August 29, 2020

Sukanya Samraddhi Yojna in hindi

 

क्या है सुकन्या समृद्धि योजना? (SSY) Sukanya Samraddhi Yojna in Hindi

सुकन्‍या समृद्धि भारत सरकार द्वारा लाई गई एक बचत योजना है जिसके अंतर्गत अभिभावक कन्या के नाम से खाता खोल सकते हैं | यह खाता केवल जन्म से लेकर 10 वर्ष की उम्र की लड़की के नाम पर ही खुलवाया जा सकता है । यह खाता किसी भी डाकखाने और निर्धारित सरकारी बैंकों में खोला जा सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा यह बचत योजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम के तहत लांच किया गया है। इस बचत स्कीम में सबसे बेहतर ब्याज दर देने का प्रावधान है ।

10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए उच्च शिक्षा और शादी के लिए बचत करने के लिहाज से केंद्र सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना एक अच्छी निवेश योजना है।

इस योजना में निवेश से आपको इनकम टैक्स बचाने में भी मदद मिलती है क्योंकि इस में जमा की जाने वाली रकम और परिपक्‍व रकम को आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत पूरे कर छूट प्राप्‍त है।




August 28, 2020

मेजर ध्यानचंद - हॉकी का जादूगर

मेजर ध्यानचंद - हॉकी का जादूगर

मेजर ध्यानचंद


All About Major Dhyan chand in hindi


मेजर ध्यान चंद को हॉकी के इतिहास में सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जाता है । ध्यान चंद के जन्मदिन को हर वर्ष भारतीय राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उपलब्धियाँ:


मेजर ध्यान चंद ने 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते हैं। वर्ष 1928, 1932 और 1936 में ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
वर्ष 1955 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।

उन्होंने अपने हॉकी करियर में अंतरराष्ट्रीय मैचों में 400 गोल किए थे। वर्ष 1928 में एम्स्टर्डम ओलंपिक में उन्होंने 5 मैचों में सर्वाधिक 14 गोल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। तब से उन्हें हॉकी विज़ार्ड ( हॉकी का जादूगर ) के रूप में जाना जाने लगा। वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भी उन्होंने सर्वाधिक गोल किए थे।
भारतीय हॉकी में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए ध्यान चंद को सम्मानित करते हुए एक भारतीय डाक टिकट भी जारी की गई। वर्ष 2002 से भारतीय खेल एवं युवा मंत्रालय द्वारा खिलाड़ी के जीवन भर के कार्य को गौरवान्वित करने के लिए “ध्यानचंद पुरस्कार” दिया जाने लगा।

ध्यानचंद के जीवन का सफ़र:


ध्यानचंद का जन्म उत्तरप्रदेश के इलाहबाद में 29 अगस्त 1905 को मौर्य परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम समेश्वर सिंह था जो ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सूबेदार के रूप कार्यरत थे ।  ध्यानचंद के पिता और दो भाई  मूल सिंह एवं रूप सिंह भी ध्यानचंद की तरह हॉकी खिलाड़ी थे।

कक्षा 6 के बाद से ही उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा क्योंकि उनके पिता सेना में थे और स्थानान्तरण के कारण उनका परिवार अक्सर स्थानांतरित होता रहता था। बचपन में ध्यान चंद का खेल के प्रति कोई लगाव नहीं था। हालांकि, वह अपने मित्रों के साथ अन्य खेलों में शामिल होते रहते थे ।

बताया जाता है एक बार वे एक होकी मैच देखने अपने पिता के साथ गए, वहां एक टीम 2 गोल से हार रही थी ध्यानचंद ने अपने पिता को कहाँ कि वो इस हारने वाली टीम के लिए खेलना चाहते हैं तो उनके पिता ने ध्यानचंद को खेलने की इजाज़त दे दी ध्यानचंद ने उस मैच में 4 गोल किये उनके आत्मविश्वास को देख आर्मी ऑफिसर बहुत खुश हुए और उन्हें आर्मी ज्वाइन करने को कहा ।

1921 में 16 साल की उम्र में ध्यानचंद पंजाब रेजिमेंट से एक सिपाही बन गए। आर्मी में आने के बाद ध्यानचंद ने होकी खेलना शुरू किया । सूबेदार मेजर भोले तिवारी आर्मी में ध्यानचंद के मेंटर बने और उन्हें खेल के बारे में ज्ञान दिया.

पंकज गुप्ता ध्यानचंद के पहले कोच कहे जाते थे, उन्होंने ध्यानचंद के खेल को देखकर कह दिया था कि ये एक दिन पूरी दुनिया में चाँद की तरह चमकेगा. ध्यान चंद का असली नाम ध्यान सिंह था। उन्हें ध्यान चन्द नाम उनके कोच पंकज गुप्ता ने दिया था।

वर्ष 1925 में, उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय मैच खेला और उस मैच के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए चुना गया। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू मैच में गोलों की हैट्रिक लगाई थी।

ध्यानचंद के आखिरी दिन अच्छे नहीं रहे । आखिरी दिनों में उन्हें पैसों की भी कमी थी। उन्हें लीवर में कैंसर हो गया था जिसके कारण उन्हें दिल्ली के AIIMS हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया। और 3 दिसम्बर 1979 को मेजर ध्यानचंद का देहांत हो गया

 

वर्ण और वर्णमाला

वर्ण और वर्णमाला

वर्ण और वर्णमाला की परिभाषा-

वर्ण किसे कहते हैं ? varn kise kahte hain

वर्ण की परिभाषा varn ki paribhasha -  

भाषा की सबसे छोटी ध्वनि को वर्ण कहते हैं लिखित ध्वनि संकेतों को देवनागरी लिपि के अनुसार वर्ण कहा जाता हैं वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते हैं, जिसके खंड या टुकड़े नहीं किये जा सकते । जैसे- अ,आ,इ, , , ख्, ग इत्यादि।उदाहरण के लिए : राम  ने आम खाया इस वाक्य के छोटे खंड होंगे राम + ने+ आम + खाया

लेकिन इनसे भी छोटे खंड राम = र+आ+म , ने =  न+ए, आम = आ+म  खाए = ख+आ+ए मूल ध्वनियाँ हैं जिनके आगे खंड नहीं किये जा सकते । इन्हीं अखंड मूल ध्वनियों को वर्ण कहते हैं।

 प्रत्येक भाषा में अनेक वर्ण होते हैं हिन्दी भाषा में 52 वर्ण हैं।

 वर्णमाला किसे कहते हैं ?

वर्णमाला varnmala ki paribhasha - 

किसी भाषा के समस्त वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

प्रत्येक भाषा की अपनी अलग वर्णमाला होती है। 
हिंदी- अ, , , , ग..... 
अंग्रेजी- A, B, C, D,....

लिंग की परिभाषा

लिंग की परिभाषा

 

लिंग की परिभाषा Ling ki Paribhasha

लिंग किसे कहते हैं? Ling kise kahte hain ?

लिंग संस्कृत का एक शब्द है जिसका अर्थ निशान होता है जिस संज्ञा शब्द से व्यक्ति की जाति का पता चलता है उसे लिंग कहते हैं। अर्थात संज्ञा का वह रूप जिससे हमें किसी भी व्यक्ति, जीव, या वस्तु आदि की जाति पता चले, वे शब्द लिंग कहलाते हैं। इन शब्दों से यह पता चलता है कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाती का।

लिंग के उदाहरण

पुरुष जाति में: मोहन, सोहन, मानवपिता, भाई, लड़का, बैल, बकरा, मोर, हाथी, शेर, घोडा, कुत्ता आदि।

स्त्री जाति में:  मीना, महिला, माता, बहन, लड़की, गाय, बकरी, मोरनी, मोहिनी, हथनी, शेरनी, घोड़ी, खिड़की , कुतिया, भैंस, गाय आदि।

लिंग के भेद ling ke prakar

लिंग के मुख्यतः तीन भेद होते हैं :

  1. पुल्लिंग (पुरुष जाति)
  2. स्त्रीलिंग (स्त्री जाति)
  3. नपुंसकलिंग (जड़)

संज्ञा की परिभाषा

 

संज्ञा की परिभाषा (sangya definition in hindi)

संज्ञा किसे कहते हैं – Sangya in Hindi :-

किसी भी व्यक्ति, वस्तु, जाति, भाव या स्थान के नाम को ही संज्ञा कहते हैं। 

 

जैसे:  राम (व्यक्ति), किताब(वस्तु), मानव (जाति), करनाल (स्थान), मिठास(भाव)

संज्ञा के भेद (sangya ke bhed in hindi)

संज्ञा के पांच भेद होते हैं:

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. भाववाचक संज्ञा
  3. जातिवाचक संज्ञा
  4. द्रव्यवाचक संज्ञा
  5. समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा




August 27, 2020

National Sports Day

National Sports Day

National Sports Day - India

National Sports Day is celebrated in various countries to honour the national sports teams and sports traditions of those countries.On this day people from different age groups take part in sports like kabaddi,  basketball, hockey etc.

The National Sports Day is celebrated on 29 August in india on the birth anniversary of hockey legend Major Dhyan Chand, who is regarded as nation's greatest hockey player of all time.

The National Sports Day is observed every year to spread awareness about the importance of sports and games in the life of every individual.

Major Dhyan Chand (29 August 1905 – 3 December 1979) was an Indian hockey player and the greatest hockey player in the history of the sport. 

Bachpan ki yaden 2

 क्या आपके सामने ये सब हुआ है ?


आप सोचकर देखिए वो पुरानी यादें , मन प्रफुल्लित हो उठेगा , एक रोमांच सा जेहन में उतर आएगा । खुद ही सोचेंगे ऐसा भी हुआ था कभी , बच्चों को बताओगे तो उन्हें यकीन न आएगा ।

 कम ही घरों में टीवी हुआ करती थी , टीवी वो भी ब्लैक एंड व्हाइट , दूरदर्शन के प्रसारण को देखने के लिए एंटीना एडजस्ट करना होता था , घर की छत पर एंटीना सही करने वाला एक, दूसरा बाहर खड़ा होकर निर्देश देने वाला और तीसरा टीवी पर चित्र साफ हुए या नहीं देखने वाला , आवाज छत से "आई क्या" , "अरे नहीं थोड़ा और घुमा " , "आई आई अरे पहले वाली साइड में ले थोड़ा , हाँ आ गई ", यहीं फिक्स करके उतर आ ।

सन सतासी दूरदर्शन पर रामायण का प्रसारण पूरे गांव में एक टीवी , बिजली तो कहीं कहीं थी तो टीवी बैटरी से चलती थी , बैटरी के चार्ज होने की फिक्र बैटरी वाले से ज्यादा सारे गाँव वालों को हुआ करती थी ।

याद है मामा जी का वो गाँव जहाँ ट्रैक्टर के बोनट पर रखकर उसकी बैटरी से टीवी पर रामायण का चलना और ट्रैक्टर के सामने पूरे गाँव की भीड़ एक टक निगाह टीवी पर ।
 जिस दिन ट्रैक्टर खेत से आधा घंटे पहले ना पहुंचा तो सबको फिकर कहीं रामायण ना निकल जाए , बुलाने के लिए साइकिल सवार खेतों की दौड़ लगाते जुताई रुकवाकर ट्रैक्टर का वापस आना और सबका खुशी से चिल्लाना "आ गया आ गया "।

यही हालात रामायण के बाद दूरदर्शन पर रिलीज हुए दूसरे धारावाहिक महाभारत के साथ हुए । आज जब आप सोच भी नहीं सकते कि सिर्फ टीवी देखने दूसरे के घर जाना , उस समय लोग बुला लिया करते थे अरे मेरे पास व्यवस्था है आ जाना और साथियों को भी लेते आना , फॉर्मेलिटी तो जैसे थी ही नहीं कहीं , पैसा कम था पर दिल बहुत बड़े ।

समय बदला हालात बदल गए घर घर घर टीवी आ गईं , बिजली का दायरा बढ़ने लगा घरों में टीवी के साथ पंखे भी आ गए ।
 वो दौर भी आया जब चन्द्रकान्ता, और शक्तिमान जैसे धारावाहिकों ने खूब लुभाया। रविवार को सुबह जल्दी तैयार होकर सीधा टीवी के सामने सुबह 7 बजे रंगोली के मधुर गानों।से शुरुआत करके धारावाहिक और कार्टून आदि लगभग 12 बजे तक और उसके बाद साप्ताहिक फ़िल्म शाम के समय , फिर से संडे का इंतजार ।

 बीच बीच में कई जासूसी धारावाहिक जैसे एक दो तीन चार, सुपर सिक्स, व्योमकेश बख्शी, और तहकीकात का क्रेज बस देखने लायक होता था , तब बिजली जाने पर जिनके घरों में बैटरी होती थीं वहाँ की तरफ निकल आते थे बच्चे ।

पुराने लोगों को याद होगा गर्मियों में छत पर सोने के लिए पहले से दो बाल्टी पानी डालकर आना जिससे छत थोड़ा ठंडी हो जाए , और अपनी अपनी जगह निश्चित कर लेना कि कौन कहाँ सोएगा , बच्चे बच्चे एक साइड बड़े बड़े एक साइड , छत से मिली छत , अड़ोसी पड़ोसी से गप शप के बाद सुकून भरी नींद ।

Bachpan ki yaaden 1

 कुछ धुंधला धुंधला सा याद है सब कुछ जो गुजर गया । याद हैं कुछ मीठी मीठी सी बातें और कुछ कड़वे से पल जो भूल जाना ही बेहतर है । यादें तो अच्छी संजोना ही अच्छा लगता है ।

जिए हैं हमने वो लम्हे जो आने वाले भविष्य में लोग शायद ना ही जी पाएँगे , देखें हैं वो माहौल जो उनको नसीब न हो पाएँगे ।
जी हाँ हम अस्सी के दशक में जन्मे और गाँव से जुड़े कस्बो और शहर में रहने वाले वे लोग जिन्होंने हर तरह की जिंदगी को करीब से देखा है । देखी हैं वो खुशिया वो माहौल वो प्यार वो दुलार जो आज के रिश्तों में दिखाई ही नहीं देता ।

वो दिन भी क्या दिन थे साहब पैसा कम था खुशियाँ ज्यादा , गाँव में बिजली तो नहीं थी मगर सुकून बड़ा था , परेशानियां बहुत थीं मगर इंसान आज से ज्यादा सुखी था ।

आज भी याद है वो बचपन जब गर्मी की छुट्टियों का इंतजार सभी बच्चों को होता था , जाना होता था अपने गांव या नानी के घर । और ये इंतजार हमें ही नहीं उनको भी होता था जिनके पास हम जाने वाले होते थे । और छुट्टियां खत्म होते होते फिर से आपस में सभी कजिन के वादे अगली छुट्टियों में फिर से यहीं मिलेंगे । फोन तो थे नहीं तब तो पहले ही मिलने की प्लानिंग हो जातीं थीं और घर वाले कहीं भी जाएं मगर हमें वहीं जाने दें जहां हमें मजा आता है जिद मतलब जिद ।

आज हालात कुछ ऐसे हैं कि 1 घण्टे बिजली ना आए तो तुरंत परेशानी होने लगती है इन्वर्टर है मगर बिजली आने का इंतजार है बच्चों को बिना ऐसी नींद नहीं आती और बच्चे गाँव जाना पसंद ही नहीं करते , उनका तो चलता है बस कार्टून , कैरम, लूडो वो भी लिमिटेड पेरेंट्स खेलने दें तब ना । सभी पैरेंट्स को बच्चा क्लास में पहले नंबर पर चाहिए ।

एक समय था , कक्षा में पास होना होता था मतलब पास बस  , न तो मोटी मोटी किताब कॉपी थीं न इतना भारी बस्ता , माँ बाप की अभिलाषा जरूर होती थी कि हमारा बच्चा पढ़े मगर ऐसी जिद न होती थी कि मार्क्स कितने आएं ।

Bachpan ki yaaden 4

 क्या आपने बचपन में तीन पहिए वाली लकड़ी की गाड़ी पकड़कर चलना सीखा या किसी बच्चे को चलते देखा है ?




तब वॉकर नहीं थे साहब चलना सीखने को बच्चों को वो तीन पहिए की गाड़ी फेमस थी , जो आजकल भी कहीं कहीं बिकती तो है पर लेने वाले नहीं मिलते ।

 जो पालना आप बाजार से खरीदकर बच्चों को झुलाते हो , क्या आपने कभी देखा है गांव में एक छोटी चारपाई जिसे खटोला कहते हैं उसके चार पाए को रस्सी से बांधकर उसी को पालना बनाकर माँ अपने बच्चे को रस्सी से झुलाती हुई ।


वो साइकिल के पहिए से निकले खराब टायर को छोटी सी लकड़ी का टुकड़ा लेकर दौड़ाना , और देखना चल किसकी गाड़ी आगे निकलती है ।

एक खेल था शायद बहुतों ने नाम भी न सुना हो 'हुर का दंड' ये खेल सिर्फ और सिर्फ गाँव में ही खेला जाने वाला खेल था जो विलुप्त से हो गया , क्योंकि इसे खेला जाता था जहाँ पेड़ अधिक हों , एक बच्चा एक लकड़ी ( दंड) को अपनी टाँगों के नीचे से फेंकता था और उस सहित बाकी सभी आसपास के पेड़ों पर चढ़ जाते थे , जिस पर दांव होता था उसे किसी भी एक बच्चे को छूना होता था पर शर्त ये थी कि उसे उस फेंकी हुई लकड़ी की हिफाजत भी करनी होती थी यानी वो किसी एक को छूने गया दूसरे ने पेड़ से उतर कर लकड़ी ले ली तो फिर से दांव उसी पर और लकड़ी तक किसी के पहुँचने में वो छू लिया तो दांव दूसरे पर ।


हालांकि अन्य भी कई खेल धीरे धीरे विलुप्ति की कगार पर हैं जैसे कंचा गोली , गुल्ली डंडा, छान छान चलनी आदि

चोर सिपाही और सामूहिक रस्सी कूद व लँगड़ी टांग भी अब लगभग खत्म से हैं ।


सावन के महीने में किसी भी गाँव मे जाते थे तो शायद ही किसी पेड़ की मजबूत डाली होती थी जिस पर झूला न पड़ा हो । क्या छोटे बच्चे, बच्ची और क्या उस गाँव की बड़ी बेटियां जो सावन में मायके आई हुई होती थीं मिलकर झूले का लुत्फ उठाते थे , साथ साथ गाने भी गाए जाते थे एक गाना तो बड़ा फेमस था ''झूला तो पड़ गए , अमुआ की डाल पे जी" ।

आज के समय में कहीं भी जाओ झूले तो शायद मिल जाएं एक दो जगह पर वो आपसी तालमेल वो हँसी ठिठोली वो मस्ती अब वो बात नहीं ।

August 25, 2020

काल की परिभाषा, भेद और उदाहरण

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Tense In Hindi काल की परिभाषा, भेद और उदाहरण


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काल किसे कहते है kaal kise kahte hain


काल (Tense) की परिभाषा Kaal ki Paribhasha


क्रिया के होने या करने के समय को काल कहते हैं। अथवा क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का बोध होता है उसे 'काल' कहते है। अन्य शब्दों में क्रिया के उस रूपान्तर को काल कहते है, जिससे उसके कार्य-व्यापर का समय और उसकी पूर्ण अथवा अपूर्ण अवस्था का बोध हो।

जैसे-
बच्चे पढ़ रहे हैं।
बच्चे पढ़ रहे थे।
बच्चे पढेंगे।

इन वाक्यों की क्रियाओं से कार्य के होने का समय प्रकट हो रहा है।

काल के भेद – Kaal ke Bhed :


काल के तीन भेद होते है-
(1) वर्तमान काल (present Tense) - जो समय चल रहा है।
(2) भूतकाल (Past Tense) - जो समय बीत चुका है।
(3) भविष्यत काल (Future Tense) - जो समय आने वाला है।


  1. वर्तमान काल :–




क्रिया के जिस रुप से यह पता चले कि काम अभी हो रहा है। जिन वाक्यों के अंत में ता , ती , ते , है , हैं आते हैं वो वर्तमान काल कहलाता है। क्रियाओं के होने की निरन्तरता को वर्तमान काल कहते हैं।

वर्तमान काल के भेद :-


(1) सामान्य वर्तमान काल
(2) अपूर्ण वर्तमान काल
(3) पूर्ण वर्तमान काल
(4) संदिग्ध वर्तमान काल
(5) तात्कालिक वर्तमान काल
(6) संभाव्य वर्तमान काल

(1) सामान्य वर्तमान काल :- 


जिस क्रिया से क्रिया के सामान्य रूप का वर्तमान में होने का पता चलता है उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में ता है , ती है , ते है , ता हूँ , ती हूँ आदि आते हैं उसे सामान्य वर्तमान काल कहते है। जैसे :- सीता पढती है।,  वह आता है।

(2) अपूर्ण वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से कार्य के लगातार होने का पता चलता है उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते है। जिन वाक्यों के अंत में रहा है , रहे है , रही है , रहा हूँ आदि आते है उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते हैं। जैसे :- वह घर जा रहा है।, राम लिख रहा है।

(3) पूर्ण वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से कार्य के अभी पूरे होने का पता चलता है। उसे पूर्ण वर्तमान काल कहते है। जैसे :- मैंने फल खाए हैं।
वह आया है।

(4) संदिग्ध वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से वर्तमान काल क्रिया के होने या करने पर शक हो उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते है। इन वाक्यों के अंत में ता होगा , ती होगी , ते होंगे आदि आते हैं । जैसे :- वह गाता होगा।, गाड़ी आती होगी ।, बच्चा रोता होगा।

(5) तात्कालिक वर्तमान काल :-


क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता हो कि कार्य वर्तमान में हो रहा है उसे तात्कालिक वर्तमान काल कहते हैं।

जैसे :- मैं पढ़ रहा हूँ।
वह जा रहा है।

(6) संभाव्य वर्तमान काल :-


संभाव्य का अर्थ होता है संभावित या जिसके होने की संभावना हो। इससे वर्तमान काल में काम के पूरे होने की संभावना होती है उसे संभाव्य वर्तमान काल कहते हैं।

जैसे :- वह चलता हो।
उसने खाया हो।


  1. भूतकाल :–




क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि काम बीते हुए समय में पूरा हो गया है। भूतकाल का अर्थ होता है बीता हुआ। क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का पता चले उसे भूतकाल कहते हैं। इसकी पहचान वाक्यों के अंत में था , थे , थी आदि से होती है।

इसके छ: भेद है।

i. सामान्य भूत काल :–


क्रिया के जिस रूप से यह मालूम हो कि काम बीते हुए समय में सामान्यतः पूरा हो गया। जिस क्रिया के भूतकाल में क्रिया के सामान्य रूप से बीते समय में पूरा होने का संकेत मिले उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में आ , ई , ए , था , थी , थे आते हैं वे सामान्य भूतकाल होता है।

जैसे– वह गया,  पानी गिरा,  वह स्कूल गया।

ii.आसन्न भूत काल:–


क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि काम अभी-2 पूरा हुआ है। अथार्त क्रिया के जिस रूप से हमें यह पता चले की क्रिया अभी कुछ समय पहले ही पूर्ण हुई है उसे आसन्न भूतकाल कहते हैं।

जैसे – वह अभी गया, मैं अभी सोकर उठा हूँ,  उसने दवा खायी है।

iii. पूर्ण भूत काल:–


क्रिया के जिस रुप से यह ज्ञात हो कि काम बहुत पहले पूरा हो चुका था। अथार्त क्रिया के जिस रूप से यह पता चले की कार्य को समाप्त हुए बहुत समय बीत चूका है उसे पूर्ण भूतकाल कहते हैं।

जैसे – वह गया था, बच्चा आया था, उसने विजय को मारा था।

iv. अपूर्ण भूत :–


क्रिया के जिस रुप से क्रिया का भूतकाल में होना पाया जाए, लेकिन पूर्ण हुआ या नहीं ज्ञात न हो, उसे अपूर्ण भूत कहते है। अथार्त क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में शुरू होने का पता चले लेकिन खत्म होने का पता न चले उसे अपूर्ण भूतकाल कहते हैं।

जैसे – वह जा रहा था, सुनील पढ़ रहा था,  बच्चे खेल रहे थे।

v. संदिग्ध भूत :–


जिस क्रिया के करने या होने में संदेह हो उसे संदिग्ध भूत कहते है। क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में पूरा होने पर संदेह हो कि वह पूरा हुआ था या नहीं उसे संदिग्ध भूतकाल कहते हैं।

जैसे– वह गया होगा, उसने खाया होगा, महिमा चली गई होगी।

vi. हेतु हेतुमद भूत :–


क्रिया के जिस रुप से कार्य के भूतकाल में होने या किए जाने की शर्त पाई जाए, उसे हेतुहेतुमद भूत कहते है। इसमें पहली क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर होती है। पहली क्रिया तो पूरी नहीं होती लेकिन दूसरी भी पूरी नहीं हो पाती।

जैसे – वह मेहनत करता तो सफल हो जाता।
यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।


  1. भविष्य काल :–




क्रिया के जिस रुप से किसी काम का आने वाले समय में किया जाना या होना ज्ञात हो उसे भविष्य काल कहते है। जिन वाक्यों के अंत में गा , गे , गी आदि आते हैं वे भविष्य काल होते हैं।

भविष्य काल के भेद :-

(1) सामान्य भविष्य काल
(2) संभाव्य भविष्य काल
(3) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल

i. सामान्य भविष्य :–


क्रिया के जिस रूप से काम का सामान्य रूप से भविष्य में किया जाना या होना पाया जाए अर्थातजिन शब्दों के अंत में ए गा , ए गी , ए गे आदि आते हैं उन्हें सामान्य भविष्य काल कहते हैं।

जैसे- माता जी तीर्थ यात्रा पर जाएगी , वह घर जायेगा,  राम आएगा,  मै प्रातः कॉलेज जाऊँगा।

ii. सम्भाव्य भविष्य :–


क्रिया का वह रूप जिससे काम के भविष्य में होने या किए जाने की सम्भावना है, पर निश्चितनहीं, उसे सम्भाव्य भविष्य कहते है।

जैसे– शायद कल सवेरे वह आ जाए , वह विजयी होगा।
शायद आज रात वर्षा हो।

iii. हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल:-


क्रिया के जिस रूप से एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर हो उसे हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल कहते है। इसमें एक क्रिया दूसरी पर निर्भर होती है। इसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है।

जैसे :- वह आये तो मैं जाऊ।
वह पढ़ेगा तो सफल होगा।

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August 23, 2020

व्याकरण की परिभाषा Defination Of Hindi Grammar

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Defination Of Grammar
व्याकरण-


व्याकरण वह विध्या है जिसके द्वारा हमे किसी भाषा का शुद्ध बोलना, लिखना एवं समझना आता है। भाषा की संरचना के कुछ नियम होते हैं और भाषा की अभिव्यक्तियाँ असीमित। भाषा के इन नियमों को एक साथ जिस शास्त्र के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है उस शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।

किसी भाषा के ज्ञान की कमी के कारण कुछ लोग शब्दों के उच्चारण करने अथवा अर्थ समझने में गलती करते हैं। इसीलिए भाषा की शुद्धता और एकरूपता बनाए रखने का कार्य व्याकरण से होता है। भाषा के गूढ़ ज्ञानियों द्वारा रचा व्याकरण भाषा के नियमों का एक संग्रह है ।

उदाहरण से समझें -
शंकर स्कूल गई थी सीता भी जाएगा।
इस वाक्य में अशुद्धि क्योंकि शंकर पुल्लिंग है और सीता स्त्रीलिंग ।

सही वाक्य शंकर स्कूल गया था सीता भी जाएगी होगा

व्याकरण के प्रकार


भाषा के चार मुख्य अंग हैं-  वर्ण, शब्द पद और वाक्य। इसलिए व्याकरण के मुख्यतः चार प्रकार हैं-

(1) वर्ण या अक्षर 
(2) शब्द 
(3) पद

(4)वाक्य

 

(1) वर्ण या अक्षर:- भाषा की सबसे छोटी ध्वनि को वर्ण कहते है जिसके टुकड़े नही किये जा सकते है।
जैसे- अ, ब,स, द, आदि।

(2) शब्द:- वर्णो के उस समूह को शब्द कहते है जिसका कुछ अर्थ होता है। जैसे- आगरा,रमेश, पानी, आदि।

इसमें शब्द-रचना, उनके भेद, तथा उनके प्रयोग आदि पर विचार किया जाता है।

(3) पद-  इसमें पद-भेद, पद-रूपान्तर तथा उनके प्रयोग आदि को समझा जाता है।

 (4 )वाक्य :- अनेक शब्दों को मिलाकर वाक्य बनता है। ये शब्द मिलकर किसी अर्थ का ज्ञान कराते है।
जैसे- राम खाना खाता है। इनमें वाक्य व उसके अंग, पदबंध तथा विराम चिह्न आदि पर विचार किया जाता है।

हिन्दी व्याकरण की विशेषताएँ

हिन्दी-व्याकरण संस्कृत व्याकरण पर आधारित है ।लेकिन इसकी भी खुद की कई विशेषता हैं हिन्दी व्याकरण प्रायः संस्कृत व्याकरण के आधार पर ही बनाया है पर कहीं कहीं अंतर भी है।

ध्वनि और लिपि

ध्वनि-  ध्वनियाँ हर प्राणी निकालता है और ये अन्य से भिन्न होती हैं । ध्वनि निर्जीव वस्तुओं की भी होती है जैसे- कम्पन आदि। व्याकरण में केवल मनुष्य के मुँह से निकली ध्वनियों पर विचार किया जाता है।

बोली शब्दों से बनती है और शब्द ध्वनियों के संयोग से। आरम्भ में ध्वनियो को लिखने के लिए चिह्नों से काम लिया गया और क्रमशः शब्दचिह्न और ध्वनिचिह्न बनने के बाद लिपियों का निर्माण हुआ। चिह्नों में परिवर्तन होते रहे। वर्तमान लिपियाँ चिह्नों के अन्तिम रूप हैं। हिन्दी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती।

लिपि - विचारो को विशेष प्रकार के चिन्हों से लिखना ही लिपि कहलाता है। हिंदी और संस्कृत भाषा की लिपि देवनागरी है। अंग्रेजी भाषा की लिपि रोमन पंजाबी भाषा की लिपि गुरुमुखी और उर्दू भाषा की लिपि फारसी है।

हिन्दी में लिपि चिह्न

देवनागरी के वर्णो में ग्यारह स्वर और इकतालीस व्यंजन हैं। व्यंजन के साथ स्वर का संयोग होने पर स्वर का जो रूप होता है, उसे मात्रा कहते हैं जैसे : क का कि की कु कू के कै को कौ

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Complete Hindi Vyakaran व्याकरण :

Bhasha भाषा,    Varn वर्ण and Varnmala वर्णमाला,   Shabd शब्द,   Vakya वाक्य ,   Sangya संज्ञा

Sarvnam सर्वनाम,   Ling लिंग,   Vachan वचन ,   alankar अलंकार,   visheshan विशेषण ,

pratyay प्रत्यय ,  Kriya क्रिया ,    Sandhi संधि,  karak कारक,    kal काल kaal

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August 15, 2020

Countable or uncountable noun:

Countable or uncountable noun:

Countable or uncountable noun:


Nouns can be either countable or uncountable.

Countable nouns (count nouns) are those that refer to something that can be counted.

Example: boy, cup, pencil, book, plate , tree etc.

Uncountable nouns (mass nouns) do not typically refer to things that can be counted and so they do not regularly have a plural form. We can weigh or measure them.

Example: rice , wheat, milk, oil, cloth, wood , sand etc.

Sigular Noun and Plural Noun

Sigular Noun and Plural Noun

Sigular Noun and Plural Noun


Singular  means only one.

Plural means more than one.

In order to make a noun plural add s to form the plural. Example:

cat ⇒ cats
truck ⇒ trucks
bug ⇒ bugs

The rules for spelling plural nouns are based on the letters at the end of the word.



  1. If a singular noun ends in -s,-ss,-ch,-sh or –x , its plural is usually formed by adding –es


Example: bus ⇒ buses        brush ⇒ brushes        fox ⇒ foxes
beach ⇒ beaches                     quiz ⇒ quizzes

2. Nouns that end in vowel + y or vowel + o Add sto form the plural

Example :  donkey ⇒ donkeys         highway ⇒ highways

oreo ⇒ oreos               scenario ⇒ scenarios

3. Nouns that end in consonant + y Change the yto i and add es to form the plural.

Example :  family ⇒ families              trophy ⇒ trophies

4. Irregular nouns form plurals in unusual ways. Dictionaries will give you the plural spelling if it is irregular.

child ⇒  children ,         foot ⇒  feet              tooth ⇒ teeth        man ⇒  men

5. Some nouns are spelled the same way whether they are singular or plural.

fish ⇒  fish           sheep ⇒  sheep          deer ⇒  deer

You can see below that nouns with the same endings form plurals in the same way every time.


 -a -ae

amoeba ⇒ amoebae     antenna ⇒ antennae       alumna ⇒ alumnae

-us -i

cactus ⇒ cacti,          nucleus ⇒ nuclei,          fungus ⇒ fungi

-is -es

axis ⇒ axes          hypothesis ⇒ hypotheses

-on ⇒ -a 

criterion ⇒ criteria           phenomenon ⇒ phenomena

 -ie ⇒ -ce

die ⇒ dice

Some nouns exist only in the plural form.


Example: Pants    Clothes    Pajamas     Glasses

Scissors     Goggles      Shorts     Jitters         Tweezers

 

Noun and Type of Nouns.

Noun and Type of Nouns.

Definition of Noun:


noun is a word that names a person, place, thing, animal, bird or an idea.

A noun is the name of a person, place, animal, bird or thing.

In a sentence, nouns can play the role of subject, direct object, indirect object, subject complement, object complement, appositive, or adjective.

Types Of Nouns


There are several different types of noun  as follows:

1. Common noun


2. Proper noun


3. Concrete noun


4. Abstract noun


5. Collective nouns


6. Count and mass nouns


1. Common nouns: 


Common nouns are names of  persons, places, things, animals, birds or idea in general.  They are not capitalized unless they come at the beginning of a sentence.

or


A common noun is a noun that refers to people or things in general.

Example:  boy, country, bridge, city, birth, day, happiness.

2. Proper nouns:


Proper nouns are the names of specific (particular) persons, places, things. A Proper noun always begins with a capital letter. Or should always be capitalized.

or


A proper noun is a name that identifies a particular person, place, or thing.

Example:  Africa, London, and Monday.

In written English, proper nouns begin with capital letters.

 



































CommonProper
girlSita
riverGanga River
carMaruti
monumentTajmahal
cityDelhi

Don't forget to capitalize all parts of proper nouns.

3. Concrete Noun:


A concrete noun is a noun which refers to people and to things that exist physically and can be seen, touched, smelled, heard, or tasted. name people, places, or things that you can touch, see, hear, smell, or taste.

 

























PersonPlaceThing
manRiverDog
RahulDelhibook

4. Abstract Noun:


An abstract noun is a noun which refers to ideas, qualities, and conditions - things that cannot be seen or touched and things which have no physical reality. Name,  ideas, concepts, or emotions. These nouns are intangible, which means you cannot touch, see, hear, smell, or taste them using your five senses.

Example:  truth, danger, happiness, time, friendship, humour.

























 

Idea
Emotion
LoveHappiness
IntelligenceAnger
JusticeExcitement
ReligionFear

 

5. Collective Noun:


Collective comes from the same root as collection. A collective noun names a group, which is like a collection of people or things.

Collective nouns refer to groups of people or things, i.e: audience, family, government, team, jury. In American English, most collective nouns are treated as singular, with a singular verb:

A noun may belong to more than one category. For example, happiness is both a common noun and an abstract noun, while Mount Everest is both a concrete noun and a proper noun.

 












familyTeamjurycommitteeherdpod

 

6. Count and mass nouns


Countable or uncountable noun:


Nouns can be either countable or uncountable.

Countable nouns (count nouns) are those that refer to something that can be counted.

Example: boy, cup, pencil, book, plate , tree etc.

Uncountable nouns (mass nouns) do not typically refer to things that can be counted and so they do not regularly have a plural form. We can weigh or measure them.

Example: rice , wheat, milk, oil, cloth, wood , sand etc.

 Sigular Noun and Plural Noun


Singular  means only one.

Plural means more than one.

In order to make a noun plural add s to form the plural. Example:

cat ⇒ cats
truck ⇒ trucks
bug ⇒ bugs

The rules for spelling plural nouns are based on the letters at the end of the word.

  1. If a singular noun ends in -s,-ss,-ch,-sh or –x , its plural is usually formed by adding –es


Example: bus ⇒ buses        brush ⇒ brushes        fox ⇒ foxes
beach ⇒ beaches                     quiz ⇒ quizzes

2. Nouns that end in vowel + y or vowel + o Add sto form the plural

Example :  donkey ⇒ donkeys         highway ⇒ highways

oreo ⇒ oreos               scenario ⇒ scenarios

3. Nouns that end in consonant + y Change the yto i and add es to form the plural.

Example :  family ⇒ families              trophy ⇒ trophies

4. Irregular nouns form plurals in unusual ways. Dictionaries will give you the plural spelling if it is irregular.

child ⇒  children ,         foot ⇒  feet              tooth ⇒ teeth        man ⇒  men

5. Some nouns are spelled the same way whether they are singular or plural.

fish ⇒  fish           sheep ⇒  sheep          deer ⇒  deer

You can see below that nouns with the same endings form plurals in the same way every time.


 -a -ae

amoeba ⇒ amoebae     antenna ⇒ antennae       alumna ⇒ alumnae

-us -i

cactus ⇒ cacti,          nucleus ⇒ nuclei,          fungus ⇒ fungi

-is -es

axis ⇒ axes          hypothesis ⇒ hypotheses

-on ⇒ -a 

criterion ⇒ criteria           phenomenon ⇒ phenomena

 -ie ⇒ -ce

die ⇒ dice

Some nouns exist only in the plural form.


Example: Pants    Clothes    Pajamas     Glasses

Scissors     Goggles      Shorts     Jitters         Tweezers

compound noun is a noun made up of two or more words. Each word makes up part of the meaning of the noun.

Compound nouns can be written three ways:
































A single wordTwo wordsHyphenated
Haircutrain forestself-esteem
Toothpasteice creambrother-in-law
half-eaten pie
(Half-eaten describes the pie, so it is an adjective, not a noun.)

Two-word proper nouns can also be classified as compound nouns. Remember that proper nouns name specific people, places, and things.

Angkor Wat      Atlantic Ocean     Eiffel Tower      Nelson Mandela

When a compound noun is a single word, make it plural by adding s to the end. If the compound noun is hyphenated or composed of two separate words, remember to add s only to the word that is plural.

mother-in-law ⇒  mothers-in-law
(There are  mothers, not  laws.)

director general ⇒  directors general
(There are  directors, not generals.)

Beware of plurals! Students can be a group, but that doesn't make the word collective. It is plural. the test sentence One ____ is a group. One student is not a group.

August 11, 2020

Career options after class 12th

Career options after class 12th

Which career line is best for you to pursue?


For a student, Class 12  is the threshold to the world of higher education. There are hundreds of degree, diploma and certificate options to choose from. When passing out of Class 12, the students usually have a number of questions in mind, such as:



    1. Should I choose a specialised field right now or later?

    2. Should I choose a popular course or an emerging field of study?

    3. What exam(s) should I take to enrol in a certain course?




 

How can it be a major deciding factor in your success?


Along with being a very important decision, it is also a difficult decision to take, especially in today’s context. Today, students are faced with numerous options and several courses all of which look almost equally lucrative and interesting. This wide range of courses available today have further complicated the decision making process for the students. Gone are the days when a career as an engineer, doctor, chartered accountant and in other such core fields was the only good career opportunity. Students today have far more options available to them as compared to the ones a few years back. They are far more open to experimenting with new fields and are building careers as tea tasters, graphic designers, professional photographers, ethical hackers and many other such fields that were completely unheard of a few years back.

Career choice can be your life changing decision:


The introduction of these new fields has been both a blessing and a curse for the Class 12 students. For someone wanting to build a career in an off-beat field this is a great time to follow their passion. But, in the lure of following their passion, students often end up picking a course or stream that they are not really ready for. Similarly, many students pick certain courses because they perceive them to be easier as compared to other mainstream choices.

Often we come across people who are unhappy with their work life and wish they could switch to some other field. But switching fields once you start working is not easy. Thus, students need to be very sure about the course they choose. It's important to ensure that whatever course you pick is in sync with your personal career interests.

What is best for you to pursue after 12th?


If you are a Class 12 student, along with preparing for the Board Exams, you will also have to deal with one interesting but really nagging question, i.e., ‘What to do after Class 12?’ While many Class 12 students might have already decided what they want to do after Class 12, there are many other students who are still confused and undecided about the future they want to build.

Irrespective of which category you fall under, the decision about what to do after Class 12, is a critical one. With a plethora of courses, streams, entrance exams and career paths to choose from, it is natural for students to get confused about what lies ahead? But although, the career decision post Class 12 is very important, it is not as intimidating as some of the students think. In this article, we will explore career options available to Class 12 students after their Board exams.

How to choose the right Graduation Course?


Deciding the right course for graduation seems like an impossible decision to take. To take the first step toward choosing the right course after 12th you must first know what options are available to you and which ones are best suited to your interests. Some of the major points that students should factor in while deciding upon the best course for them are as follows -

1. Your Interests


The first thing that you must consider while deciding the graduation course is your interest and passion about it. Having mental clarity about, what you want to do in future and how interested are in a particular field, will go a long way in helping you decide your graduation course. For instance, if you are interested in archeology but have interest in chemistry, then Art restoration or Museology might be a good career option for you.

2. Understanding of the course


Before you decide which course to pursue, it is also important to understand what a course entail and what all does it cover? Simply put, you must thoroughly understand what lies in the store for you once you join the course. This means understanding what subjects will be covered, what will you learn, what kind of teaching pedagogy is followed in a particular graduation course.

There are many ways to gather important information about the graduation course you are planning to take up. The most convenient and obvious would be to talk to your seniors, siblings or parents. People who are working the fields that are similar to your interest will be able to guide you the best. Alternatively, you can also find relevant information on the internet or consult a career counselor.

3. Future Prospects


Another major factor to consider upon deciding a college course is its future prospects. Especially, if you are considering going for some new or off-beat courses, it is essential to understand the job and further study prospects that it holds. Going for a course that matches your interests is great but you should also be mindful of the future prospects that it offers. One of the major questions that you should try to answer is, 'What are the career opportunities available after the course?' Also, look for, what prospects are available for higher studies in the field.

Popular College Courses Available after 12th:


After Class 12, Indian students often face only two career choices i.e. Engineering or Medical. But gradually this perception is changing with new and innovative course options emerging. To add to this, today, students have also become more open towards new and off-beat courses and options that are presented to them today.


1. Engineering


Engineering is one of the most sought after course after 12th. Being a professional course, it attracts almost every candidate who has taken science stream with PCM subjects. Because of its high popularity, it is also a highly competitive course option which requires one to appear for different entrance exams to seek admission to top engineering colleges in India. The most popular among them is the Joint Entrance Exam (JEE), which is a common engineering entrance exam, organized by the Central Board of Secondary Education (CBSE) for engineering aspirants across the country.

Last year alone, around 11 lakh students appeared for the JEE Mains exam which is quite a clear indication of how popular engineering courses are among students. There is a wide range of engineering courses available to the science students. Mechanical, electrical, computer science, civil and biotechnology is some of the most preferred engineering streams. Some relatively new fields like that of nanotechnology, textile, petrochemical, marine engineering etc. are also gaining popularity and offer some exciting career choices upon graduation. Most engineering courses require for students to have a strong background in mathematics and science.

2. Medical Sciences


After engineering, the second most preferred option for students from science stream is Medical or Medicine. Medicine is the study of life and everything that surrounds it. To put simply, if your dream is to be a doctor, medicine is the stream for you. But in addition to this, you can also take up pharmacy, agricultural sciences and zoology studies also as part of your medical science studies post class 12. For example, the course of Bachelors in Pharmacy is a very popular course among medical students. It teaches them how drugs are made, how they work and also about drug immunity and the various effects different compounds have on a patient.

Students who opt for PCB or Physics, Chemistry and Biology in Class 12 can opt for courses associated with medical sciences including MBBS. Apart from the main stream career options, medical research in various fields such as that genetics, microbiology, etc. also offer great career opportunities to medical students. Biotechnology is a relatively new course in this field but, is fast gaining popularity and offers great careers opportunities to the students after graduation. Besides these, courses like physiotherapy, nutrition and dietetics etc. are also popular choices among students these days.

3. Commerce


For students who pursued commerce stream in class 11th and 12th Chartered Accountancy is one of the most popular course choices after 12th. The course helps you learn the nitty-gritties of the financial affairs of companies in accordance with the government laws and also covers topics on taxation, financial transactions through auditing along with the practical training for creating audit reports, etc. Apart from Chartered Accountancy, some other popular course options available to commerce students are Bachelors in Business Management (BBA), B.Com, B.Com (H), Economics (H), CS, Law, Bachelors in Travel and Tourism etc. These courses can help you build a great career as an investment banker, brand manager, human resource manager and other such reputable positions. Students who pursued commerce without mathematics in class 12th might not be eligible for some course available to commerce students after 12th.

4. Arts


A background in Arts or humanities offers a wide range of course for students to choose from. Contrary to the earlier trends, more and more students are opting for Arts course after 12th in recent years. Mass Communication, journalism, advertising, interior designing, graphics designing, psychology, sociology, history, fashion designing, photography, Theater etc.; there are a plethora of courses for an Arts student to choose from. As an Arts student, you can also pursue courses in linguistic, religious studies, art restoration, foreign languages, filmmaking, art history and other such related fields.

Why is it an important decision?


Picking the right course and college is a very important decision for a Class 12 student because the right choice will lead to a rewarding career. On the other hand, choosing the wrong option will mean that you end up precious time in studying a subject or a domain that doesn’t really interest you. Moreover, in the majority of the cases, the decision that you take after Class 12 will be the one that you will have to live with for the rest of your life. There is little scope for changing your career after joining a graduation course and even if you do it, you will still end up wasting the most important and productive years of your life.

Entrance Exams:


One of the major concerns for students after 12th is to appear for entrance exams. Almost every stream be it arts, engineering, medical, commerce or any other, has its own set of entrance exams for admission to reputed colleges in the respective domains. Every year lakhs of students prepare diligently to crack the entrance exams related to the courses they are interested in taking at the graduation level. Depending upon the score the students get in these exams, they can apply to a plethora of courses offered by colleges across the country. Because of the increasing number of applicants and fierce competition for admissions, many reputed colleges have adopted entrance exams as a means to screen and shortlist the best candidates suited to their course and college. There are some common entrance exams also, which help students apply to multiple colleges with a single entrance exam.