपने पुत्र को समझाने के सारे प्रयास किए, परन्तु प्रह्लाद में कोई परिवर्तन नहीं आया। जब वह प्रह्लाद को बदल नहीं पाए तो उसने अपने पुत्र को सबक सिखाने की ठान ली।

उसने उसे इश्वर के खिलाफ ले जाने के कई प्रयास किए और हारने के बाद आखिर उन्होंने उसे मारने की सोची। इसी क्रम में राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली। होलिका के पास एक एसी चुनरी थी जिसे धारण करने के बाद वह अग्नि में जल नहीं सकती थी । होलिका ने प्रह्लाद को जलाने के लिए उसे अपनी गोद में बिठाया और आग में प्रवेश कर गई।  प्रह्लाद “हरि ॐ” का जाप कर ईश्वर का ध्यान करते रहे और ईश्वर की कृपा से होलिका की चुनरी  प्रह्लाद के ऊपर आ गई और प्रह्लाद के स्थान पर वह स्वयं जल गई। प्रह्लाद सुरक्षित बाहर आ गया।

होली (Holi) कैसे मनाते हैं


होली की पूर्व संध्या पर यानि कि होली पूजा वाले दिन शाम को बड़ी मात्रा में होलिका दहन किया जाता है और लोग अग्नि की पूजा करते हैं। होली की परिक्रमा शुभ मानी जाती है।

किसी सार्वजनिक स्थल या घर के आहाते में उपले व लकड़ी से होली (Holi) तैयार की जाती है। होली (Holi) से काफ़ी दिन पहले से ही इसकी तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। अग्नि के लिए एकत्र सामग्री में लकड़ियाँ और उपले प्रमुख रूप से होते हैं।

गाय के गोबर से बने ऐसे उपले जिनके बीच में छेद होता है जिनको गुलरी, भरभोलिए या झाल आदि कई नामों से अलग अलग क्षेत्र में जाना जाता है । इस छेद में मूँज की रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है।

लकड़ियों व उपलों से बनी इस होली का सुबह से ही विधिवत पूजन आरंभ हो जाता है। होली (Holi) के दिन घरों में खीर, पूरी और पकवान बनाए जाते हैं। घरों में बने पकवानों से भोग लगाया जाता है। दिन ढलने पर मुहूर्त के अनुसार होली (Holi) का दहन किया जाता है। इसी में से आग ले जाकर घरों के आंगन में रखी निजी पारिवारिक होली में आग लगाई जाती है। इस आग में गेहूँ, जौ की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है।

दूसरे दिन सुबह से ही लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि लगाते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। सुबह होते ही लोग रंगों से खेलते अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने निकल पड़ते हैं। गुलाल और रंगों से ही सबका स्वागत किया जाता है। इस दिन जगह-जगह टोलियाँ रंग-बिरंगे कपड़े पहने नाचती-गाती दिखाई पड़ती हैं। बच्चे पिचकारियों से रंग छोड़कर अपना मनोरंजन करते हैं। प्रीति भोज तथा गाने-बजाने के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

होली (Holi) के अवसर पर सबसे अधिक खुश बच्चे होते हैं वह रंग-बिरंगी पिचकारी को अपने सीने से लगाए, सब पर रंग डालते भागते दौड़ते मजे लेते हैं । पूरे मोहल्ले में भागते फिरते इनकी आवाज सुन सकते हैं “होली है..” ।

एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।

गुझिया होली (Holi) का प्रमुख पकवान है जो कि खोया, मेवाओं और मैदा से बनती है। बेसन और गुड के लड्डू के साथ साथ नमकीन में चिप्स पापड़ और रंग बिरंगी मिर्चोनी परोसी जाती हैं। बेसन के सेव और दहीबड़े भी बनाए व खिलाए जाते हैं। ठंडाई इस पर्व का विशेष पेय है।

होली (Holi) की बुराइयाँ


प्राचीन काल में लोग चन्दन और गुलाल से ही होली खेलते थे। आज गुलाल, प्राकृतिक रंगों के के साथ साथ रासायनिक रंगों का प्रचलन बढ़ गया है l ये रंग स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हैं जो त्वचा के साथ साथ आँखों पर भी बुरा आसर करते हैं l

भांग - ठंडाई की जगह नशेबाजी और लोक संगीत की जगह फ़िल्मी गानों का प्रचलन आधुनिक समय में अत्यधिक बढ़ गया हैं। जगह जगह शराब के नशे में लोग मित्रों से मिलने के लिए निकलते हैं और दुर्घटनाओ का शिकार हो जाते हैं ।

होली HOLI का महत्व


यह लोकप्रिय पर्व इसलिए भी मनाते हैं कि खेतों में फसल आ चुकी होती है सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं।

होली का सन्देश है कि जीवन रंगों से भरा होना चाहिए! प्रत्येक रंग अलग अलग चीज का बोध कराता है जिसका आनंद हमें एक साथ उठाना चाहिए। लाल रंग क्रोध का, हरा इर्ष्या का, पीला प्रसन्नता का, गुलाबी प्रेम का, नीला रंग विशालता का और श्वेत रंग शान्ति का प्रतीक है। जब रंगों का फव्वारा फूटता है तब हमारे जीवन में आकर्षण आ जाता है।

होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का सूचक है। यह मेल जोल बढ़ाने का दिन माना जाता है। लोग अपनी ईर्ष्या-द्वेष की भावना भुलाकर प्रेमपूर्वक गले मिलते हैं तथा एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि होली (Holi) के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं।

ब्रज (मथुरा वृन्दावन और बरसाने) की होली:


भारत में होली (Holi) का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में भिन्नता के साथ मनाया जाता है। मथुरा और वृंदावन में होली (Holi) की अलग छटा नज़र आती है। यहां होली (Holi) की धूम कई दिन तक छाई रहती है ।  मथुरा  और  वृंदावन में लगभग 15 दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है। ब्रज की होली आज भी सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। मथुरा वृन्दावन व बरसाने की लठमार होली काफ़ी प्रसिद्ध है।

लठमार होली में पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में अलग अलग प्रकार से होली (Holi) के शृंगार व उत्सव मनाने की परंपरा है लठमार होली के साथ साथ लड्डू होली और फूलों की होली दर्शनीय होती है। विभिन्न देशों में बसे हिन्दू तथा हिन्दू धार्मिक संस्थाओं में होली जमकर मनाई जाती है।

THE REVOLT OF 1857 - India's First War of Independence

THE REVOLT OF 1857 - India's First War of Independence

THE REVOLT OF 1857


A powerful and popular revolt broke out in Northern and Central India in 1857.

It began with a mutiny of sepoys (who were the Indian soldiers of the Company’s army). But soon it became widespread and involved the masses. Thus, the revolt was a result of the accumulated grievances of the people against the policies of the British and their hatred for the foreign rule. Some causes of this revolt are listed below:

ECONOMIC CAUSES:-


The most important cause of the discontent was the economic exploitation of the country by the British. The peasants, artisans and craftsmen suffered poor economic conditions under the British. The peasants were burdened by heavy land revenue, last their lands to landlords and moneylenders. The middle and upper classes of India were badly affected due to loss of employment. Zamindars lost their zamindari rights because they could not fulfill the high land revenue demand o the British. Thus, different sections of the Indian society suffered hard under the British rule and became strong enemies of the British.

POLITICAL CAUSES


The British policy of annexation created deep insecurity among the Indian rulers. The policies like Subsidiary Alliance and Doctrine of Lapse made the Indians lose faith in the British. Annexation of Jhansi, Satara and Nagpur under the doctrine created great restlessness and distrust especially among the ruling homilies and their dependents. The annexation of the friendly state of Awadh by Lord Dalhousie in 1856 was also widely represented by the people at Awadh. Similarly, Rani Laxmi Bai wanted her adopted son to succeed the throne, but the British refused. The Indian rulers now turned against the British.

SOCIAL AND RELIGIOUS CAUSES


Many Indians feared that their religion was coming under threat. The Christian missionaries tried to convert the people to Christianity. Some o the social legislation passed by the British like Widow Remarriage act based on sati, made many conservative Indians very uncomfortable. They felt that the British had no right to interfere in their religion and customs. Religious sentiments were also hurt by the British policy of taxing lands belonging to temples and mosques.

MILITARY CAUSES


The Revolt of 1857 was started by the company’s sepoys. They too had a number of grievances. Often the British officers treated the sepoys rudely. The sepoys were paid much less than the British soldiers and were also given inferior food and accommodation. Moreover, there was no scope of promotion and made to serve overseas. No Indian could move higher than a subedar. Naturally, the sepoys were full of anger and frustration.

IMMEDIATE FACTOR


In 1856, the British introduced the Enfield rifle in the army. The soldiers had to bite off the greased cartridge before loading it in the gun. At the same time, a rumor spread that the grease used in the cartridge was made from the fat of cow and the lard of the pig. This hurt the religious sentiments o both Hindu and Muslim soldiers. This time to rebel had come as this was beyond their patience and submission.

THE REVOLT BEGINS


On 24th April, 1857 the Indian sepoys of the Meerut cantonment refused to accept the greased cartridges. On 9th May, eighty five of them were dismissed and sentenced to 10 years imprisonment. The very next day, all the angry Indian soldiers of Meerut cantonment released their comrades, killed the British officers, and declared mass revolt. The first Indian martyr of the revolt of 1857 at Barrackpore, Bengal was Mangal Pandey. Then all soldiers marched to Delhi and declared the powerless Mughal Emperor Bahadur Shah Zafar as the Emperor of India and the official leader off the revolt.

THE REVOLT SPREADS


Large part of North and Central India and Bihar joined the revolt. The important centres of the revolt were Delhi, Kanpur, Lucknow, Bareilly, Jhansi, and Arrah in Bihar. In Delhi, the aged emperor Bahadur Shah Zafar was the symbolic leader but the real command was with a group of soldiers headed by General Bakht Khan at Kanpur. The revolt in Lucknow was led by Begum Hazarat Mahal; the revolt in Jhansi was lead by Rani Laxmi Bai. Kunwar Singh, a zamindar of Jagdishpur near Arrah, was the chief organizer of the revolt in Bihar.

END OF THE REVOLT


The British decided to suppress this powerful revolt with great severity. Delhi was recaptured in September 1857. Bahadur Shah Zafar was sentenced to life imprisonment. He and his wife were sent to prison in Rangoon (Burma). Rani Laxmi Bai was defeated and killed in June 1858. Tantiya Tope escaped to the jungles of Central India and continued to fight the guerilla war until captured and killed.

CAUSES FOR THE FAILURE OF THE REVOLT



  • Limited to central India.

  • Unsympathetic attitude of native rulers.

  • No common plan of action and leadership among the rebels.

  • Rebels were poorly organized on primitive lives.

  • Strong British army equipped with latest weapons of the time.

  • Moreover, the rebel groups did not have a common plan of action or centralized leadership.


 

However, the revolt was the first great struggle of the Indians for freedom from the British domination. The heroic and patriotic struggle of 1857 continued to inspire the Indians in the later years of the freedom struggle.

March 07, 2020

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कब और क्यों मनाया जाता है


International Women’s Day in hindi


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस


अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है। आज नारी न सिर्फ ट्रेन और हवाई जहाज को सफलता पूर्वक चला रही है बल्कि अंतिरक्ष में भी नये कीर्तिमान बना रही है।

International women’s day (IWD) महिलाओ का दिन है । महिलाओ के योगदान के बिना कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता । महिलाएं अपने अदभुत साहस, परिश्रम तथा बुद्धिमत्ता के आधार पर विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहीं हैं।

आपको जान कर आश्चर्य हो कि पहले अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था। उन्हें ये अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में महिला दिवस को अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया।

सबसे पहला महिला दिवस, न्यूयॉर्क शहर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया, और यह आसपास के अन्य देशों में फैल गया। इसे अब कई पूर्वी देशों में भी मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य:


विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा चयनित राजनीतिक और मानव अधिकार विषयवस्तु के साथ महिलाओं के राजनीतिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए इस दिवस को बड़े जोर-शोर से मनाया जाता हैं। कुछ लोग बैंगनी रंग के रिबन पहनकर इस दिन का जश्न मनाते हैं।

विश्व में महिलाओं को सम्मान देने सामाजिक से लेकर राजनितिक जीवन में महिलाओ द्वारा प्राप्त की गयी उपलब्धियों को मनाने और लिंग समानता (gender equality) पर बल देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।  इस दिन उनके द्वारा किये गए कामो की सराहना की जाती है।

किसी भी देश की प्रगति के लिए उस देश की आर्थिक, राजनितिक और सामाजिक क्षेत्रो में महिलाओ की भूमिका जरूरी है अत: इसके लिए जरुरत है लिंग असमानता  खत्म करने की। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन इन असमानताओ को दूर करने के लिए व अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं का सम्मान देने और उनकी उपलब्धियों का उत्सव मनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कैसे मनाया जाता है


देश दुनियाँ और समाज को अहसास दिलाने महिलाये एक साथ एकत्रित होती है, कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं कई देशो में रैलीया निकलती है।

भाषण और सेमिनार आयोजित किये जाते है।  जिन महिलाओं ने उपलब्धियाँ हासिल की उन महिलाओ को विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास History of International Women’s Day


1908 में महिलाओ ने न्यूयॉर्क सिटी में वोटिंग अधिकारों की मांग के लिए मार्च निकाला एक साल बाद अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर यह दिवस सबसे पहले 28 फ़रवरी 1909 को मनाया गया।

इसके बाद यह फरवरी के आखिरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में 17 देशो की 100 से ज्यादा महिलाओ के सुझाव पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की स्थापना हुई और इसे अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया।

उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था,क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिला को वोट देने का अधिकार नहीं था।

1913 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को 8 मार्च कर दिया गया और तब से इसे हर साल इसी दिन मनाया जाता है।

इस दिवस की महत्ता तब और भी बढ़ गयी जब 1917 में फरवरी के आखिरी रविवार को रूस में महिलाओं ने खाना और शांति (ब्रेड एंड पीस) bead and peace के लिए एक आन्दोलन छेड़ दिया जो जो धीरे-धीरे बढ़ता गया यह विरोध इतना संगठित था कि सम्राट निकोस को अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पडा और इसके बाद यहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी मिला तब  से 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा। तभी से International Women’s Day (IWD) या अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत साल 1908 में न्यूयॉर्क से हुई थी, उस समय वहाँ मौजूद महिलाओं ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर अपनी जॉब में समय को कम करने की मांग को लेकर मार्च निकाला था। इसी के साथ उन महिलाओं ने अपने वेतन बढ़ाने और वोट डालने के अधिकार की भी मांग की थी। इसके एक वर्ष पश्चात अमेरिका में इस दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया गया।

इसके बाद साल 1910 में क्लारा जेटकिन ने कामकाजी महिलाओं के एक अंतराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान इस दिन को अंतराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का सुझाव दिया। इस सम्मेलन में 17 देशो कि करीब 100 कामकाजी महिलाएं उपस्थित थी, इन सभी महिलाओं ने क्लेरा जेटकिन के सुझाव का समर्थन किया।

इस सब के बावजूद इसे आधिकारिक मान्यता कई वर्षों बाद 1975 में मिली जब संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे एक थीम के साथ मनाने का निर्णय लिया गया था।

महिला दिवस का उद्देश्य:


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने के उद्देश्य समय के साथ और महिलाओं की समाज में स्थिति बदलने के साथ परिवर्तित होते आ रहे है। शुरुआत में जब 19 सवी शताब्दी में इसकी शुरुआत की गई थी, तब महिलाओं ने मतदान का अधिकार प्राप्त किया था, परंतु अब समय परिवर्तन के साथ इसके उद्देश्य कुछ इस प्रकार है:

महिला दिवस मनाने का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य महिला और पुरुषो में समानता बनाए रखना है। आज भी दुनिया में कई हिस्से ऐसे है, जहां महिलाओं को समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है। रोजगार तरक्की व अन्य कई क्षेत्र में महिलाए आज भी पिछड़ी हुई है। महिलाओं को उच्च शिक्षा से दूर रहना पड़ता है ।

कई देशों में अब भी महिलाएं शिक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से पिछड़ी हुई है। इसके अलावा महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले भी अब भी देखे जा सकते है।

राजनीति में भी महिलाओं की संख्या पुरुषो से कम है और महिलाओं का आर्थिक स्तर भी पुरुषों से कम है। महिला दिवस मनाने का एक उद्देश्य महिलाओं को इस दिशा में जागरूक कर उन्हे भविष्य में प्रगति के लिए तैयार करना भी है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 International Women’s Day 2020


पूरे विश्व में एक साथ 8 मार्च 2020 को अपने-अपने तरीके से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 मनाया जायेगा ।

कई देशों में इस दिन अवकाश घोषित किया गया है और कुछ देशों में पूरे दिन का अवकाश ना देकर हाफ डे दिया जाता है। भारत में इस दिन कई संस्थानों द्वारा नारी को सम्मान देकर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम किए जाते है।

इंटरनेशनल वूमेन डे प्रति वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता हैं। लेकिन आज भी महिलाओ की हालत दयनीय हैं । समाज के नियमो ने समाज में कन्या के स्थान को कमजोर किया हैं जिन्हें अब बदलने की जरुरत हैं । और इसके लिए उन्हें शिक्षा का अधिकार मिलना जरुरी हैं जिससे उनकी स्थिति में सुधार आएगा।

 भारत में नारी शक्ति :


आज नारी अपने साहस के बल पर पूरे आत्मविश्वास के साथ हर क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहरा रही है। महिलाएं सशक्तिकरण की राह पर हैं और हर क्षेत्र में अपनी मजबूत दावेदारी दिखा रही हैं।

भारत जैसे शक्तिशाली देश की कमान राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह पाटिल, प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी, राज्यपाल सरोजिनी नायडू, लोकसभा अध्यक्षा मीरा कुमार,  एवं अनेक राज्यों की महिला मुख्यमंत्री सफलता पूर्वक संभाल चुकी हैं।

साहित्य जगत में भी महिलाओं का अभूतपूर्व योगदान रहा है। हिंदी साहित्य में महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी अनेक महिलाओं ने उत्कृष्ट योगदान दिया है।

पी॰ टी॰ उषा भारतीय खेलकूद में सबसे अच्छे खिलाड़ियों में से हैं। उन्हें पद्म श्री व अर्जुन पुरस्कार दिया गया। भारतीय महिला मुक्केबाज मैरी कॉम पांच बार ‍विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की विजेता रह चुकी हैं। वर्ष 2003 में उन्हे अर्जुन पुरस्कार एवं 2006 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

बछेन्द्री पाल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। सायना नेहवाल, सानिया मिर्जा जैसी कई अन्य महिलाएं खेल जगत की गौरवपूर्ण पहचान हैं।

भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला अंतरिक्ष पटल की खास पहचान हैं। प्रथम महिला रेलगाङी ड्राइवर सुरेखा यादव भारत की ही नही बल्कि एशिया की पहली महिला ड्राइवर हैं।

टेसी थॉमस पहली भारतीय महिला हैं जो देश की मिसाइल प्रोजेक्ट को संभाल रही हैं। टेसी थॉमस ने देश की मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया है । डॉ. टेसी थॉमस को कुछ लोग ‘मिसाइल वूमन’ भी कहते हैं।

रानी लक्ष्मीबाई का नाम इतिहास के पन्नो में दर्ज है उन्होंने अंग्रेजो से जमकर लोहा लिया ।

 

March 05, 2020

यस बैंक से निकाल सकेंगे मात्र 50 हजार

यस बैंक से निकाल सकेंगे मात्र 50 हजार

यस बैंक निकासी सीमा


अगर आप यस बैंक के ग्राहक हैं तो आपके लिए एक बुरी खबर है सरकार ने निजी क्षेत्र के बैंक यस बैंक पर 30 दिन की अस्थायी रोक लगाते हुए इस दौरान खाताधारकों के लिए निकासी की सीमा 50 हजार रुपये तय कर दी है।


इस पूरी अवधि में खाताधारक 50 हजार रुपये से अधिक नहीं निकाल सकेंगे। यदि किसी खाताधारक के इस बैंक में एक से अधिक खाते हैं तब भी वह कुल मिलाकर 50 हजार रुपये ही निकाल सकेगा।


RBI की अधिसूचना में कहा गया है कि आज शाम छह बजे से यह रोक शुरू हो गयी है और 03 अप्रैल तक जारी रहेगी।




मतलब अब यस बैंक के ग्राहक 1 महीने तक सिर्फ 50 हजार रुपये ही अपने खाते से निकाल सकेंगे।




भारतीय रिजर्व बैंक ने यस बैंक के निदेशक मंडल को भी भंग कर दिया है। इसके अलावा पूर्व एसबीआई सीएफओ प्रशांत कुमार को यस बैंक का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया है।





आरबीआई ने ये कार्रवाई बैंक की आर्थिक हालत को देखते हुए की है।  यस बैंक बीते कुछ समय से फंड जुटाने के लिए संघर्ष कर रहा है।


इससे पहले गुरुवार को ये खबर आई थी कि सरकार ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI को यस बैंक में हिस्‍सेदारी खरीदने के लिए कहा है ।  यस बैंक में एसबीआई की हिस्‍सेदारी की खबर से बैंक के शेयर में 25 फीसदी से अधिक की तेजी आ गई ।





यस बैंक की आर्थिक हालत ठीक नहीं है।  बैंक पर कर्ज बढ़ता जा रहा है तो वहीं शेयर भी टूट रहा है।


बैंक का नियंत्रण भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में वित्तीय संस्थानों के एक समूह के हाथ में देने की तैयारी की गयी है।
आरबीआई ने कहा कि यस बैंक लगातार एनपीए की समस्या से जूझ रहा है, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा है।


जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास यस बैंक में एक से अधिक अकाउंट है तो सभी अकाउंट को मिलाकर वह कुल 50 हजार रुपये ही निकाल सकता है ।


करीब 6 महीने पहले आरबीआई ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) पर  प्रतिबंध लगाया था । पीएमसी बैंक से अधिकतम 10 हजार रुपये की विड्रॉल लिमिट तय किया था । बाद में इस लिमिट को बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया था ।



March 02, 2020

विश्व वन्यजीव दिवस

विश्व वन्यजीव दिवस

विश्व वन्यजीव दिवस


Vishv vany jeev divas


World Wildlife Day


संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसम्बर, 2013 को 68वें सत्र में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस घोषित किया था।  तीन मार्च को विलुप्तप्राय वन्यजीव व वनस्पति के व्यापार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (CITES) को स्वीकृत किया गया था।


जंगली जीव और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन CITES में विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च घोषित करने का निर्णय लिया गया था ।



मुख्य उद्देश्य


3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में नामित करने का मुख्य उद्देश्य दुनिया के वन्य जीवों और वनस्पतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है ।


जिसकी शुरुआत थाईलैंड द्वारा दुनिया के जंगली जीवों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मनाने के लिए प्रस्तावित किया गया था।।




महासभा ने वन्यजीवों के पारिस्थितिक, आनुवांशिक,वैज्ञानिक, सौंदर्य सहित विभिन्न प्रकार से अध्ययन अध्यापन को बढ़ावा देने को प्रेरित किया ।





विभिन्न जीवों और वनस्पतियों की प्रजातियों के अस्तित्व की रक्षा भी इसका उद्देश्य कहा जा सकता है ।





हर साल होती है अलग थीम



विश्व वन्यजीव दिवस के लिए हर वर्ष एक अलग थीम निर्धारित की जाती है




2020 की थीम "पृथ्वी पर जीवन कायम रखना" है





2019 की थीम थी "पानी के नीचे जीवन"





2018 की थीम थी "बड़ी बिल्लियां - शिकारियों के खतरे में" ।
2017 की थीम थी "युवा आवाज सुनो"
2016 की थीम थी "वन्यजीवों का भविष्य हमारे हाथ में है"।
2015 की थीम थी "वन्यजीव अपराध के बारे में अब गंभीर होने का समय है"।




World wildlife day in hindi