October 31, 2020

Know Your New Basic in 11th Bank Bipartite

Know Your New Basic in 11th Bank Bipartite

To know Your New Basic in 11th Bank Bipartite settlement check the raw in which your present basic written.


Today, the revised Pay scales have been worked out as under :

Clerical: Rs. 17,900-1000/3, 1230/3, 1490/4, 1730/7, 3270/1, 1990/1,
47,920.
Substaff: Rs. 14500, 500/4, 615/5, 740/4, 870/3, 1000/3, 28145.

Stagnation increments would be 9 increments after reaching maximum.



10TH BP BASIC

SUBSTAFF
11TH BP BASIC

SUBSTAFF
10TH BP BASIC

CLERK
11TH BP BASIC

CLERK
9560145001176517900
9885150001242018900
10210155001307519900
10535160001373020900
10860165001454522130
11270171151536023360
11680177301617524590
12090183451715526080
12500189601813527570
12910195751911529060
13400203152009530550
13890210552124032280
14380217952238534010
14870225352353035740
15440234052467537470
16010242752582039200
16580251452696540930
17235261452811042660
17890271453023045930
18545281453154047920
19200STAGNATION 132850STAGNATION 1
19855STAGNATION 234160STAGNATION 2
20510STAGNATION 335470STAGNATION 3
21165STAGNATION 436780STAGNATION 4
21820STAGNATION 538090STAGNATION 5
22475STAGNATION 639400STAGNATION 6
23130STAGNATION 740710STAGNATION 7

 

June 14, 2020

कुछ समय के लिए बैंकों का निजीकरण नहीं होने की खबर

कुछ समय के लिए बैंकों का निजीकरण नहीं होने की खबर

कुछ समय के लिए बैंकों का निजीकरण नहीं होने की खबर


कुछ प्रमुख समाचार पत्र और अन्य माध्यमों से आ रही खबर के अनुसार कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए आर्थिक हालात की वजह से चालू वित्‍त वर्ष में कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों  के निजीकरण  की उम्‍मीद नहीं है।

खबरों में अभी निजीकरण न होने की वजह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के घटे मूल्‍यांकन और स्‍ट्रेस्‍ड एसेट्स में बढ़ोतरी को बताया गया है।

खबर में चार बैंकों इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), यूको बैंक (UCO Bank) और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (UBI) पर पीसीए (प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन PCA) का हवाला देकर कहा गया है कि मौजूदा हालात में प्राइवेट बैंकिंग सेक्‍टर से उन्‍हें कोई खरीदार मिलना मुश्किल होगा।

ऐसे में सरकार की ओर से फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण नहीं करने का फैसला लिया जा सकता है।

लेकिन यहाँ सोचनीय विषय यह है कि दिए गए बैंक में से यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (UBI) का विलय पहले ही हो चुका है जबकि इन्हीं समाचार पत्रों की पिछली खबर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI) को लेकर निजीकरण की कोई खब़र नहीं थी।

एक अन्य बैंक बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र (BOM) जो कि पिछली खबरों में शामिल था उसका कोई जिक्र नहीं किया गया है जो एक संशय पैदा करता है।

हालाँकि श्री रघुराम राजन, श्री मनमोहनसिह से लेकर कई अन्य आर्थिक विषयों के विशेषज्ञों का पहले से ही मानना है कि सरकार का बैंकों के निजीकरण के बारे में सोचना फिलहाल बहुत ही गलत कदम है।

Bank DA from May 2020 to July 2020

June 13, 2020

बढ़ता जा रहा साइबर अपराध

बढ़ता जा रहा साइबर अपराध

साइबर अपराधियों द्वारा दिन पर दिन अपनाया जा रहा नया सिस्टम


साइबर अपराधियों से जुड़ा एक नया तरीका सामने आ रहा है अब वे आपके मोबाइल की स्पीड के लिए आपके मोबाइल कार्ड 3 जी को 4 जी में अपडेट करने के लिए कहते हैं और इसके लिए आपको लिंक द्वारा अथवा आपसे ओटीपी के लिए पूछते हैं जब आप लिंक खोलते हैं तो गड़बड़ शुरू।

वे आपको यह भी सूचित करते हैं कि इसके बाद आपका मोबाइल कुछ समय के लिए बंद हो जाएगा। तब आपका मोबाइल हैक किया जा चुका होता है  और हैकर नए क्लोन कार्ड बनाते हैं । मोबाइल बैंकिंग / नेट बैंकिंग का  दिए गए ओटीपी का उपयोग करते हैं।

अहमदाबाद के एक निजी बैंक में एक मामला सामने आया है जहाँ 5 एनईएफटी ट्रांजैक्शन  द्वारा जेएंडके, यूपी, बिहार में 5 जनधन खातों में जमा किया गया और एसबी खाते से नकद राशि की निकासी कर ली गई ।

इसी प्रकार फेसबुक पर भी आपके ही फोटो को चुराकर आपके ही नाम की नई आईडी बनाकर फिर मेसेंजर द्वारा आपके दोस्तों से अपने खातों में पैसे मांगने का तरीका भी सामने आया है ।

यह जानकारी आपको जागरूक करने और रोकथाम के लिए है ।

साइबर क्राइम



  • वे अपराध जिनमें कंप्यूटर पर हमला किया जाता है।  उदाहरण: हैकिंग, वायरस आदि ।अथवा

  • वे अपराध जिनमे कंप्यूटर को  उपयोग कर अपराध किया जाता है। इस प्रकार के अपराधों में साइबर आतंकवाद, आईपीआर उल्लंघन, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, पोर्नोग्राफी आदि आते हैं ।

बैंकों का निजीकरण सही नहीं, विरोध शुरू

बैंकों का निजीकरण सही नहीं, विरोध शुरू

बैंकों का निजीकरण सही नहीं, विरोध शुरू


सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण खबर के आने के बाद से ही बैंक कर्मचारियों में सरकार के प्रति असंतुष्टि की भावना और विरोध जाग्रत हुआ है । उनका मानना है कि सर्वाजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण सही नहीं। यदि केवल चार बैंक रखने हैं तो बैंक विलय ही सही तरीका है।

बैंक कर्मचारियों के अनुसार जो सरकारी उपक्रम किसी जमाने में सरकार और देश की शान हुआ करते थे, वही इस नए दौर में सरकार को बोझ और बेकार लगने लगे हैं। हालाँकि आज तक सरकार की जितनी भी योजनाएं हैं वे इन्ही बैंकों के द्वारा ही कारगर साबित हुई हैं ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ भी अब मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतर आया है  विरोध में हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और मोदी सरकार पर मजदूरों के हितों के खिलाफ आर्थिक नीति बनाने का आरोप लगाया है।

XI BIPARTITE SETTLEMENT update 26 Apr 2020

बैंक कर्मियों ने सटीक उदाहरण दिया:


उन्होंने कहा जरा सोचिए कि एक पार्टी ने पहले चुनाव प्रचार में मेहनत की , फिर चुनाव लड़े , फिर जीतकर आए । और सरकार में आ गए । लेकिन फिर उनसे कहा जाए कि आपकी ये सरकार विपक्ष के अंडर में काम करेगी तो कैसा लगेगा ??

बिल्कुल वैसे ही बैंक कर्मियों ने पढ़ाई करके तैयारियां कीं, परीक्षा दीं, इंटरव्यू दिए , तब जाकर सार्वजनिक बैंक में नौकरी मिली और अब  सरकार कहती है कि अब आप प्राइवेट बैंक में काम करेंगे ।

एक युवा बैंक कर्मी के अनुसार उसकी शादी ही सरकारी नौकरी होने की वजह से फिक्स हुई है घर से ग़रीब है और जमीन जायदाद न होने से शादी नहीं हो रही थी। अब जब सारकारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में नौकरी मिली तो शादी फिक्स हुई है लेकिन अगर निजीकरण हुआ तो ससुराल वाले धोखा समझेंगे या शायद शादी ही न होने पाए।

Bank DA from May 2020 to July 2020

रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकतम चार कंपनियां


हाल ही में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने रणनीतिक क्षेत्रों सहित उद्योग के सभी क्षेत्रों को निजी पूंजी के लिए खोलने की केंद्र की घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी उल्लेख किया था कि रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकतम चार कंपनियां होंगी।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार नीतिआयोग ने चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का निजीकरण करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण पर चर्चा के लिए उच्च स्तरीय बैठकों की व्यवस्था की गई है। पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, IOB, आदि कुछ नाम हैं जिनका निजीकरण किया जा सकता है।

June 04, 2020

बैंकों के निजीकरण की खबर कर्मचारी परेशान

बैंकों के निजीकरण की खबर कर्मचारी परेशान

"टॉप मैसनेजमेंट और यूनियन मर्जर के लिए मनाएं सरकार को "


यूनियन और टॉप मैनेजमेंट की सोच थी बैंक मर्ज होगी तो जिसमें मर्ज होगी उसमें परेशानी आएगी । इसलिए मर्जर बेकार है नहीं होना चाहिए ।

परेशानी किसको आती टॉप मैनेजमेंट को जिनको थोड़ा अधिक काम करना पड़ता और रॉब थोड़ा कम हो जाता । या फिर यूनियन के नेताओं को जो दूसरे बैंक में मर्ज होने से यूनियन नेता नहीं रह जाते क्योंकि जिसमे मर्ज हो रहे हैं उसमें पहले से यूनियन नेता मौजूद थे ।

बैंक मर्ज हो रही थीं । कर्मचारी यूनियन विरोध कर रहे थे । कर्मचारियों ने विरोध में हड़तालें कीं जिससे उनका ही वेतन कटा। फिर भी कई बैंक मर्ज हो गईं।

कुछ बड़ी बड़ी बैंक मर्ज हुईं जो बचे खुशी मना रहे थे कि हम बच गए । पर सरकार ने प्लान के तहत बड़े बड़ों को सिर्फ खदेड़ा और छोटों को चक्रव्यूह में घेरा ।

जो समझदार थे उस समय भी बोल रहे थे कि छोटी बैंक अकेले रह गईं तो उनकी बोली आसानी से लग सकती है । बड़ी बैंकों को खरीदना इतना आसान न होगा ।

बैंक निजीकरण की खबर से परेशान हैं कर्मचारी


अब जबकि कुछ बैंकों के निजीकरण की खबर आ रही है तो उन बैंकों के कर्मचारियों के चेहरे उदास हैं परेशान हैं । वे जमकर उस यूनियन को कोस रहे हैं जो मर्जर के विरोध में हड़ताल करके सेलरी कटवाती आई हैं । जिसका कोई नतीजा नहीं बैंक लगातार मर्ज हुईं और अब निजीकरण की तरफ जा रही हैं

अब जबकि सरकार ने फिर से  ऐसी बात रखी है तब हर कर्मचारी के अंदर से आवाज आ रही है कि काश कोई बड़ी बैंक हमारी बैंक को भी अपने साथ ले ले ।

वक्त अभी भी है टॉप मैनेजमेंट और यूनियन सरकार से जाकर बात करें कि हम मर्जर को तैयार हैं किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक में मर्ज कर दीजिए । अन्यथा एक बार निजीकरण की फ़ाइल आगे बढ़ गई तो बैंक कर्मियों को मर्जर के विरोध की सजा जिंदगी भर झेलनी होगी । जबकि मर्जर से दो चार साल ही परेशानी होगी ।

मर्जर के बाद अब बैंकों का निजीकरण

मर्जर के बाद अब बैंकों का निजीकरण
इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के अनुसार कुछ बैंकों का निजीकरण किया जा सकता है । रिपोर्ट की मानें तो वित्त मंत्रालय शीर्ष सरकारी अधिकारियों की एक टीम गठित की जा चुकी है जो इस प्रस्ताव पर काम कर रही है।

नीति आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह बैंकों के निजीकरण को अपनी हरी झंडी दे दे। साथ ही ये सुझाव भी दिया गया है कि कुछ चुनिंदा उद्योग घरानों को ही बैंकों का लाइसेंस दे, साथ ही उन्हें इस बात की स्पष्ट निर्देश दिया जाए कि वह ग्रुप कंपनियों को कर्ज ना दें।

कई बैंक एनपीए की वजह से अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में विफल हो रहे हैं और इनकी स्थिति बेहतर नहीं हो रही है। ऐसे में सरकार इन बैंकों के निजीकरण पर विचार कर रही है।

इन बैंकों का हो सकता है निजीकरण


ET की खबर के अनुसार सरकार पंजाब एंड सिंड बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक के निजीकरण पर विचार कर रही है।

सरकार द्वारा हाल ही में कई बैंकों का मर्जर किया गया था। 10 क्षेत्रीय बैंकों को 4 बड़े बैंकों में मर्ज किया जा चुका है ।

April 30, 2020

Bank DA from May 2020 to July 2020

Bank DA from May 2020 to July 2020

DA for Bankers from May 2020 to July 2020


Bank DA for August2020 to October 2020


DA Bank ( Dearness Allownce As per IBA circular)  for workmen and officer Employees in banks for the month of May, June and July 2020 has been decided.

On the basis of CPI data All india average CPI (consumer price index) for the months of January to March 2020 (base 1960=100).

Total 761 slabs DA on basic and special allowances for the bank staff. The last quarterly payment of DA was at 759 Slabs.

Hence there is an increase in DA slabs of 2 slabs. (DA increase 0.2%)


That Means for the period of May 2020 to July 2020, Bank staff is eligible for 76.1% DA which means 2 slabs (0.2%) increase over the previous quarter.

DA for bank Employees May 2020 to July 2020


The rate of Dearness Allowance payable to staff and officers for the months of May, June and July 2020 shall be 76.1 % of ‘Basic pay’.

While arriving at dearness allowance payable, decimals from third place may please be ignored.




Bank DA


bank-da-from-may-2020-to-july-2020


Bank DA for the period of May 2020 to July 2020, Bank staff is eligible for 76.1% DA which means 2 slabs (0.2%) increase DA for bank Employees may 2020 to july 2020

Bank DA for August2020 to October 2020

March 22, 2020

लॉक डाउन में 2 बजे तक खुलेंगे बैंक

लॉक डाउन में 2 बजे तक खुलेंगे बैंक

लॉक डाउन में खुलेंगे बैंक


Banks are open in lock down with limited services.


कोरोना से बैंक काम प्रभावित


कोरोना वायरस की वजह से पूरा देश लॉक डाउन की स्थिति में है ऐसे में बैंकिंग भी एक जरुरी सेवा है क्योंकि  हर व्यक्ति को पैसे की जरूरत होती ही है ।

23 मार्च से सिर्फ जरूरी बैंक सेवा


ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्टाफ को कम करते हुए 23 मार्च से बैंक सिर्फ कैश जमा और निकासी , चेक क्लीयरिंग और नेफ्ट NEFT आरटीजीएस RTGS व सरकारी लेनदेन की सेवाएँ ही प्रदान करेंगे । यह सेवाएं 10 से 2 बजे तक ही रहेंगीं ।

कोरोना वायरस लक्षण और बचाव के उपाय

The Indian Banks’ Association (IBA) on Sunday said bank branches will provide only essential services such as cash deposits and withdrawals, clearing of cheques, remittances and government transactions from March 23, 2020 onwards.

जरूरी हो तो ही जाएँ बैंक नहीं होंगे सभी काम


पासबुक प्रिंटिंग, नया खाता व अन्य गैर जरूरी कार्य स्थिति सुधार के बाद ही संभव होंगें। जरूरी हो तो ही बैंक का रुख करें । जिनका काम हो वे अकेले ही जाएँ साथियों को साथ लेकर न घूमें ।

कोरोना वायरस पर पूरी जानकारी अपडेट

March 05, 2020

यस बैंक से निकाल सकेंगे मात्र 50 हजार

यस बैंक से निकाल सकेंगे मात्र 50 हजार

यस बैंक निकासी सीमा


अगर आप यस बैंक के ग्राहक हैं तो आपके लिए एक बुरी खबर है सरकार ने निजी क्षेत्र के बैंक यस बैंक पर 30 दिन की अस्थायी रोक लगाते हुए इस दौरान खाताधारकों के लिए निकासी की सीमा 50 हजार रुपये तय कर दी है।


इस पूरी अवधि में खाताधारक 50 हजार रुपये से अधिक नहीं निकाल सकेंगे। यदि किसी खाताधारक के इस बैंक में एक से अधिक खाते हैं तब भी वह कुल मिलाकर 50 हजार रुपये ही निकाल सकेगा।


RBI की अधिसूचना में कहा गया है कि आज शाम छह बजे से यह रोक शुरू हो गयी है और 03 अप्रैल तक जारी रहेगी।




मतलब अब यस बैंक के ग्राहक 1 महीने तक सिर्फ 50 हजार रुपये ही अपने खाते से निकाल सकेंगे।




भारतीय रिजर्व बैंक ने यस बैंक के निदेशक मंडल को भी भंग कर दिया है। इसके अलावा पूर्व एसबीआई सीएफओ प्रशांत कुमार को यस बैंक का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया है।





आरबीआई ने ये कार्रवाई बैंक की आर्थिक हालत को देखते हुए की है।  यस बैंक बीते कुछ समय से फंड जुटाने के लिए संघर्ष कर रहा है।


इससे पहले गुरुवार को ये खबर आई थी कि सरकार ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI को यस बैंक में हिस्‍सेदारी खरीदने के लिए कहा है ।  यस बैंक में एसबीआई की हिस्‍सेदारी की खबर से बैंक के शेयर में 25 फीसदी से अधिक की तेजी आ गई ।





यस बैंक की आर्थिक हालत ठीक नहीं है।  बैंक पर कर्ज बढ़ता जा रहा है तो वहीं शेयर भी टूट रहा है।


बैंक का नियंत्रण भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में वित्तीय संस्थानों के एक समूह के हाथ में देने की तैयारी की गयी है।
आरबीआई ने कहा कि यस बैंक लगातार एनपीए की समस्या से जूझ रहा है, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा है।


जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास यस बैंक में एक से अधिक अकाउंट है तो सभी अकाउंट को मिलाकर वह कुल 50 हजार रुपये ही निकाल सकता है ।


करीब 6 महीने पहले आरबीआई ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) पर  प्रतिबंध लगाया था । पीएमसी बैंक से अधिकतम 10 हजार रुपये की विड्रॉल लिमिट तय किया था । बाद में इस लिमिट को बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया था ।