October 31, 2020

आ रहा है त्योहारों से भरा महीना, जानें कब है कौन सा त्यौहार

आ रहा है त्योहारों से भरा महीना, जानें कब है कौन सा त्यौहार

त्यौहार ही त्योहार हैं इस महीने Month of Festivals


भारतीयों को इस महीने का हर वर्ष इन्तजार रहता है, आ रहा है त्योहारों से भरा वही महीना , जी हाँ हर वर्ष जिस माह में दिवाली होती है उसके आसपास इतने अधिक त्यौहार होते हैं कि आम आदमी के साथ साथ अच्छे अच्छे बिजनिस मेन भी इस महीने का इन्तजार करते हैं ।

इस वर्ष दिवाली नवम्बर 2020 में आ रही है तो आने वाले इस महीने में हो जाएगी त्योहारों की बरसात, और हर बिजनिस को जैसे पर लग जाएँगे ।

जानें कब है कौन सा त्यौहार 


Upcoming Festivals


इस महीने करवाचौथ, रमा एकादशी, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा, दिवाली, भाई दूज, छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार पड़ेंगे। आइए जानते हैं नवंबर माह के व्रत एवं त्योहार की तारीखें

दिवाली महीने की शुरुआत में ही सबसे पहले महिलाओं का बहुत ही प्रसिद्द व्रत आता है जिसे सभी करवाचौथ के नाम से जानते हैं।

करवाचौथ Karvachauth - 4 नवम्बर 2020


माह की शुरुआत में करवा चौथ व्रत पड़ेगा जो 4 नवंबर को का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और उनके स्वस्थ्य जीवन के लिए रखती हैं ।

अहोई अष्ठमी Ahoi Ashthami


करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली से आठ दिन पहले महिलाएं अहोई अष्टमी का व्रत (Ahoi Ashthami) रखती हैं । इस बार यह व्रत रविवार 8 नवम्बर को पड रहा है Sunday 8 November.

यह व्रत संतान प्राप्ति और उनकी लंबी आयु के लिए किया जाता है, मान्यता है अहोई अष्टमी (Ahoi Ashthami) का व्रत करने से संतान की प्राप्ति होती है । हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास की कृष्‍ण पक्ष अष्‍टमी को आता है , इस व्रत को तारों को देखकर खोला जाता है ।

रमा एकादशी


रमा एकादशी व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस साल 11 नवम्बर के दिन रमा एकादशी व्रत किया जायेगा। रमा एकादशी पर लक्ष्मी जी के साथ विष्णु भगवान का भी पूजन करने से धन वर्षा और शुभ लाभ की प्राप्ति होती है।

धनतेरस


धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर को मनाया जाएगा। हिंदू पंचाग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक मास की कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं।

नरक चतुर्दशी


यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है।  नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं इस साल यह त्योहार भी 14 नवंबर को ही मनाया जाएगा।

दिवाली


दिवाली हिन्दू धर्म का बड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। प्रकाश और खुशियों का यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन हर साल मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 14 नवंबर शनिवार के दिन मनाया जाएगा। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और गणपति महाराज की पूजा की जाती है। इसी दिन नरक चतुर्दशी भी है।

गोवर्धन पूजा


गोवर्धन पूजा 15 नवंबर को है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन धन यानी गौ माता की पूजा की जाती है।

भाई दूज


भाई दूज नवंबर माह की 16 तारीख को मनाया जाएगा। भाई दूज पर्व, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और स्नेह का प्रतीक है। भाई दूज या भैया दूज पर्व को भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि नामों से मनाया जाता है।

छठ पूजा


छठ पूजा को सूर्य षष्ठी के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्योहार कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। इस साल छठ पर्व 20 नवंबर को मनाया जाएगा।

देव उठनी एकादशी


देव उठनी एकादसी 25 नवंबर को है। देवउठानी का अर्थ है देव का उठना यानि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से उठ जाते हैं जिससे शुभ कार्यों का फिर से आरंभ हो जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा


कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन महादेव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था, इसलिए इसे ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहते हैं।

 

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Today, the revised Pay scales have been worked out as under :

Clerical: Rs. 17,900-1000/3, 1230/3, 1490/4, 1730/7, 3270/1, 1990/1,
47,920.
Substaff: Rs. 14500, 500/4, 615/5, 740/4, 870/3, 1000/3, 28145.

Stagnation increments would be 9 increments after reaching maximum.



10TH BP BASIC

SUBSTAFF
11TH BP BASIC

SUBSTAFF
10TH BP BASIC

CLERK
11TH BP BASIC

CLERK
9560145001176517900
9885150001242018900
10210155001307519900
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12910195751911529060
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19855STAGNATION 234160STAGNATION 2
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22475STAGNATION 639400STAGNATION 6
23130STAGNATION 740710STAGNATION 7

 

October 24, 2020

करवाचौथ KARWA CHAUTH

करवाचौथ KARWA CHAUTH
इस बार करवा चौथ KARWA CHAUTH 4 नवम्बर 2020 दिन बुद्धवार को है ।

दरअसल करवा चौथ (Karva Chauth) का त्‍योहार दीपावली (Diwali) से नौ दिन पहले कार्तिक मास की चतुर्थी को मनाया जाता है ।

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रत रखती हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा शाम को सुनी जाती है।

फिर रात को चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत संपन्न होता है। छलनी में पति का मुंह देखकर उसके हाथ से पानी पीकर व कुछ खाकर व्रत पूरा माना जाता है ।

जिन महिलाओं के पति बाहर होते हैं वे आजकल फोन से बात करके व्रत तोड़ती हैं ।

महिलाएं हफ्तों पहले से व्रत की तैयारियां शुरू कर देती हैं बाजार से शॉपिंग , मेंहदी और पूरा मेकअप कर साज श्रृंगार के साथ बिल्कुल नई दुल्हन नजर आती हैं।

करवाचौथ :


भारतीय सुहागिनों का एक ऐसा व्रत जो पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है , आस्था और भावनाओं की एक बहुत बड़ी मिसाल है करवाचौथ ।

करवाचौथ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।

यह पर्व सुहागिन स्त्रियां मनाती हैं किंतु नए चलन में देखा जा रहा है कि शादी तय होने पर कुछ लड़कियां भी ये व्रत करने लगी हैं तथा नए पीढ़ी के पुरुष वर्ग भी अपनी पत्नियों का साथ देने व्रत करते देखे जाते हैं ।

यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है।

अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

करवाचौथ की प्रचलित कहानी :-


बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे।

एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी। भाई जब घर आए तो देखा करवा बहुत व्याकुल थी। उसने बताया कि उसका आज करवाचौथ का निर्जल व्रत है।

वह चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर ही भोजन कर सकती है। चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।

सबसे छोटे भाई को बहन की हालत देखी नहीं गई और वह दूर वरगद के पेड़ पर दीपक जलाकर छलनी की ओट में रख देता है।
यह दीपक दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चांद निकल आया हो । वह बहन को बताता है कि चांद निकल आया है।

करवा चांद को देखती है, अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है। वह पहला टुकड़ा वह जैसे ही मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरे टुकड़े में बाल निकल आता है। जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार मिलता है।

उसकी भाभी उसे सच्चाई बताती हैं कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवाचौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं।

करवा निश्चय करती है कि पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाएगी। वह पूरे साल पति के शव के पास बैठी रहती है। एक साल बाद फिर चौथ का व्रत आया तो करवा की भाभियां उससे मिलने आईं।

ननद की दशा देखकर वे सभी बहुत दुखी हुईं और उससे कहा कि तुम्हारा सुहाग चौथ माता ने लिया है वही तुम्हें सुहाग देंगी। आज चौथ का व्रत है और सभी के घरों में चौथ माता आएंगी। जब माता आएं तो तुम उनके पांव पकड़ लेना। उनसे क्षमा याचना करना।

जब चौथ माता आईं तो करवा ने उनके पांव पकड़ लिए। अपने सुहाग को जीवित करने की याचना करने लगी। चौथ माता को दया आ गई और उन्होंने अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से निकला अमृत उसके पति के मुंह में डाल दिया।

करवा का पति तुरंत श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार चौथ माता के आशीर्वाद से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है।



 

दीपावली Deepawali (दिवाली Diwali)

गोवर्धन पूजा Goverdhan Pooja

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) Narak Chaturdashi

छठ पूजा Chhath Pooja

धनतेरस Dhanteras

करवाचौथ Karavachauth

नवरात्रि NavRatri

 

 

 

October 02, 2020

London of mein bhi hai india ( Mini Punjab in London ) full video



We finally visited the Southall. Southall is one of the main areas of London. It's known as the mini Punjab of London England. This area town center is full of south Asian shops and hotels. This is a great place in London for desi cultural and traditional clothing and accessories.

It is most diversified Indian area in the UK. I was shocked to see 11 Gurdwaras, 2 Temples, 6 Masjids, 11 Churches.

When Pritam Singh Sangha opened his first corner shop in London in 1954, little did he know that Southall will become a mini Punjab of London.
On my recent visit around Southall only to discover so much more about the Punjabi & Pakistani community living in London. From the best Indian street food to fashion, you find it all at Southall
On my recent Visit to UK Southall. i walked around local streets, Visit Gurdwara Sri Guru Singh Sabha Southall to discover about the Punjabi Culture and trust me guys it make me feel in Actual PUNJAB.
#MiniPunjab #UKPunjabi #UK #Southall # London #PriyankaTimesFiles #UnitedKingdome
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Ye badge phna to sb chhod denge aapke liye seat ( London travel tips )



TFL London transport issue 2 badge i.e. baby on board for pregnant ladies and offer me a seat for disable , sick or less able to stand people so that people can offer seat to needy people by seeing these badges.
In this video you will get full information about it .

September 13, 2020

LONDON TOUR - JANA HAI TO VIDEO JARUR DEKHEN

When is the best time of year to visit in London?


The answer completely depends on your budget, weather preferences, and your ability to take time off work will affect what time of year you should visit, so in this video, I talk you through the differences between the months and seasons in London, and how to figure out when you should visit for the best trip possible.

This video includes tips like when the cheapest time to go is and why it is sometimes worth putting up with the summer crowds.



London isn’t known for warm weather and beautiful, clear skies any time of the year. But don’t let that stop you from visiting–just be sure to bring an umbrella. It rains the most in the fall, so skip that season if you want to keep your feet dry–but remember that English weather is unpredictable, and there’s really plenty of rain year-round.

Temperatures rarely reach extremes no matter what season it is, and though July and August can be muggy during the day, evenings are usually cool even in the summer.

If you want a cheap london trip


it’s best to go in the off-season. October through March is a good time to find flight and hotel deals, though prices will spike around big holidays like Christmas.

Going in the winter also means there won’t be as many other tourists around, and you’ll still be able to take advantage of London’s world-class theatre, classical music, and shopping. But if you don’t mind crowds and higher prices, many tours and popular attractions are only available during the summer months. When to go to London really depends on what you’re most interested in doing while you’re there.

The best time to see the Royal Sites:


Summer is your best bet for a chance to see all things royal in London, as many residences only open to the public while the occupants are away on holiday. The State Rooms at Buckingham Palace are available to tour in late July through September. Kew Palace is closed during the winter months, and Clarence House (home to the Prince of Wales and Duchess of Cornwall) only opens to the public in August — the sole month of the year in which all sites are tourable. when is the best time to visit london Buckingham Palace’s Changing of the Guard happens daily from April through July, and on alternate days for the remainder of the year, if weather allows.

September 06, 2020

Tower of London & Tower Bridge London Video



Tower Of London and tower bridge are iconic landmarks of london. london is famous for its castles and tower of London is one of them. Tower bridge is located near tower of london which is famous tourist attraction . Tower of london is open now for tourists after covid lockdown and you can book ticket online. Tower of london is royal castles. in the past it was used as a prison for prisoners . india's famous Kohinoor diamond is kept here for public display which you can see in tower of london .

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World Famous Royal Botanical Garden ( Kew Garden , London ) Video




kew garden is royal botanical garden of London .It is the most extensive and important botanical gardens in the world, housing the “largest and most diverse botanical and
mycological collections” around the globe.

You can reach kew garden in less than 30 minutes from central London. Kew Gardens includes more than 50,000 different plants in its living collection, and over 7 million preserved specimens. Over 750,000 volumes and illustrations are contained in its library.Kew Garden is UNESCO World Heritage Site. it’s also one of London’s most popular attractions.Garden is smallest royal place in london. world's oldest pot plant is in palm house of kew garden . It has its own police force.


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London Battersea Park Video




Battersea park is one of the biggest park in London. You can enjoy cycling, walking , boat ride, foodstuff, zoo, view of Albert bridge, games like cricket, football, rugby etc . This London park is so big that u can enjoy whole day picnic in this park. Entry to park is free always. In this video I tried to cover everything except zoo. As Albert bridge video I already uploaded in past hence not covered again only a single a second view shown. London has one big zoo so zoo not covered in this video. So enjoy this blog type travel video with me
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Buckingham Palace London Video : आओ रानी के महल के बारे में जाने



Buckingham Palace is royal palace. It has been open to visitors during the summer months this is Her Majesty's residence in central London. There are 775 rooms in Buckingham Palace including the 19 State Rooms and 78 bathrooms. The State Rooms are a suite of lavishly decorated public rooms in Buckingham Palace where the monarch receives, rewards and entertains her subjects and visiting dignitaries. Several of these rooms were used for the Royal Wedding (William and Kate). Grand Staircase is a highlight of the tour. The paintings in the State Rooms also include some wonderful portraits of past and present royals including Queen Victoria, George III and Queen Charlotte, William IV and the current Royal Family. As part of your Buckingham Palace tour, you'll get a free audio guide to the palace. The tour is introduced by His Royal Highness, the Prince of Wales (Prince Charles) .Audio guides are available in multiple languages. Throne Room is a favourite with visitors. It contains the thrones that are used for investitures and ceremonial reception. The gardens at Buckingham Palace cover an impressive 39 acres The gardens are the location for the Queen's annual Garden Parties. Be sure to keep an eye out for the flag on the roof – there is always one flying above the palace. When the Queen is at home, the flag is the Royal Standard; when she's away, the Union Flag is raised instead. Once inside, you can go clock-spotting! With more than 350 clocks and watches throughout the palace, it holds one of the largest collections of working clocks in the world.Each year, the summer opening offers a unique exhibition. The 2020 exhibition, Royal Animals will be organised here .
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August 29, 2020

Sukanya Samraddhi Yojna in hindi

 

क्या है सुकन्या समृद्धि योजना? (SSY) Sukanya Samraddhi Yojna in Hindi

सुकन्‍या समृद्धि भारत सरकार द्वारा लाई गई एक बचत योजना है जिसके अंतर्गत अभिभावक कन्या के नाम से खाता खोल सकते हैं | यह खाता केवल जन्म से लेकर 10 वर्ष की उम्र की लड़की के नाम पर ही खुलवाया जा सकता है । यह खाता किसी भी डाकखाने और निर्धारित सरकारी बैंकों में खोला जा सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा यह बचत योजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम के तहत लांच किया गया है। इस बचत स्कीम में सबसे बेहतर ब्याज दर देने का प्रावधान है ।

10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए उच्च शिक्षा और शादी के लिए बचत करने के लिहाज से केंद्र सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना एक अच्छी निवेश योजना है।

इस योजना में निवेश से आपको इनकम टैक्स बचाने में भी मदद मिलती है क्योंकि इस में जमा की जाने वाली रकम और परिपक्‍व रकम को आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत पूरे कर छूट प्राप्‍त है।




August 28, 2020

मेजर ध्यानचंद - हॉकी का जादूगर

मेजर ध्यानचंद - हॉकी का जादूगर

मेजर ध्यानचंद


All About Major Dhyan chand in hindi


मेजर ध्यान चंद को हॉकी के इतिहास में सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जाता है । ध्यान चंद के जन्मदिन को हर वर्ष भारतीय राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उपलब्धियाँ:


मेजर ध्यान चंद ने 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते हैं। वर्ष 1928, 1932 और 1936 में ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
वर्ष 1955 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।

उन्होंने अपने हॉकी करियर में अंतरराष्ट्रीय मैचों में 400 गोल किए थे। वर्ष 1928 में एम्स्टर्डम ओलंपिक में उन्होंने 5 मैचों में सर्वाधिक 14 गोल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। तब से उन्हें हॉकी विज़ार्ड ( हॉकी का जादूगर ) के रूप में जाना जाने लगा। वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भी उन्होंने सर्वाधिक गोल किए थे।
भारतीय हॉकी में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए ध्यान चंद को सम्मानित करते हुए एक भारतीय डाक टिकट भी जारी की गई। वर्ष 2002 से भारतीय खेल एवं युवा मंत्रालय द्वारा खिलाड़ी के जीवन भर के कार्य को गौरवान्वित करने के लिए “ध्यानचंद पुरस्कार” दिया जाने लगा।

ध्यानचंद के जीवन का सफ़र:


ध्यानचंद का जन्म उत्तरप्रदेश के इलाहबाद में 29 अगस्त 1905 को मौर्य परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम समेश्वर सिंह था जो ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सूबेदार के रूप कार्यरत थे ।  ध्यानचंद के पिता और दो भाई  मूल सिंह एवं रूप सिंह भी ध्यानचंद की तरह हॉकी खिलाड़ी थे।

कक्षा 6 के बाद से ही उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा क्योंकि उनके पिता सेना में थे और स्थानान्तरण के कारण उनका परिवार अक्सर स्थानांतरित होता रहता था। बचपन में ध्यान चंद का खेल के प्रति कोई लगाव नहीं था। हालांकि, वह अपने मित्रों के साथ अन्य खेलों में शामिल होते रहते थे ।

बताया जाता है एक बार वे एक होकी मैच देखने अपने पिता के साथ गए, वहां एक टीम 2 गोल से हार रही थी ध्यानचंद ने अपने पिता को कहाँ कि वो इस हारने वाली टीम के लिए खेलना चाहते हैं तो उनके पिता ने ध्यानचंद को खेलने की इजाज़त दे दी ध्यानचंद ने उस मैच में 4 गोल किये उनके आत्मविश्वास को देख आर्मी ऑफिसर बहुत खुश हुए और उन्हें आर्मी ज्वाइन करने को कहा ।

1921 में 16 साल की उम्र में ध्यानचंद पंजाब रेजिमेंट से एक सिपाही बन गए। आर्मी में आने के बाद ध्यानचंद ने होकी खेलना शुरू किया । सूबेदार मेजर भोले तिवारी आर्मी में ध्यानचंद के मेंटर बने और उन्हें खेल के बारे में ज्ञान दिया.

पंकज गुप्ता ध्यानचंद के पहले कोच कहे जाते थे, उन्होंने ध्यानचंद के खेल को देखकर कह दिया था कि ये एक दिन पूरी दुनिया में चाँद की तरह चमकेगा. ध्यान चंद का असली नाम ध्यान सिंह था। उन्हें ध्यान चन्द नाम उनके कोच पंकज गुप्ता ने दिया था।

वर्ष 1925 में, उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय मैच खेला और उस मैच के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए चुना गया। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू मैच में गोलों की हैट्रिक लगाई थी।

ध्यानचंद के आखिरी दिन अच्छे नहीं रहे । आखिरी दिनों में उन्हें पैसों की भी कमी थी। उन्हें लीवर में कैंसर हो गया था जिसके कारण उन्हें दिल्ली के AIIMS हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया। और 3 दिसम्बर 1979 को मेजर ध्यानचंद का देहांत हो गया

 

वर्ण और वर्णमाला

वर्ण और वर्णमाला

वर्ण और वर्णमाला की परिभाषा-

वर्ण किसे कहते हैं ? varn kise kahte hain

वर्ण की परिभाषा varn ki paribhasha -  

भाषा की सबसे छोटी ध्वनि को वर्ण कहते हैं लिखित ध्वनि संकेतों को देवनागरी लिपि के अनुसार वर्ण कहा जाता हैं वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते हैं, जिसके खंड या टुकड़े नहीं किये जा सकते । जैसे- अ,आ,इ, , , ख्, ग इत्यादि।उदाहरण के लिए : राम  ने आम खाया इस वाक्य के छोटे खंड होंगे राम + ने+ आम + खाया

लेकिन इनसे भी छोटे खंड राम = र+आ+म , ने =  न+ए, आम = आ+म  खाए = ख+आ+ए मूल ध्वनियाँ हैं जिनके आगे खंड नहीं किये जा सकते । इन्हीं अखंड मूल ध्वनियों को वर्ण कहते हैं।

 प्रत्येक भाषा में अनेक वर्ण होते हैं हिन्दी भाषा में 52 वर्ण हैं।

 वर्णमाला किसे कहते हैं ?

वर्णमाला varnmala ki paribhasha - 

किसी भाषा के समस्त वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

प्रत्येक भाषा की अपनी अलग वर्णमाला होती है। 
हिंदी- अ, , , , ग..... 
अंग्रेजी- A, B, C, D,....

लिंग की परिभाषा

लिंग की परिभाषा

 

लिंग की परिभाषा Ling ki Paribhasha

लिंग किसे कहते हैं? Ling kise kahte hain ?

लिंग संस्कृत का एक शब्द है जिसका अर्थ निशान होता है जिस संज्ञा शब्द से व्यक्ति की जाति का पता चलता है उसे लिंग कहते हैं। अर्थात संज्ञा का वह रूप जिससे हमें किसी भी व्यक्ति, जीव, या वस्तु आदि की जाति पता चले, वे शब्द लिंग कहलाते हैं। इन शब्दों से यह पता चलता है कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाती का।

लिंग के उदाहरण

पुरुष जाति में: मोहन, सोहन, मानवपिता, भाई, लड़का, बैल, बकरा, मोर, हाथी, शेर, घोडा, कुत्ता आदि।

स्त्री जाति में:  मीना, महिला, माता, बहन, लड़की, गाय, बकरी, मोरनी, मोहिनी, हथनी, शेरनी, घोड़ी, खिड़की , कुतिया, भैंस, गाय आदि।

लिंग के भेद ling ke prakar

लिंग के मुख्यतः तीन भेद होते हैं :

  1. पुल्लिंग (पुरुष जाति)
  2. स्त्रीलिंग (स्त्री जाति)
  3. नपुंसकलिंग (जड़)

संज्ञा की परिभाषा

 

संज्ञा की परिभाषा (sangya definition in hindi)

संज्ञा किसे कहते हैं – Sangya in Hindi :-

किसी भी व्यक्ति, वस्तु, जाति, भाव या स्थान के नाम को ही संज्ञा कहते हैं। 

 

जैसे:  राम (व्यक्ति), किताब(वस्तु), मानव (जाति), करनाल (स्थान), मिठास(भाव)

संज्ञा के भेद (sangya ke bhed in hindi)

संज्ञा के पांच भेद होते हैं:

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. भाववाचक संज्ञा
  3. जातिवाचक संज्ञा
  4. द्रव्यवाचक संज्ञा
  5. समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा




August 27, 2020

National Sports Day

National Sports Day

National Sports Day - India

National Sports Day is celebrated in various countries to honour the national sports teams and sports traditions of those countries.On this day people from different age groups take part in sports like kabaddi,  basketball, hockey etc.

The National Sports Day is celebrated on 29 August in india on the birth anniversary of hockey legend Major Dhyan Chand, who is regarded as nation's greatest hockey player of all time.

The National Sports Day is observed every year to spread awareness about the importance of sports and games in the life of every individual.

Major Dhyan Chand (29 August 1905 – 3 December 1979) was an Indian hockey player and the greatest hockey player in the history of the sport. 

Bachpan ki yaden 2

 क्या आपके सामने ये सब हुआ है ?


आप सोचकर देखिए वो पुरानी यादें , मन प्रफुल्लित हो उठेगा , एक रोमांच सा जेहन में उतर आएगा । खुद ही सोचेंगे ऐसा भी हुआ था कभी , बच्चों को बताओगे तो उन्हें यकीन न आएगा ।

 कम ही घरों में टीवी हुआ करती थी , टीवी वो भी ब्लैक एंड व्हाइट , दूरदर्शन के प्रसारण को देखने के लिए एंटीना एडजस्ट करना होता था , घर की छत पर एंटीना सही करने वाला एक, दूसरा बाहर खड़ा होकर निर्देश देने वाला और तीसरा टीवी पर चित्र साफ हुए या नहीं देखने वाला , आवाज छत से "आई क्या" , "अरे नहीं थोड़ा और घुमा " , "आई आई अरे पहले वाली साइड में ले थोड़ा , हाँ आ गई ", यहीं फिक्स करके उतर आ ।

सन सतासी दूरदर्शन पर रामायण का प्रसारण पूरे गांव में एक टीवी , बिजली तो कहीं कहीं थी तो टीवी बैटरी से चलती थी , बैटरी के चार्ज होने की फिक्र बैटरी वाले से ज्यादा सारे गाँव वालों को हुआ करती थी ।

याद है मामा जी का वो गाँव जहाँ ट्रैक्टर के बोनट पर रखकर उसकी बैटरी से टीवी पर रामायण का चलना और ट्रैक्टर के सामने पूरे गाँव की भीड़ एक टक निगाह टीवी पर ।
 जिस दिन ट्रैक्टर खेत से आधा घंटे पहले ना पहुंचा तो सबको फिकर कहीं रामायण ना निकल जाए , बुलाने के लिए साइकिल सवार खेतों की दौड़ लगाते जुताई रुकवाकर ट्रैक्टर का वापस आना और सबका खुशी से चिल्लाना "आ गया आ गया "।

यही हालात रामायण के बाद दूरदर्शन पर रिलीज हुए दूसरे धारावाहिक महाभारत के साथ हुए । आज जब आप सोच भी नहीं सकते कि सिर्फ टीवी देखने दूसरे के घर जाना , उस समय लोग बुला लिया करते थे अरे मेरे पास व्यवस्था है आ जाना और साथियों को भी लेते आना , फॉर्मेलिटी तो जैसे थी ही नहीं कहीं , पैसा कम था पर दिल बहुत बड़े ।

समय बदला हालात बदल गए घर घर घर टीवी आ गईं , बिजली का दायरा बढ़ने लगा घरों में टीवी के साथ पंखे भी आ गए ।
 वो दौर भी आया जब चन्द्रकान्ता, और शक्तिमान जैसे धारावाहिकों ने खूब लुभाया। रविवार को सुबह जल्दी तैयार होकर सीधा टीवी के सामने सुबह 7 बजे रंगोली के मधुर गानों।से शुरुआत करके धारावाहिक और कार्टून आदि लगभग 12 बजे तक और उसके बाद साप्ताहिक फ़िल्म शाम के समय , फिर से संडे का इंतजार ।

 बीच बीच में कई जासूसी धारावाहिक जैसे एक दो तीन चार, सुपर सिक्स, व्योमकेश बख्शी, और तहकीकात का क्रेज बस देखने लायक होता था , तब बिजली जाने पर जिनके घरों में बैटरी होती थीं वहाँ की तरफ निकल आते थे बच्चे ।

पुराने लोगों को याद होगा गर्मियों में छत पर सोने के लिए पहले से दो बाल्टी पानी डालकर आना जिससे छत थोड़ा ठंडी हो जाए , और अपनी अपनी जगह निश्चित कर लेना कि कौन कहाँ सोएगा , बच्चे बच्चे एक साइड बड़े बड़े एक साइड , छत से मिली छत , अड़ोसी पड़ोसी से गप शप के बाद सुकून भरी नींद ।

Bachpan ki yaaden 1

 कुछ धुंधला धुंधला सा याद है सब कुछ जो गुजर गया । याद हैं कुछ मीठी मीठी सी बातें और कुछ कड़वे से पल जो भूल जाना ही बेहतर है । यादें तो अच्छी संजोना ही अच्छा लगता है ।

जिए हैं हमने वो लम्हे जो आने वाले भविष्य में लोग शायद ना ही जी पाएँगे , देखें हैं वो माहौल जो उनको नसीब न हो पाएँगे ।
जी हाँ हम अस्सी के दशक में जन्मे और गाँव से जुड़े कस्बो और शहर में रहने वाले वे लोग जिन्होंने हर तरह की जिंदगी को करीब से देखा है । देखी हैं वो खुशिया वो माहौल वो प्यार वो दुलार जो आज के रिश्तों में दिखाई ही नहीं देता ।

वो दिन भी क्या दिन थे साहब पैसा कम था खुशियाँ ज्यादा , गाँव में बिजली तो नहीं थी मगर सुकून बड़ा था , परेशानियां बहुत थीं मगर इंसान आज से ज्यादा सुखी था ।

आज भी याद है वो बचपन जब गर्मी की छुट्टियों का इंतजार सभी बच्चों को होता था , जाना होता था अपने गांव या नानी के घर । और ये इंतजार हमें ही नहीं उनको भी होता था जिनके पास हम जाने वाले होते थे । और छुट्टियां खत्म होते होते फिर से आपस में सभी कजिन के वादे अगली छुट्टियों में फिर से यहीं मिलेंगे । फोन तो थे नहीं तब तो पहले ही मिलने की प्लानिंग हो जातीं थीं और घर वाले कहीं भी जाएं मगर हमें वहीं जाने दें जहां हमें मजा आता है जिद मतलब जिद ।

आज हालात कुछ ऐसे हैं कि 1 घण्टे बिजली ना आए तो तुरंत परेशानी होने लगती है इन्वर्टर है मगर बिजली आने का इंतजार है बच्चों को बिना ऐसी नींद नहीं आती और बच्चे गाँव जाना पसंद ही नहीं करते , उनका तो चलता है बस कार्टून , कैरम, लूडो वो भी लिमिटेड पेरेंट्स खेलने दें तब ना । सभी पैरेंट्स को बच्चा क्लास में पहले नंबर पर चाहिए ।

एक समय था , कक्षा में पास होना होता था मतलब पास बस  , न तो मोटी मोटी किताब कॉपी थीं न इतना भारी बस्ता , माँ बाप की अभिलाषा जरूर होती थी कि हमारा बच्चा पढ़े मगर ऐसी जिद न होती थी कि मार्क्स कितने आएं ।

Bachpan ki yaaden 4

 क्या आपने बचपन में तीन पहिए वाली लकड़ी की गाड़ी पकड़कर चलना सीखा या किसी बच्चे को चलते देखा है ?




तब वॉकर नहीं थे साहब चलना सीखने को बच्चों को वो तीन पहिए की गाड़ी फेमस थी , जो आजकल भी कहीं कहीं बिकती तो है पर लेने वाले नहीं मिलते ।

 जो पालना आप बाजार से खरीदकर बच्चों को झुलाते हो , क्या आपने कभी देखा है गांव में एक छोटी चारपाई जिसे खटोला कहते हैं उसके चार पाए को रस्सी से बांधकर उसी को पालना बनाकर माँ अपने बच्चे को रस्सी से झुलाती हुई ।


वो साइकिल के पहिए से निकले खराब टायर को छोटी सी लकड़ी का टुकड़ा लेकर दौड़ाना , और देखना चल किसकी गाड़ी आगे निकलती है ।

एक खेल था शायद बहुतों ने नाम भी न सुना हो 'हुर का दंड' ये खेल सिर्फ और सिर्फ गाँव में ही खेला जाने वाला खेल था जो विलुप्त से हो गया , क्योंकि इसे खेला जाता था जहाँ पेड़ अधिक हों , एक बच्चा एक लकड़ी ( दंड) को अपनी टाँगों के नीचे से फेंकता था और उस सहित बाकी सभी आसपास के पेड़ों पर चढ़ जाते थे , जिस पर दांव होता था उसे किसी भी एक बच्चे को छूना होता था पर शर्त ये थी कि उसे उस फेंकी हुई लकड़ी की हिफाजत भी करनी होती थी यानी वो किसी एक को छूने गया दूसरे ने पेड़ से उतर कर लकड़ी ले ली तो फिर से दांव उसी पर और लकड़ी तक किसी के पहुँचने में वो छू लिया तो दांव दूसरे पर ।


हालांकि अन्य भी कई खेल धीरे धीरे विलुप्ति की कगार पर हैं जैसे कंचा गोली , गुल्ली डंडा, छान छान चलनी आदि

चोर सिपाही और सामूहिक रस्सी कूद व लँगड़ी टांग भी अब लगभग खत्म से हैं ।


सावन के महीने में किसी भी गाँव मे जाते थे तो शायद ही किसी पेड़ की मजबूत डाली होती थी जिस पर झूला न पड़ा हो । क्या छोटे बच्चे, बच्ची और क्या उस गाँव की बड़ी बेटियां जो सावन में मायके आई हुई होती थीं मिलकर झूले का लुत्फ उठाते थे , साथ साथ गाने भी गाए जाते थे एक गाना तो बड़ा फेमस था ''झूला तो पड़ गए , अमुआ की डाल पे जी" ।

आज के समय में कहीं भी जाओ झूले तो शायद मिल जाएं एक दो जगह पर वो आपसी तालमेल वो हँसी ठिठोली वो मस्ती अब वो बात नहीं ।

August 25, 2020

काल की परिभाषा, भेद और उदाहरण

काल की परिभाषा, भेद और उदाहरण

Tense In Hindi काल की परिभाषा, भेद और उदाहरण


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काल किसे कहते है kaal kise kahte hain


काल (Tense) की परिभाषा Kaal ki Paribhasha


क्रिया के होने या करने के समय को काल कहते हैं। अथवा क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का बोध होता है उसे 'काल' कहते है। अन्य शब्दों में क्रिया के उस रूपान्तर को काल कहते है, जिससे उसके कार्य-व्यापर का समय और उसकी पूर्ण अथवा अपूर्ण अवस्था का बोध हो।

जैसे-
बच्चे पढ़ रहे हैं।
बच्चे पढ़ रहे थे।
बच्चे पढेंगे।

इन वाक्यों की क्रियाओं से कार्य के होने का समय प्रकट हो रहा है।

काल के भेद – Kaal ke Bhed :


काल के तीन भेद होते है-
(1) वर्तमान काल (present Tense) - जो समय चल रहा है।
(2) भूतकाल (Past Tense) - जो समय बीत चुका है।
(3) भविष्यत काल (Future Tense) - जो समय आने वाला है।


  1. वर्तमान काल :–




क्रिया के जिस रुप से यह पता चले कि काम अभी हो रहा है। जिन वाक्यों के अंत में ता , ती , ते , है , हैं आते हैं वो वर्तमान काल कहलाता है। क्रियाओं के होने की निरन्तरता को वर्तमान काल कहते हैं।

वर्तमान काल के भेद :-


(1) सामान्य वर्तमान काल
(2) अपूर्ण वर्तमान काल
(3) पूर्ण वर्तमान काल
(4) संदिग्ध वर्तमान काल
(5) तात्कालिक वर्तमान काल
(6) संभाव्य वर्तमान काल

(1) सामान्य वर्तमान काल :- 


जिस क्रिया से क्रिया के सामान्य रूप का वर्तमान में होने का पता चलता है उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में ता है , ती है , ते है , ता हूँ , ती हूँ आदि आते हैं उसे सामान्य वर्तमान काल कहते है। जैसे :- सीता पढती है।,  वह आता है।

(2) अपूर्ण वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से कार्य के लगातार होने का पता चलता है उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते है। जिन वाक्यों के अंत में रहा है , रहे है , रही है , रहा हूँ आदि आते है उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते हैं। जैसे :- वह घर जा रहा है।, राम लिख रहा है।

(3) पूर्ण वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से कार्य के अभी पूरे होने का पता चलता है। उसे पूर्ण वर्तमान काल कहते है। जैसे :- मैंने फल खाए हैं।
वह आया है।

(4) संदिग्ध वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से वर्तमान काल क्रिया के होने या करने पर शक हो उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते है। इन वाक्यों के अंत में ता होगा , ती होगी , ते होंगे आदि आते हैं । जैसे :- वह गाता होगा।, गाड़ी आती होगी ।, बच्चा रोता होगा।

(5) तात्कालिक वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता हो कि कार्य वर्तमान में हो रहा है उसे तात्कालिक वर्तमान काल कहते हैं।

जैसे :- मैं पढ़ रहा हूँ।
वह जा रहा है।

(6) संभाव्य वर्तमान काल :-


संभाव्य का अर्थ होता है संभावित या जिसके होने की संभावना हो। इससे वर्तमान काल में काम के पूरे होने की संभावना होती है उसे संभाव्य वर्तमान काल कहते हैं।

जैसे :- वह चलता हो।
उसने खाया हो।


  1. भूतकाल :–




क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि काम बीते हुए समय में पूरा हो गया है। भूतकाल का अर्थ होता है बीता हुआ। क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का पता चले उसे भूतकाल कहते हैं। इसकी पहचान वाक्यों के अंत में था , थे , थी आदि से होती है।

इसके छ: भेद है।

i. सामान्य भूत काल :–


क्रिया के जिस रूप से यह मालूम हो कि काम बीते हुए समय में सामान्यतः पूरा हो गया। जिस क्रिया के भूतकाल में क्रिया के सामान्य रूप से बीते समय में पूरा होने का संकेत मिले उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में आ , ई , ए , था , थी , थे आते हैं वे सामान्य भूतकाल होता है।

जैसे– वह गया,  पानी गिरा,  वह स्कूल गया।

ii.आसन्न भूत काल:–


क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि काम अभी-2 पूरा हुआ है। अथार्त क्रिया के जिस रूप से हमें यह पता चले की क्रिया अभी कुछ समय पहले ही पूर्ण हुई है उसे आसन्न भूतकाल कहते हैं।

जैसे – वह अभी गया, मैं अभी सोकर उठा हूँ,  उसने दवा खायी है।

iii. पूर्ण भूत काल:–


क्रिया के जिस रुप से यह ज्ञात हो कि काम बहुत पहले पूरा हो चुका था। अथार्त क्रिया के जिस रूप से यह पता चले की कार्य को समाप्त हुए बहुत समय बीत चूका है उसे पूर्ण भूतकाल कहते हैं।

जैसे – वह गया था, बच्चा आया था, उसने विजय को मारा था।

iv. अपूर्ण भूत :–


क्रिया के जिस रुप से क्रिया का भूतकाल में होना पाया जाए, लेकिन पूर्ण हुआ या नहीं ज्ञात न हो, उसे अपूर्ण भूत कहते है। अथार्त क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में शुरू होने का पता चले लेकिन खत्म होने का पता न चले उसे अपूर्ण भूतकाल कहते हैं।

जैसे – वह जा रहा था, सुनील पढ़ रहा था,  बच्चे खेल रहे थे।

v. संदिग्ध भूत :–


जिस क्रिया के करने या होने में संदेह हो उसे संदिग्ध भूत कहते है। क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में पूरा होने पर संदेह हो कि वह पूरा हुआ था या नहीं उसे संदिग्ध भूतकाल कहते हैं।

जैसे– वह गया होगा, उसने खाया होगा, महिमा चली गई होगी।

vi. हेतु हेतुमद भूत :–


क्रिया के जिस रुप से कार्य के भूतकाल में होने या किए जाने की शर्त पाई जाए, उसे हेतुहेतुमद भूत कहते है। इसमें पहली क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर होती है। पहली क्रिया तो पूरी नहीं होती लेकिन दूसरी भी पूरी नहीं हो पाती।

जैसे – वह मेहनत करता तो सफल हो जाता।
यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।


  1. भविष्य काल :–




क्रिया के जिस रुप से किसी काम का आने वाले समय में किया जाना या होना ज्ञात हो उसे भविष्य काल कहते है। जिन वाक्यों के अंत में गा , गे , गी आदि आते हैं वे भविष्य काल होते हैं।

भविष्य काल के भेद :-

(1) सामान्य भविष्य काल
(2) संभाव्य भविष्य काल
(3) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल

i. सामान्य भविष्य :–


क्रिया के जिस रूप से काम का सामान्य रूप से भविष्य में किया जाना या होना पाया जाए अर्थातजिन शब्दों के अंत में ए गा , ए गी , ए गे आदि आते हैं उन्हें सामान्य भविष्य काल कहते हैं।

जैसे- माता जी तीर्थ यात्रा पर जाएगी , वह घर जायेगा,  राम आएगा,  मै प्रातः कॉलेज जाऊँगा।

ii. सम्भाव्य भविष्य :–


क्रिया का वह रूप जिससे काम के भविष्य में होने या किए जाने की सम्भावना है, पर निश्चितनहीं, उसे सम्भाव्य भविष्य कहते है।

जैसे– शायद कल सवेरे वह आ जाए , वह विजयी होगा।
शायद आज रात वर्षा हो।

iii. हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल:-


क्रिया के जिस रूप से एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर हो उसे हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल कहते है। इसमें एक क्रिया दूसरी पर निर्भर होती है। इसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है।

जैसे :- वह आये तो मैं जाऊ।
वह पढ़ेगा तो सफल होगा।

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